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संपादकीय: चीन की हरकत

पिछले कुछ सालों से चीनी सैनिक भारत से सटी सीमाओं पर उकसावे वाली कार्रवाई को अंजाम देते रहे हैं। इससे यह तो स्पष्ट है कि सीमाई इलाकों में इस तरह की सैन्य गतिविधियों को तेज करने और भारतीय सीमा में घुसपैठ करने के पीछे चीन की नीयत भारत को डरा-धमका कर उस पर कूटनीतिक दबाव बनाए रखने की रहती है, ताकि भारत चीन के खिलाफ कहीं भी खड़ा न हो।

नॉर्थ सिक्किम में चीनी सैनिकों से भिड़े भारतीय जवान (Representational Image)

पिछले एक हफ्ते के दौरान भारत-चीन सीमा पर लद्दाख और सिक्किम क्षेत्र में चीनी सैनिकों की ओर से की गई उकसावे वाली हरकतें गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। ये घटनाएं बता रही हैं कि सीमा पर बेवजह तनाव पैदा कर चीन भारत को बड़ी परेशानी में डालने की चाल चल रहा है। उसे लग रहा है कि भारत इन दिनों कोरोना महामारी से निपटने में लगा है, ऐसे में उसके खिलाफ फिर से मोर्चा खोल कर सीमाओं पर उलझाया जा सकता है और इसकी आड़ में अपने हितों के लिए दबाव बनाए जा सकते हैं। वरना हाल में भारत की ओर से ऐसी कोई बात नहीं हुई जिससे चीन को इस तरह के कदम उठाने का कोई मौका मिलता।

ताजा घटनाओं पर गौर करें तो ऐसी समानताएं नजर आती हैं जिनसे यह साबित होता है कि ये झड़पें किसी सोची-समझी साजिश का परिणाम हैं। पांच और छह मई को सिक्किम और लद्दाख दोनों जगह भारत और चीन के सैनिकों के बीच मारपीट और पथराव की घटनाएं हुईं। सिक्किम के नाकु-ला में मामला तब गरमाया जब चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की और भारतीय सैनिकों ने इसका विरोध किया। इसके बाद ही दोनों पक्षों में हिंसक झड़प हो गई। इसी तरह की घटना लद्दाख के पैंगोंग लेक के पास भी हुई। दोनों जगह एक ही वक्त पर एक-सी घटनाएं चीन की मंशा को बताने के लिए काफी हैं।

पिछले कुछ सालों से चीनी सैनिक भारत से सटी सीमाओं पर उकसावे वाली कार्रवाई को अंजाम देते रहे हैं। इससे यह तो स्पष्ट है कि सीमाई इलाकों में इस तरह की सैन्य गतिविधियों को तेज करने और भारतीय सीमा में घुसपैठ करने के पीछे चीन की नीयत भारत को डरा-धमका कर उस पर कूटनीतिक दबाव बनाए रखने की रहती है, ताकि भारत चीन के खिलाफ कहीं भी खड़ा न हो।

पूरी दुनिया में कोरोना महामारी फैलाने का आरोप झेल रहा चीन इस वक्त भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव में है। अमेरिका से लेकर ज्यादातर यूरोपीय देशों ने उसके खिलाफ जांच की मांग को लेकर मोर्चा खोल रखा है। ऐसे में चीन को यह डर सता रहा है कि अमेरिका और दूसरे देशों के दबाव में कहीं भारत भी उसके खिलाफ जांच की मांग का समर्थन न करने लगे।

चीनी सैनिकों ने जब-जब भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की है तो इसके पीछे यही तर्क दिया जाता है कि सीमाएं स्पष्ट नहीं होने की वजह से सैनिक एक दूसरे के सीमा में घुस जाते हैं और यही झगड़े का कारण बन जाता है। पर ऐसा नहीं है। साल 2017 में लद्दाख में चीनी सैनिक भारतीय सीमा में कई किलोमीटर भीतर तक घुस आए थे। दरअसल, 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद से ही चीन लद्दाख को अपना हिस्सा बताता रहा है।

इसीलिए पिछले साल जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया था, तब चीन की नींद उड़ गई थी और उसने इसका विरोध भी किया था। भारत-चीन की सीमा साढ़े तीन हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी और सबसे संवेदनशील है। इसलिए चीन के साथ लगती सीमा पर अशांति पैदा करने वाली किसी भी गतिविधि को हल्के में इसलिए नहीं लिया जा सकता, क्योंकि वर्ष 2017 में हम डोकलाम का संकट झेल चुके हैं, जब तीन महीने भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने डटे रहे थे। यह विडंबना ही है कि चीन एक तरफ भारत में बड़ा बाजार देखता है, अच्छे रिश्तों की दुहाई भी देता है और दूसरी ओर सीमा विवाद के नाम पर डराने-धमकाने जैसी हरकतें भी करता है।

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