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संपादकीय: खतरे का वायरस

यों दिल्ली सहित सात हवाई अड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है, जिसमें चीन और हांगकांग से लौटे यात्रियों की गहन जांच की जाएगी।

कोरोना ने दुनिया के ज्यादातर देशों को चपेट में ले लिया है।

अमूमन हर साल दुनिया के किसी हिस्से में किसी न किसी ऐसी बीमारी के वायरस की खबर आती है, जिसके खतरे सामान्य से बहुत ज्यादा होते हैं। निश्चित रूप से यह दुनिया भर में बदलते पर्यावरण, जलवायु में होने वाले उथल-पुथल, मनुष्य और उसकी बस्तियों की जीवनशैली में असंतुलन की वजहों से होता होगा। लेकिन इतना साफ है कि ऐसे मौकों पर दुनिया भर में अब तक विकास कर सका चिकित्सा विज्ञान अक्सर लाचार नजर आता है। फिलहाल चीन में कोरोना वायरस की वजह से दुनिया भर में एक बड़ी चिंता खड़ी हो गई है कि अगर इसका विस्तार नहीं रुका तो बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। माना जा रहा है कि इस वायरस के संक्रमण की शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई है, लेकिन अब यह चीन के कई शहरों में फैल चुका है और इसकी चपेट में करीब साढ़े आठ सौ से ज्यादा लोगों के आने की खबर है। अब तक इस वायरस से पच्चीस लोगों की मौत हो चुकी है।

कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड के विश्लेषण में यही सामने आया है कि यह मनुष्यों को संक्रमित करने की क्षमता रखने वाले अन्य कोरोना वायरस की तुलना में सार्स के ज्यादा नजदीक है। करीब अठारह साल पहले सार्स के कहर से लगभग आठ सौ लोगों की मौत हो गई थी। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस की चुनौतियों के मद्देनजर आपात बैठक बुलाई। चीन के जिस शहर वुहान में इस वायरस का उद्गम माना जाता है, वह फिलहाल एक तरह से बंद है और वहां अस्थायी तौर पर सार्वजनिक यातायात को रोक दिया गया है। संक्रमण के मद्देनजर वहां के लोगों को शहर नहीं छोड़ने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, थाइलैंड, जापान, अमेरिका और दक्षिण कोरिया में भी इसके संक्रमण के कुछ मामले पाए गए हैं। खासतौर पर वुहान से होकर आने वाले लोगों में इसके संक्रमण का डर सबसे ज्यादा पाया गया है। भारत चूंकि चीन का पड़ोसी है और कई स्तरों पर दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही बनी रहती है, इसलिए स्वाभाविक रूप से यहां इस मसले पर खास सावधानी बरतनी होगी। यों दिल्ली सहित सात हवाई अड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है, जिसमें चीन और हांगकांग से लौटे यात्रियों की गहन जांच की जाएगी।

मुश्किल यह है कि भारतीय परिस्थितियों में आमतौर पर सर्दी-जुकाम को एक सामान्य बीमारी की तरह लिया जाता है और लोग इसे लेकर ज्यादा फिक्रमंद नहीं होते हैं, बल्कि ज्यादातर लोग ऐसी स्थितियों में लापरवाही बरतते हैं और बिना डॉक्टर की सलाह लिए अपने स्तर पर दवा दुकानों से ली गई दवाइयां खा लेते हैं। ताजा चुनौती इसलिए गंभीर है कि कोरोना वायरस की चपेट में आने वाले व्यक्ति में भी लगभग वैसे ही लक्षण देखे गए हैं, जो आम सर्दी-जुकाम में होते हैं। मसलन, सिरदर्द, नाक बहना, खांसी, गले में खराश, बुखार, अस्वस्थ होने का अहसास, छींकें आना आदि के अलावा निमोनिया और फेफड़ों में सूजन। अब अगर इसे देश में होने वाली आम मौसमी बीमारियों की तरह देखा जाएगा तो शायद यह कोरोना से उपजी गंभीरता की अनदेखी की तरह होगा, क्योंकि इससे संक्रमित लोगों में सर्दी-जुकाम के लक्षण जरूर होते हैं, लेकिन इसका असर गंभीर हो तो जान भी जा सकती है। जाहिर है, संक्रमण की परिस्थितियों को पूरी तरह नियंत्रित करने के साथ-साथ जांच के बाद प्रभावित लोगों की अधिकतम सावधानी से इलाज ही इसका सामना करने के उपाय हैं, क्योंकि अभी तक इस वायरस को बेअसर करने कोई टीका तैयार नहीं किया गया है।

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