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संपादकीय: अपाचे की ताकत

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय वायु सेना के मिग विमान जिस तेजी से दुर्घटनाग्रस्त होते रहे हैं उससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर कब तक हमारी सेना इन पुराने विमानों के सहारे दुश्मन से लोहा लेगी!

Author Published on: September 5, 2019 1:25 AM
‘अपाचे एएच-64ई’ लड़ाकू हेलीकॉप्टर

बदलते दौर में जैसी गंभीर सामरिक चुनौतियां सामने आ रही हैं और लड़ाई के तौर-तरीके बदल रहे हैं, उसे देखते हुए अत्याधुनिक हथियारों और साधनों की जरूरत भी बढ़ी है। ऐसे में सेना के आधुनिकीकरण की महत्ता से इंकार नहीं किया जा सकता। भारतीय वायु सेना के इतिहास में मंगलवार को उस वक्त नया अध्याय जुड़ गया जब उसने दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू हेलिकॉप्टर- अपाचे एएच-64 ई को अपने बेड़े में शामिल कर लिया। अमेरिका से खरीदे गए इन हेलिकप्टरों को फिलहाल पठानकोट के वायुसैनिक अड्डे पर तैनात किया गया है। यह इलाका पाकिस्तान की सीमा के सबसे करीब है। फिलहाल भारत को आठ अपाचे मिले हैं। इन हेलिकॉप्टरों की खरीद के लिए भारत ने 2015 में अमेरिका के साथ करार किया था। हालांकि वायु सेना को इन हेलिकॉप्टरों की जरूरत कई सालों से थी। सेना के लिए जरूरी साजो-सामान खरीदने में इस तरह की देरी सेना को कमजोर ही करती है। आज मिस्र, ग्रीस, इंडोनेशिया, इजराइल, कुवैत, नीदरलैंड, कतर, सऊदी अरब, सिंगापुर सहित दुनिया के पंद्रह देशों के पास अपाचे हेलिकॉप्टर हैं। इन देशों के मुकाबले तो भारत की सामरिक जरूरतें कहीं ज्यादा बड़ी हैं।

भारत को सबसे बड़ी चुनौती अपने दो पड़ोसियों पाकिस्तान और चीन से है। हाल में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ जिस तरह का हमलावर रुख अपनाया हुआ है और बार-बार युद्ध की धमकियां दे रहा है, उसे देखते हुए जरूरी है कि हमारी वायु सेना अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों से सुसज्जित हो। हालांकि भारत अपनी ओर से युद्ध से बचने की नीति पर चलने वाला देश है, लेकिन दुश्मन के हमले का जवाब देने के लिए सेना का मजबूत होना जरूरी है। वायु सेना के बेड़े में अपाचे के शामिल होने से सेना की मारक क्षमता काफी बढ़ेगी। अपाचे दुश्मन को करारा जवाब देने के लिए काफी है। यह एक मिनट में एक सौ अट्ठाईस लक्ष्यों पर निशाना साध सकता है। एक साथ सोलह टैंकरोधी मिसाइलें छोड़ने में सक्षम है। इसमें नीचे की ओर लगी राइफल में एक साथ बारह सौ गोलियां भरी जा सकती हैं। दो इंजनों वाले अपाचे की रफ्तार तो ज्यादा है ही, यह लगातार तीन घंटे उड़ान भर सकता है और कुछ ही मिनटों में दुश्मन के ठिकानों को तबाह कर सकता है। इसे किसी रडार पर भी नहीं पकड़ा जा सकता।

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय वायु सेना के मिग विमान जिस तेजी से दुर्घटनाग्रस्त होते रहे हैं उससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर कब तक हमारी सेना इन पुराने विमानों के सहारे दुश्मन से लोहा लेगी! ऊंचे और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सैनिकों को लाना-ले जाना, रसद और हथियार पहुंचाना वायु सेना के लिए अब तक मुश्किलों भरा काम था। इसके लिए वायु सेना ने चिनूक हेलिकाप्टर अपने बेड़े में शामिल किए हैं। लेकिन अब समस्या पाकिस्तान के साथ लगी सीमा पर घुसपैठियों को रोकने की है। अपाचे की मदद से घुसपैठियों को ढेर किया जा सकेगा। ये विमान अंधेरे में भी लक्ष्य को भेद सकते हैं। ऐसे में अपाचे सीमा की सुरक्षा में ज्यादा कारगर साबित होंगे। अब वायु सेना के अच्छे दिन आ गए हैं। इसी महीने उसे फ्रांस से रफाल की पहली खेप भी मिलने वाली है। अगर देश के नीति-निर्माता सामरिक जरूरतों का समय से खयाल रखते हुए इसमें फैसले लेने में देरी न करते तो सेना को संसाधनों की कमी से जूझना न पड़ता।

 

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