उत्तर प्रदेश सरकार यह दावा करती आई है कि राज्य में कानून व्यवस्था बेहतर है, लेकिन हत्या की वारदात का सिलसिला थम नहीं रहा है। खासकर महिलाओं के खिलाफ अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं।

चंदौली जिले में सोमवार को एक निजी अस्पताल में भर्ती महिला की गोली मार कर हत्या कर देने की घटना ने आम नागरिकों की सुरक्षा पर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पता चलता है कि राज्य में महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। अपराधी हथियार लेकर सड़कों पर बेखौफ घूम रहे हैं और कभी भी बड़ी वारदात को अंजाम दे देते हैं।

सवाल है कि अगर राज्य में कानून व्यवस्था के अनुपालन में वास्तव में सख्ती बरती जाती, तो क्या कोई अस्पताल में घुस कर महिला की हत्या कर सकता था? अपना इलाज करवाने के बहाने अस्पताल में घुसे हमलावर ने महिला पर गोली चलाने के बाद परिसर में हवा में भी गोलियां चलाईं और भागने की कोशिश की। हालांकि वहां मौजूद लोगों ने उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया।

उत्तर प्रदेश में हत्या की घटनाएं जिस तरह से बढ़ी हैं, उससे लगता है कि सड़क से लेकर घर और अस्पताल में भी लोग सुरक्षित नहीं हैं। पिछले दिनों संभल जिले में कुछ लोग एक युवक को घर से खींच कर ले गए थे और बाद में सड़क पर उसकी हत्या कर दी गई थी। राज्य में इस तरह की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं।

सवाल है कि सरकार के दावों के बरक्स आखिर अपराधियों के भीतर कानून का खौफ क्यों नही है? जाहिर है कि इसके पीछे पुलिस की निष्क्रियता और लापरवाही जिम्मेदार है।

पुलिस तंत्र में तालमेल और त्वरित कार्रवाई का अभाव साफ नजर आता है। पुलिस के अपराध नियंत्रण के ढांचे में खामियों का फायदा अपराधी उठा रहे हैं। इस बात पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत है कि सरकारी हो या निजी अस्पताल, वहां सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए जाने चाहिए।

अगर कोई अपराधी हथियार लेकर अस्पताल के अंदर दाखिल होता है, तो यह वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही को उजागर करता है। ऐसे में राज्य सरकार को अपराध पर नियंत्रण के लिए सही मायने में ठोस कदम उठाने होंगे।