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आतंक का रास्ता

राष्ट्रीय जांच एजंसी (एनआइए) ने दिल्ली को दहलाने की साजिश नाकाम कर दी है, यह राहत की बात है। लेकिन चिंता का विषय यह है कि आतंक के रास्ते पर बढ़ते हुए कुछ मुसलिम नौजवानों ने एक नया मॉड्यूल बना डाला और इसकी प्रेरणा उन्हें इस्लामिक स्टेट (आइएस) से मिली। इसका मतलब साफ है कि अब न केवल जम्मू-कश्मीर, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी आइएस से प्रेरित होकर मुसलिम नौजवान आतंकी बनने की दिशा में बढ़ रहे हैं।

Author Published on: December 28, 2018 3:38 AM
दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस या फिर त्योहारों के ठीक पहले आतंकी पकड़े जाते रहे हैं। (Source: PTI)

राष्ट्रीय जांच एजंसी (एनआइए) ने दिल्ली को दहलाने की साजिश नाकाम कर दी है, यह राहत की बात है। लेकिन चिंता का विषय यह है कि आतंक के रास्ते पर बढ़ते हुए कुछ मुसलिम नौजवानों ने एक नया मॉड्यूल बना डाला और इसकी प्रेरणा उन्हें इस्लामिक स्टेट (आइएस) से मिली। इसका मतलब साफ है कि अब न केवल जम्मू-कश्मीर, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी आइएस से प्रेरित होकर मुसलिम नौजवान आतंकी बनने की दिशा में बढ़ रहे हैं। अगर एनआइए ने चौकसी नहीं दिखाई होती तो इसकी पूरी आशंका थी ये नौजवान गणतंत्र दिवस और कुंभ मेले में धमाके करते हुए और आगे निकल जाते। एनआइए ने हरकत उल हर्ब-ए इस्लाम नाम के जिस आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, उसमें अभी तक पकड़े गए सभी आरोपी पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली के हैं। सत्रह ठिकानों पर घंटों की छापेमारी के बाद जो सामान मिला और पकड़े गए लोगों से पूछताछ हुई, उससे पता चला है कि अगर देर हो जाती तो न जाने कितने बेगुनाह लोग मारे जाते।

हालांकि दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस या फिर त्योहारों के ठीक पहले आतंकी पकड़े जाते रहे हैं। लेकिन तब और अब में फर्क यह है कि साजिश को अंजाम देने के लिए पहले आतंकी बाहर से ही आते रहे थे और कुछ दिन पूर्व ही दिल्ली में प्रवेश करते थे। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि दिल्ली आतंकियों का नया ठिकाना बनती जा रही है। कुछ इलाकों में छोटे-छोटे आतंकी मॉड्यूल खड़े हो रहे हैं। आतंकी बनने की दिशा में बढ़े इन मुसलिम नौजवानों ने पूछताछ में चौंकाने वाली बातों का खुलासा किया। इन लोगों ने कुछ महीनों में ही कई हमलों की साजिश रच ली थी, जिसकी किसी को भी, यहां तक कि परिवार के लोगों को भी भनक नहीं लग पाई। हालांकि यह मॉड्यूल पिछले काफी समय से एनआइए के रडार पर था, तभी इसके लोगों को पहले ही दबोच लिया गया।

सवाल है कि हमारे मुसलिम नौजवान आतंकी बनने की प्रेरित क्यों हो रहे हैं? हमारे समूचे समाज और शासन-व्यवस्था दोनों को इस बारे में सोचना होगा। पकड़े गए लोगों में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले से लेकर मौलवी तक शामिल हैं। अमरोहा शहर के एक मदरसे का मुफ्ती इस गुट का असली साजिशकर्ता पाया गया है। वह हथियार जुटाने और बम बनाने के निर्देश देता था। दिल्ली के जाफराबाद का एक नौजवान जो इंजीनियरिंग का छात्र है, बम बनाने में माहिर था। दिल्ली विश्वविद्यालय का एक छात्र सबके लिए पैसे जुटाता था। हापुड़ की एक मस्जिद का इमाम हथियार जुटाता था। दो लोग रॉकेट बनाने का काम करते थे। अमरोहा का एक आॅटो ड्राइवर बम का सामान छिपा कर रखने की जिम्मेदारी निभा रहा था। कुल मिला कर चंद लोगों ने अपने पैसे ही संगठन खड़ा किया और काफी हद तक तबाही का सामान तैयार कर लिया था। हालांकि इनका किसी बड़े आतंकी गुट से कोई संबंध अब तक सामने नहीं आया है। चिंता की बात यह है कि पढ़े-लिखे नौजवान ऐसे कामों में लग रहे हैं जो उन्हें बर्बादी के रास्ते पर ले जा रहे हैं। पकड़े गए नौजवानों में से कुछ ने तो अपने घर से चोरी करके पैसा जुटाया और संगठन खड़ा करने में लगा दिया। नौजवान अक्सर गुमराह होकर ऐसे कदम उठा लेते हैं। हां, यह जरूर है कि आइएस, लश्कर, जैश जैसे संगठन पैसे का लालच देकर मुसलिम बहुल इलाकों में अपनी जड़ें जमाने की कोशिशों में लगे हैं और मदरसे व मस्जिदें इनका बड़ा जरिया बन जाती हैं। इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को ज्यादा सतर्क रहना होगा।

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