संपादकीय: उम्मीद का गलियारा

सिख पंथ के अनुयायियों के लिए करतारपुर साहब का महत्त्व बहुत है। हर कोई वहां दर्शन के लिए जाना चाहता है। हालांकि यह स्थान भारतीय सीमा से थोड़ी ही दूरी पर पाकिस्तान में है।

गलियारा पाकिस्तान के करतारपुर स्थित दरबार साहिब।

करतारपुर गलियारे से संबंधित भारत की लगभग सभी मांगों को पाकिस्तान ने मान लिया है। वाघा बार्डर पर हुई दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक में विभिन्न मुद्दों पर सहमति बनी। हालांकि पाकिस्तान करतारपुर गलियारा खोलने पर पहले ही राजी हो गया था, पर यात्रियों की संख्या और दूसरे देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों को बिना वीजा के प्रवेश आदि से संबंधित मांगों को लेकर सहमत नहीं हो पा रहा था। इसलिए लग रहा था कि यह मामला खटाई में पड़ जाएगा। पर रविवार को हुई बैठक काफी उत्साहजनक रही और पाकिस्तान का रुख सकारात्मक दिखाई दिया। हालांकि अभी एक दौर की बातचीत और होनी है, पर अब बहुत कम मुद्दे बचे हैं, जिन्हें लेकर शायद ही कोई परेशानी पैदा हो। इस साल गुरुनानक देव का साढ़े पांच सौवां प्रकाश पर्व मनाया जाएगा, जो कि नवंबर में होगा। इसलिए भारत की तरफ से दबाव था कि इस अवसर पर करतारपुर गलियारे को खोल दिया जाए और भारत से जाने वाले तीर्थयात्रियों को माकूल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। पर पाकिस्तान की अपनी भी कुछ अड़चनें हैं, जिसकी वजह से वह सारी मांगों को मानने से हिचक रहा था।

पहली बात तो यह कि पाकिस्तान प्रशासन ने अभी तक ठीक से यह अनुमान नहीं लगाया है कि करतारपुर में कितने लोगों का जमावड़ा संभव है। इसलिए जब भारत की तरफ से हर रोज पांच हजार लोगों के प्रवेश की मांग की जा रही थी, तो वह सिर्फ सात सौ यात्रियों को जाने देने की बात करता था। फिर दूसरे देशों में रह रहे भारतीय पासपोर्ट धारकों को बिना वीजा जाने देने की मांग को भी वह मानने से इनकार कर रहा था, क्योंकि उसे सुरक्षा संबंधी तैयारियों को लेकर कुछ आशंकाएं थीं। दूसरी बात कि अभी गलियारे का काम चल रहा है। सड़क पर अभी मिट्टी बिछाने का काम चालू है, उसके पक्की बनने में वक्त लगेगा। इसी तरह रावी नदी पर पुल बनाने का काम इतनी जल्दी संभव नहीं है। इन सब कामों में जितने पैसे और श्रमशक्ति की जरूरत है, वह भी जुटाना थोड़ा मुश्किल है। इसलिए पाकिस्तान रावी नदी पर पुल बनाने के प्रस्ताव को मानने से इनकार कर रहा था। अब उसने कहा है कि चूंकि इस साल उसके पास काम बहुत हैं, इसलिए रावी नदी पर पुल बनाने का काम तो पूरा नहीं हो पाएगा, पर अगले साल तक यह काम जरूर संपन्न हो जाएगा। पाकिस्तान का यह सकारात्मक रुख उत्साहजनक है।

सिख पंथ के अनुयायियों के लिए करतारपुर साहब का महत्त्व बहुत है। हर कोई वहां दर्शन के लिए जाना चाहता है। हालांकि यह स्थान भारतीय सीमा से थोड़ी ही दूरी पर पाकिस्तान में है। इतना नजदीक कि बहुत सारे लोग सीमा पर लगी दूरबीनों से करतारपुर साहब के दर्शन कर लेते हैं। मगर वहां तक पहुंचने के लिए दर्शनार्थियों को वीजा-पासपोर्ट की जरूरत पड़ती है। उसके लिए हवाई जहाज से सफर कर लंबे रास्ते से वहां तक पहुंचना पड़ता है। सामान्य दर्शनार्थियों के लिए यह करना संभव नहीं है। इसलिए यह गलियारा खुलने से वहां जाने वालों के लिए बड़ी सुविधा हो जाएगी। फिलहाल सुरक्षा संबंधी कारणों से पाकिस्तान को जो हिचक महसूस हो रही है, और वह संभल-संभल कर कदम बढ़ा रहा है, यह यात्रा शुरू होने के बाद उसकी वह हिचक भी दूर हो जाएगी। दोनों मुल्कों के बीच आम लोगों की आवाजाही के रास्ते खुलने से अमन के रास्ते भी खुलते हैं।

 

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