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संपादकीय: पटरी पर वापसी

पिछले अड़तालीस दिन से जारी बंदी के कारण बड़ी संख्या में लोग देश के तमाम हिस्सों में फंस गए हैं और उन्हें अपने घर लौटना है। इसके अलावा जरूरी काम से लोगों को देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से जाना भी है। ऐसे में रेल सेवाएं शुरू करना अब अपरिहार्य हो गया था।

Government fix prices of hand sanitizer and face mask to stop black marketing, coronavirus, COVID-19, ram vilas paswan, minister of consumer affairs, IRCTC, Indian Railway, Indian Railway IRCTC, Indian Railway ticket, Irctc ticket refundकोरोना वायरस से बचाव के लिए मास्क पहने हुए रेल यात्री। फोटो: PTI

कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए जारी पूर्णबंदी के बीच देश की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन को पटरी पर लाने की एक और बड़ी कवायद के तौर पर यात्री ट्रेनों आंशिक आवाजाही भी शुरू कर दी गई है। इसके पहले ज्यादातर राज्यों ने अपने यहां औद्योगिक गतिविधियों को फिर से चालू करने का फैसला किया था। हालांकि देश में रेल सेवाएं शुरू करने को लेकर सरकार अभी फूंक-फूंक कर कदम इसलिए रख रही है कि कहीं अचानक से स्टेशनों पर भीड़ न उमड़ आए और संक्रमण फैलने का खतरा खड़ा न हो जाए। इसलिए सीमित संख्या और कई तरह के प्रतिबंधों के बीच ही ट्रेनों के परिचालन की अनुमति दी गई है।

पिछले अड़तालीस दिन से जारी बंदी के कारण बड़ी संख्या में लोग देश के तमाम हिस्सों में फंस गए हैं और उन्हें अपने घर लौटना है। इसके अलावा जरूरी काम से लोगों को देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से जाना भी है। ऐसे में रेल सेवाएं शुरू करना अब अपरिहार्य हो गया था। तथ्य यह भी है कि रेलवे भी लंबे समय तक अपना परिचालन बंद नहीं रख सकता।

रेलवे के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब पूरे देश में इतने लंबे वक्त तक ट्रेनों के चक्के ठहरे रहे हों। सिर्फ कुछ मालगाड़ियां और विशेष कामों जैसे अर्धसैनिक बलों और प्रवासी मजदूरों को लाने-ले जाने के लिए गाड़ियां चल रही हैं। पूर्णबंदी के दौरान सरकार इस वास्तविकता को समझ चुकी है कि रेल सेवाएं बंद करने का जो चौतरफा प्रभाव पड़ता है, वह कितना नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है। इसमें कोई शक नहीं कि आम रेलयात्रियों के लिए गाड़ियां चलाने का फैसला जोखिम और चुनौतीभरा है।

इसलिए अभी उन्हीं गाड़ियों को चलाने की तैयारी हुई है जो लंबी दूरी की हैं और रास्ते में पड़ने वाले बड़े स्टेशनों पर ठहरती हैं, साथ ही जिनका किराया भी अच्छा-खासा है, ताकि हर कोई घर से तत्काल निकलने की जल्दबाजी न करे। ट्रेन से यात्रा करना यात्रियों के लिए अब कई मायनों में एक नए तरह का अनुभव लिए होगा। सुरक्षित दूरी रखने और मुंह को ढकने जैसी जरूरी शर्तों का पालन करना होगा।

विशेषज्ञ भी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पूर्णबंदी-3 की अवधि पूरी होने के साथ ही रेल, बस और हवाई सेवाएं शुरू कर दी जानी चाहिए। सरकार ने हवाई सेवाएं भी जल्द चालू करने का संकेत दिया है, लेकिन अभी सिर्फ घरेलू उड़ाने ही शुरू होने की संभावना है। रेल, बस और हवाई सेवाएं बंद रहने से देश के परिवहन क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

अभी सरकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कोरोना संक्रमितों के इलाज और महामारी को फैलने से रोकने की है। इसलिए रेलवे ने बड़ी संख्या में अपने डिब्बों को मरीजों के लिए वार्ड के रूप में तैयार रखा है। लेकिन अब चरणबद्ध तरीके से बंदी के दौर से निकलना भी जरूरी है। जिन क्षेत्रों में खतरा बहुत ज्यादा है, उन्हें छोड़ कर देश के बाकी हिस्सों में बस जैसे सार्वजनिक परिवहन को भी अनुमति दी जानी चाहिए। जब तक अंतरराज्यीय सीमाएं नहीं खुलेंगी, निजी वाहन नहीं चलने दिए जाएंगे, तब तक जनजीवन सामान्य नहीं हो पाएगा।

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