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संपादकीय: अफवाह के स्रोत

अफवाह की वजह से हुई किसी हिंसक घटना के बाद असली अपराधी तक पहुंचने और वाट्सऐप के दुरुपयोग को रोकने में यह मददगार साबित हो सकता था। लेकिन वाट्सऐप कंपनी ने एक तरह से सरकार की इस मांग पर विचार करने से सीधे इनकार कर दिया है।

Author August 25, 2018 1:35 AM
WhatsApp: इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

पिछले कुछ समय से देश के अलग-अलग इलाकों से भीड़ की हिंसा से संबंधित जितनी भी घटनाएं सामने आई हैं, उनके पीछे आमतौर पर किसी अफवाह की भूमिका पाई गई। भीड़ की हिंसा से जुड़ी हाल की ज्यादातर घटनाओं में वाट्सऐप के जरिए फैलाए गए भड़काऊ संदेशों या अफवाहों की भूमिका को देखते हुए केंद्र सरकार ने वाट्सऐप कंपनी से कहा था कि वह ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित करे या तकनीक इस्तेमाल करे, जिससे यह पता चल सके कि किसी फर्जी या झूठी सूचना का स्रोत कहां है। अफवाह की वजह से हुई किसी हिंसक घटना के बाद असली अपराधी तक पहुंचने और वाट्सऐप के दुरुपयोग को रोकने में यह मददगार साबित हो सकता था। लेकिन वाट्सऐप कंपनी ने एक तरह से सरकार की इस मांग पर विचार करने से सीधे इनकार कर दिया है। कंपनी का कहना है कि अगर ऐसा किया गया तो इससे कंपनी की निजता की नीति कमजोर होगी और संभव है कि इसके दुरुपयोग की और संभावनाएं पैदा हों। जाहिर है, यह कुछ असामाजिक तत्त्वों की वजह से पैदा हुई समस्या है, जिसमें बाकी लोगों के निजता के अधिकार का भी हनन हो सकता है।

गौरतलब है कि फिलहाल चूंकि किसी झूठी खबर या अफवाह के स्रोत का पता नहीं चल पाता है, इसलिए कई लोग या समूह ऐसे लिखित संदेश, संपादित फोटो या वीडियो दूसरों को भेज देते हैं जो भड़काने वाले होते हैं। कोई संदेश सबसे पहले किसने किसे भेजा, इसका पता लगाना अब तक संभव नहीं हुआ है। इसलिए अगर किसी अफवाह या नफरत भरे संदेश की वजह से हिंसा हुई, तो उसे शुरू करने वाले को पकड़ना मुश्किल है। जबकि कई बार ऐसी सूचनाओं के कारण लोग अपना आपा खो देते हैं और वे या तो किसी निर्दोष की पीट-पीट कर जान ले लेते हैं या फिर इससे व्यापक हिंसा फैल जाती है। इसलिए अगर सरकार ने वाट्सऐप से इस तरह की फर्जी खबरों के स्रोत के बारे में पता लगाने वाली तकनीक लगाने की मांग की थी तो इसकी वाजिब वजहें हैं। अब कंपनी के मना करने के बाद सरकार अगर इस ऐप को बंद करने का रास्ता अपनाती है तो यह झूठी खबरें फैलाने वालों के साथ-साथ सही तथ्यों पर बात करने सहित दूसरी सूचनाओं के माध्यम और बोलने की आजादी पर भी चोट होगी। लेकिन यह भी सच है कि वाट्सऐप या सोशल मीडिया के कुछ मंच अफवाहों या झूठी खबरों को बहुत तेजी से फैलाने का एक बड़ा और आसान जरिया भी बन चुके हैं।

तकनीक व्यक्ति निरपेक्ष होती है और उसका इस्तेमाल कोई भी अपनी सुविधा से और अपने अनुकूल कर सकता है। इसलिए आज जहां बड़े पैमाने पर लोग इसके जरिए सकारात्मक काम कर रहे हैं, तो ऐसे लोग भी हैं जो इसके सहारे व्यापक नकारात्मक और कई बार हिंसा फैलाने वाले संदेश भी दे रहे हैं। जब इंटरनेट या इसके जरिए संचालित तकनीकों का दौर नहीं था, तब किसी अफवाह को फैलने में वक्त लगता था और इस बीच पता चलने पर प्रशासन के लिए स्थिति पर काबू पाना संभव हो जाता था। लेकिन आधुनिक तकनीकी और इंटरनेट के इस दौर में लोगों के हाथ में बहुत सारी सुविधाएं एक जगह आ गई हैं, तो कुछ असामाजिक तत्त्वों द्वारा इसके दुरुपयोग भी बढ़े हैं। खासतौर पर किसी बात को तोड़-मरोड़ कर या अफवाह फैलाने में सोशल मीडिया या वाट्सऐप जैसे मंचों का सहारा जिस पैमाने पर लिया जाने लगा है, वह आज समाज और सरकार, दोनों के लिए एक बड़ी समस्या बन चुका है। इसलिए अगर इसका कोई हल निकल सके तो यह सबके लिए अच्छा होगा।

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