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संपादकीय: रूस से रिश्ते

पिछले महीने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को खत्म किए जाने के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट के संदर्भ में उठी। पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त राष्ट्र से लेकर तमाम देशों के समक्ष कश्मीर से धारा 370 को हटाने का मसला उठाया था।

Author Published on: September 6, 2019 12:58 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बुधवार को ज्वेज्दा पोत निर्माण परिसर का दौरा किया

भारत और रूस के रिश्तों में अब पुराने दिन लौटने के संकेत साफ नजर आ रहे हैं। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा ज्यादा महत्त्वपूर्ण और सफल इसलिए कही जानी चाहिए कि दोनों देश अपने आंतरिक मामलों में किसी भी बाहरी दखल के खिलाफ खुल कर साथ आए हैं। रूसी शहर व्लादिवोस्तोक में भारत और रूस के बीच होने वाली सालाना शिखर बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कहा कि अपने देश के अंदरूनी मसलों में किसी भी बाहरी दखल के वे खिलाफ हैं। यह बात पिछले महीने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को खत्म किए जाने के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट के संदर्भ में उठी। पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त राष्ट्र से लेकर तमाम देशों के समक्ष कश्मीर से धारा 370 को हटाने का मसला उठाया था। लेकिन हर जगह से पाकिस्तान को यही सुनने को मिला कि यह भारत का अंदरूनी मसला है और इस पर कुछ नहीं किया जा सकता। इसके अलावा अमेरिका भी समय-समय पर इस मामले में मध्यस्थता का शिगूफा छोड़ता रहा है, जिसे भारत ने साफ तौर खारिज कर दिया। ऐसे में अब इस मसले पर रूस ने भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। रूसी राष्ट्रपति ने तो कहा भी कि पाकिस्तान कश्मीर को लेकर अफवाहें फैला रहा है। भारत की यह बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है। एक पुराने दोस्त ने भारत के साथ पूरी तरह से एकजुटता दिखाई है।

भारत और रूस के बीच ईरान को लेकर भी बात हुई। भारत पर अमेरिका का दबाव है कि वह उसके साथ कारोबारी रिश्ते खत्म करे। तेल आयात तो भारत को मजबूरन बंद करना ही पड़ा है। भारत किसके साथ व्यापार करे और किसके साथ नहीं, यह उसका अंदरूनी मामला है। रूस तो खुल कर ईरान के साथ है। इसीलिए पुतिन ने साफ-साफ कहा कि किसी के दबाव में ईरान के साथ रिश्ते खत्म नहीं किए जा सकते। कश्मीर और ईरान के मसले पर रूस का खुल कर भारत के साथ आना बड़ी बात है। हालांकि बदलते वैश्विक परिदृश्य में पिछले कुछ दशकों में भारत का अमेरिका की ओर झुकाव ज्यादा बढ़ा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि रूस से भारत के संबंधों पर कोई असर पड़ा। ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना से लेकर कई क्षेत्रों में रूस भारत को मदद देता रहा है।

मोदी और पुतिन पिछले एक साल में छह बार मिल चुके हैं। दोनों नेताओं के बीच जिस तरह से निजी रिश्ते बन गए हैं उनका लाभ भारत को मिल रहा है। रूस ने ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र सहित भारत के साथ पंद्रह करार किए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत की तरक्की में रूस जैसे पहले साथ था, वैसे ही आज भी है। दोनों देशों के बीच हुए असैन्य परमाणु समझौते के तहत रूस भारत में बीस परमाणु इकाइयां लगाएगा। दूसरी ओर, भारत रूस के तेल और गैस क्षेत्र में निवेश करेगा। अंतरिक्ष के क्षेत्र में मदद के तौर पर रूस गगनयान मिशन के तहत भेजे जाने वाले भारत के अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षण देगा। पिछले कुछ सालों में तेजी से विकास करने वाले और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश के रूप में भारत की जो छवि बनी है उसकी अहमियत रूस बखूबी समझता है। रूस यह भी जानता है कि भारत को अपने एक पड़ोसी के कारण दशकों से आतंकवाद झेलना पड़ रहा है। ऐसे में भारत को रूस से हर स्तर पर समर्थन मिलना दोनों देशों के रिश्तों को और प्रगाढ़ करेगा।

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