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संपादकीय: उम्मीदें और चुनौतियां

राज्यों में कांग्रेस की जीत और सरकारें बनने से देशभर में संदेश गया है कि कांग्रेस एक बार फिर ताकत के साथ केंद्र की सत्ता में वापसी कर सकती है। ऐसे में देखना यह है कि प्रियंका का सक्रिय राजनीति में उतरना कांग्रेस के लिए कितना कारगर साबित होता है!

Author Published on: January 24, 2019 5:50 AM
कांग्रेस ने प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी का महासचिव बनाया है और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया है। (एक्सप्रेस फोटो)

आम चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने अपना शायद आखिरी और सबसे बड़ा पत्ता खोल दिया है। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी बहन प्रियंका गांधी को बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए कांग्रेस महासचिव बनाया है। फिलहाल प्रियंका पूर्वी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की जिम्मेदारी संभालेंगी। काफी समय से पार्टी में इस बात की जरूरत महसूस की जा रही थी कि कांग्रेस को फिर से मजबूत बनाने में प्रियंका बड़ी भूमिका निभा सकती हैं, इसलिए उन्हें सक्रिय राजनीति में आना चाहिए। हालांकि अभी तक वे सोनिया गांधी और राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र- रायबरेली और अमेठी तक सीमित थीं। कांग्रेस, खासतौर से गांधी परिवार के इन दोनों पुराने गढ़ों में राहुल और सोनिया गांधी का सारा काम एक तरह से प्रियंका ही देखती रही हैं। चुनावों से पहले प्रचार, रोड शो हों या फिर चुनाव बाद की जिम्मेदारियां, प्रियंका की सभी में महत्त्वपूर्ण भूमिका रहती आई है। पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच भी प्रियंका की स्वीकार्यता है और लंबे समय से पार्टीजन उनसे सक्रिय राजनीति में उतरने का आग्रह भी करते रहे थे। लेकिन अब अटकलों का दौर खत्म हो चुका है और प्रियंका सक्रिय राजनीति में आ चुकी हैं।

हालांकि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का अब नामोनिशान लगभग नहीं बचा है। पिछले तीन दशकों से भी ज्यादा समय से कांग्रेस प्रदेश की सत्ता से बाहर है। प्रदेश में पार्टी की हालत इतनी कमजोर है कि वह बरसों से निर्णायक स्थिति में तो दूर, अपना अस्तित्व बचाने के लिए भी जूझ रही है। एक समय था जब लंबे समय तक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का एकछत्र राज हुआ करता था। लेकिन सपा, बसपा और भाजपा प्रदेश में जिस मजबूती के साथ उभरती और सरकार बनाती रहीं, उससे कांग्रेस के आधार को भारी नुकसान पहुंचा और पार्टी एक तरह से प्रदेश से साफ-सी हो गई। राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अपनी सबसे खराब हालत में पहुंच गई थी। इसलिए माना जा रहा है कि अब प्रियंका गांधी का ही करिश्मा काम करेगा और प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी में वही जान फूंक सकती हैं। जनता में प्रियंका गांधी लोकप्रिय भी काफी हैं, लोग उनमें उनकी दादी इंदिरा गांधी की छवि देखते हैं। इसलिए उम्मीद बंधती है कि वे मतदाताओं को कांग्रेस के पक्ष में लाने और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश पैदा करने में कामयाब होंगी।

प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में उतरने के बाद निश्चित है कि कांग्रेस पार्टी और जनता को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं। ऐसे में प्रियंका के लिए जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना बड़ी चुनौती होगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। प्रयागराज, प्रतापगढ़, वाराणसी, मिर्जापुर सहित कई जिलों में एक वक्त में कांग्रेस का खासा दबदबा था। लेकिन आज कांग्रेस के लिए यहां कुछ नहीं बचा। इसके अलावा, हाल में सपा-बसपा ने जो महागठबंधन किया है, उसमें कांग्रेस को शामिल नहीं किया गया। ऐसे में प्रदेश में कांग्रेस को अपना जो भी दमखम दिखाना है, वह अकेले ही दिखाना है। हाल तक माना जा रहा था कि देश में कांग्रेस एक तरह से खत्म हो चुकी है, लेकिन पिछले महीने तीन राज्यों- राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत ने इस धारणा को बदल दिया। इन राज्यों में कांग्रेस की जीत और सरकारें बनने से देशभर में संदेश गया है कि कांग्रेस एक बार फिर ताकत के साथ केंद्र की सत्ता में वापसी कर सकती है। ऐसे में देखना यह है कि प्रियंका का सक्रिय राजनीति में उतरना कांग्रेस के लिए कितना कारगर साबित होता है!

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