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संघर्ष अविराम

पाकिस्तान ने एक बार फिर संघर्ष विराम समझौते को पलीता लगाया है। यह समझौता नवंबर 2003 में वाजपेयी सरकार के समय हुआ था। जाहिर है, यह पाकिस्तान की..

Author नई दिल्ली | October 27, 2015 5:59 PM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतिकात्मक तौर पर किया गया है।

पाकिस्तान ने एक बार फिर संघर्ष विराम समझौते को पलीता लगाया है। यह समझौता नवंबर 2003 में वाजपेयी सरकार के समय हुआ था। जाहिर है, यह पाकिस्तान की रजामंदी के बगैर नहीं हो सकता था। इसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिले। समझौते से पहले के दशक की तुलना में समझौते के बाद के कोई आठ-नौ साल तक सरहद पर टकराव और हिंसा की बहुत कम घटनाएं हुर्इं। लेकिन 2013 से इसका उलटा सिलसिला चल रहा है। इसलिए यह सवाल एक बार फिर उठा है कि संघर्ष विराम समझौते को लेकर पाकिस्तान कितना संजीदा है।

पिछले चार दिनों से पाकिस्तान की तरफ से नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रह-रह कर गोलीबारी होती रही है। सोमवार को इसका दायरा और बढ़ गया। एक भारतीय नागरिक की जान जा चुकी है। जम्मू के कठुआ जिले में छह लोग रात भर हुई गोलीबारी में जख्मी हो गए। इस तरह शुक्रवार से अब तक कोई दर्जन भर लोग घायल हो चुके हैं। इस बार संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाएं थोड़े अंतराल के बाद हुई हैं।

नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ की रूस के उफा शहर में हुई मुलाकात में जो सहमति बनी थी उसके मुताबिक दोनों तरफ के सीमारक्षक बलों के आला अफसरों की बैठक पिछले महीने हुई थी। इसमें बीएसएफ की नुमाइंदगी इसके महानिदेशक देवेंद्र कुमार ने की और पाक रेंजर्स की मेजर जनरल उमर फारूक ने। दोनों पक्षों ने सरहद पर शांति बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई और यह भी कहा कि अगर संघर्ष विराम उल्लंघन का वाकया होगा, तो उसकी साझा जांच की जाएगी। लेकिन महीने भर बाद ही उस फ्लैग मीटिंग की उपलब्धि पर पानी फिर गया लगता है।

वर्ष 2013 में पाकिस्तान की तरफ से नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संघर्ष विराम उल्लंघन की दो सौ तीन घटनाएं हुई थीं, पिछले साल एक सौ नब्बे और इस साल अठारह सितंबर तक यानी फ्लैग मीटिंग से पहले तक दो सौ उनतीस। संघर्ष विराम समझौता लागू होने के बाद के बारह वर्षों में यह अपूर्व स्थिति है। रक्षामंत्री मनोहर पर्रीकर ने कहा है कि पाकिस्तान की हरकत ध्यान खींचने के लिए है। इस अनुमान को खारिज नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि पिछले साल अक्तूबर में, तब रक्षामंत्री का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे अरुण जेटली ने पाकिस्तान को चेताते हुए कहा था कि सरहद पर टकराव के हालात पैदा करना उसे महंगा पड़ेगा। इसके जवाब में पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने लगभग धमकी भरे अंदाज में कहा था कि उनका देश परमाणु हथियार से लैस है, और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिख कर दखल देने की मांग की थी। यह अलग बात है कि संयुक्त राष्ट्र ने इस पर कान नहीं दिया।

लगता है पाकिस्तान की रणनीति यह होगी कि एटमी हथियारों से लैस दो पड़ोसी देशों के बीच बेहद तनाव और टकराव की सूरत देख अमेरिका समेत बड़ी ताकतें बीच-बचाव में पड़ेंगी और इस तरह कश्मीर मसले को अंतरराष्ट्रीय बहस और हस्तक्षेप का मसला बनाने का उसका मंसूबा पूरा हो सकता है। अभी नवाज शरीफ अमेरिका गए थे। पर उनके अनुरोध के बावजूद भारत-पाकिस्तान के द्विपक्षीय विवाद में पड़ने से ओबामा ने एक बार फिर मना कर दिया। तो क्या संघर्ष विराम उल्लंघन के ताजा दौर के पीछे अमेरिका में मिली निराशा भी एक वजह हो सकती है?

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