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संपादकीय: नया चैंपियन

लार्ड्स के मैदान में इस विश्व कप में रोमांच भी चरम पर पहुंच गया था। इंग्लैंड को विश्व कप का खिताब दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका बेन स्टोक्स की रही जिन्होंने चौरासी रनों की नाबाद पारी खेली और फिर सुपर ओवर में भी चार गेंदों पर नौ रन बनाए।

इंग्लैंड ने जीता विश्वकप 2019 का खिताब (फोटो सोर्स-world cup twitter )

लार्ड्स का क्रिकेट स्टेडियम रविवार को जिन रेकार्डों का गवाह बना, उनकी उम्मीद किसी ने नहीं की होगी। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच विश्व कप का फाइनल जिस तरह से खेला गया और अंतिम निर्णय के लिए जिस तरह दुनिया भर में दर्शक सांस रोक कर टीम की जीत का इंतजार करते रहे, वैसा पहले किसी विश्व कप में नहीं देखा गया था। पचास ओवर का मैच टाई होने के बाद सुपर ओवर भी टाई हो जाने और फिर चौकों-छक्कों की कुल संख्या से हार-जीत का फैसला होने की घटना ने विश्व कप के इतिहास में एक नया अध्याय रच डाला। आखिर के पंद्रह मिनट के इस घटनाक्रम ने पूरे मैच को एक ऐसे रोमांच भरे खेल में बदल डाला जो किक्रेट प्रेमियों ने पहले कभी नहीं देखा था। विश्व कप के इतिहास में चौवालीस साल के इंतजार के बाद इंग्लैंड ने पहली बार विश्व कप जीता। इंग्लैंड को क्रिकेट का जन्मदाता माना जाता है, लेकिन अभी तक विश्व कप उसके हाथ नहीं लग पाया था। इसलिए अपने ही देश में पहला विश्व कप जीतना इंग्लैंड के लिए बड़ी उपलब्धि है।

यों क्रिकेट में ऐसे रोमांच भरे क्षण कई बार आते हैं जब दर्शक सांस थाम कर बैठ जाते हैं। लेकिन लार्ड्स के मैदान में इस विश्व कप में रोमांच भी चरम पर पहुंच गया था। इंग्लैंड को विश्व कप का खिताब दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका बेन स्टोक्स की रही जिन्होंने चौरासी रनों की नाबाद पारी खेली और फिर सुपर ओवर में भी चार गेंदों पर नौ रन बनाए। इस विश्व कप के ग्रुप मैच में इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को एक सौ उन्नीस रनों से हराया था। इस बार इंग्लैंड की टीम 1992 के बाद पहली बार फाइनल में पहुंची थी। 1979, 1987 और 1992 में इंग्लैंड फाइनल में तो पहुंची थी, लेकिन कप को नहीं छू पाई थी। जबकि न्यूजीलैंड के लिए यह फाइनल का दूसरा मौका था, पिछले विश्व कप फाइनल में न्यूजीलैंड को आॅस्ट्रेलिया ने हराया था। इसके बावजूद यह सच है कि भले विश्व कप न्यूजीलैंड के हाथ न आया हो, लेकिन जिस तरह से टीम ने अंतिम समय तक खेला, वह दिल जीतने वाला खेल रहा। न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन ने विश्व कप में बतौर कप्तान सबसे ज्यादा रन बनाने का एक बड़ा रेकार्ड अपने खाते में दर्ज करा दिया। विलियमसन ने कुल पांच सौ अठहत्तर रन बनाए।

इस बार के क्रिकेट विश्व कप में जीत का फैसला चौकों की संख्या से हुआ है न कि रनों से। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों ने बराबर रन बनाए और मैच तथा सुपर ओवर में एक-दूसरे के बराबर रहे। लेकिन चौके और छक्के इंग्लैंड ने ज्यादा मारे, इसलिए उसे विजयी घोषित कर दिया गया। ऐसी परिस्थितियों में हार-जीत का फैसला करने को लेकर जो नियम-कायदे पहले से निर्धारित हैं, उन पर अब सवाल उठने लगे हैं। बुनियादी सवाल यह है कि अगर मैच और सुपर ओवर दोनों में ही दोनों टीमें बराबर रन बना लेती हैं तो कैसे एक टीम दूसरी से हार सकती है! तो फिर ऐसी स्थिति में क्यों नहीं दोनों को ही विश्व कप विजेता घोषित कर दिया जाना चाहिए? अगर दोनों टीमों की बाउंडरी की संख्या भी बराबर होती तब क्या होता? दरअसल, इस तरह के नियम हार-जीत के फैसले में हास्यास्पद ही लगते हैं। इंग्लैंड ने विश्व कप भले जीत लिया हो, लेकिन खेल के नजरिए से दोनों टीमें बराबर रहीं। एक ने कप जीता और दूसरी ने दिल!

 

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