इसमें कोई दोराय नहीं कि आधुनिक तकनीक की दुनिया में डिजिटल सेवाओं ने मनुष्य के जीवन को आसान बनाया है और आज कई तरह की सुविधाएं आम लोगों की पहुंच में हैं। उम्मीद यह भी की गई थी कि जैसे-जैसे सामान्य कामकाज में डिजिटल संसार का दखल बढ़ेगा, वैसे-वैसे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और भ्रष्टाचार पर काबू पाना आसान होगा। काफी हद तक ऐसा हुआ भी है।
मगर इसके समांतर इसी डिजिटल तंत्र के दायरे में अपराध के नए स्वरूप विकसित हुए और आज यह भारत सहित दुनिया भर में एक नई चुनौती बनते जा रहे हैं।
पंजाब के लुधियाना में पुलिस ने शुक्रवार को अब तक के सबसे बड़े साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश करने का दावा किया, जिसमें काल सेंटर के नाम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा था। फर्जी कंपनी चलाने वाले और ठगी में शामिल एक सौ बत्तीस लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
खबरों के मुताबिक, इस गिरोह में शामिल लोग दूर बैठे कंप्यूटर तक पहुंच हासिल करते थे या फर्जी वायरस और सुरक्षा चेतावनी के जरिए विदेशी नागरिकों को निशाना बनाते थे। लोगों को ई-मेल और बैंक खाते में सेंध लगने का डर दिखा कर उनसे भारी राशि की ठगी की जाती थी।
जाहिर है, डिजिटल दुनिया में जिन आधुनिक तकनीकों को लोगों के जीवन को आसान बनाने और उनकी आर्थिक गतिविधियों को सुरक्षित बनाने के लिए ज्यादा बेहतर बताया जाता है, उसी में अब अपराध का ऐसा संजाल खड़ा हो चुका है, जिसमें हर रोज बड़ी संख्या में लोग ठगी के शिकार हो रहे हैं और अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं।
पिछले कुछ समय से खासतौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों में खासी बढ़ोतरी हुई है, जिसमें दूर बैठे अपराधी सिर्फ स्मार्टफोन पर वीडियो काल के जरिए किसी व्यक्ति को एक तरह से बंधक बना लेते हैं और डरा-धमका कर भारी रकम वसूल लेते हैं।
हैरानी की बात यह है कि डिजिटल संसार की अवांछित गतिविधियों पर बारीक निगरानी रखने का दावा करने वाली पुलिस कई बार समय पर अपराधियों को नहीं पकड़ पाती। सच यह है कि इस क्षेत्र में अपराध का दायरा जितना विस्तृत और जटिल होता जा रहा है, उसके मुकाबले सुरक्षा या बचाव के साथ-साथ अपराध पर काबू पाने के इंतजाम नाकाफी हैं।
