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संपादकीय: संदेश और चुनौतियां

लखनऊ में कांग्रेस के पहले रोड शो से निश्चित तौर पर दूसरे दल सकते में होंगे। किसी भी दल को कांग्रेस के ऐसे आगाज की उम्मीद नहीं रही होगी। प्रियंका के काफिले ने पंद्रह किलोमीटर लंबा रास्ता तय किया और उनकी झलक पाने के लिए लोग सड़क के दोनों ओर खड़े रहे।

Author February 13, 2019 4:54 AM
लखनऊ रोड शो के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी। (फोटो सोर्स पीटीआई)

लखनऊ में सोमवार को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के रोड शो में जिस तरह से भीड़ उमड़ी, उससे पहला संदेश तो यही गया कि अब प्रियंका गांधी ही उत्तर प्रदेश कांग्रेस की नैया पार लगा सकती हैं। प्रदेश में और राष्ट्रीय स्तर पर लोगों को कांग्रेस में कोई उम्मीद दिखाई दे रही है तो वह प्रियंका से ही है। इस रोड शो से यह खुल कर सामने आ गया कि प्रियंका को सक्रिय राजनीति में उतारने का कांग्रेस अध्यक्ष का फैसला दूरगामी नतीजे वाला है। कांग्रेस के लिए इस वक्त सबसे बड़ा संकट यह है कि उत्तर प्रदेश में पिछले तीस साल से पार्टी जिस मरणासन्न हालत में पड़ी है, उसे फिर से कैसे खड़ा किया जाए। प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर पर कोई भी नेता अभी तक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को जीवनदान दिलाने में कामयाब नहीं हो सका है। सिर्फ अमेठी और रायबरेली ही कांग्रेस के बचे-खुचे गढ़ के तौर पर रह गए हैं। इसीलिए सारी उम्मीदें अब प्रियंका पर ही टिकी हैं। इस लिहाज से लखनऊ में प्रियंका के पहले रोड शो ने राजनीति का माहौल बदलने का संकेत भी दे दिया है।

लखनऊ में कांग्रेस के पहले रोड शो से निश्चित तौर पर दूसरे दल सकते में होंगे। किसी भी दल को कांग्रेस के ऐसे आगाज की उम्मीद नहीं रही होगी। प्रियंका के काफिले ने पंद्रह किलोमीटर लंबा रास्ता तय किया और उनकी झलक पाने के लिए लोग सड़क के दोनों ओर खड़े रहे। इससे पता चलता है कि प्रदेश में प्रियंका के चुनावी कमान संभालने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं और लोगों में कैसा गजब का उत्साह बना है। लोग प्रियंका को दूसरी इंदिरा गांधी मानते हुए कांग्रेस की भावी नेता के रूप में देख रहे हैं। प्रियंका ने रोड शो के दौरान कहीं कोई भाषण नहीं दिया, लेकिन लोगों को यह अहसास कराने में वे कामयाब रहीं कि आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव जरूर लाएंगी। यही जनता की भी उनसे अपेक्षा है जिस पर उन्हें खरा साबित होकर दिखाना है। इस रोड शो के बाद प्रियंका ने सोशल मीडिया पर भी धमाके के साथ प्रवेश किया। ट्विटर पर उनके फॉलोअरों की संख्या डेढ़ लाख से ऊपर निकल गई है। जाहिर है, सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक पर प्रियंका की आंधी है।

लेकिन अब उन्हें जिन हालात से निपटना है वे कोई मामूली नहीं हैं। प्रियंका को पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई है जहां कांग्रेस की हालत सबसे ज्यादा खराब है। इलाहाबाद, प्रतापगढ़, वाराणसी, मिर्जापुर सहित कई जिलों में एक वक्त में कांग्रेस का खासा दबदबा होता था। लेकिन आज कांग्रेस के पास यहां कुछ नहीं बचा है। हाल में सपा-बसपा ने जो महागठबंधन किया, उसमें कांग्रेस को शामिल नहीं किया गया। ऐसे में प्रदेश में कांग्रेस को अपना जो भी दमखम दिखाना है, वह अकेले ही दिखाना है। हालांकि कांग्रेस ने भी उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने का एलान किया है। कांग्रेस के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश में संगठन के कायाकल्प की है। स्थानीय स्तर से लेकर युवक कांग्रेस, एनएसयूआई, किसान प्रकोष्ठ, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ जैसी इकाइयों में जान फूंकनी होगी। एक वक्त में दलित और अल्पसंख्यक कांग्रेस का बड़ा वोट बैंक हुआ करते थे। लेकिन बाद में अल्पसंख्यक समाजवादी पार्टी और दलित बहुजन समाज पार्टी की ओर चले गए। ब्राह्मणों का बड़ा हिस्सा भाजपा के पास आ गया। प्रियंका के लिए सबसे कठिन काम अपने वोट बैंक को फिर से खड़ा करना है। कांग्रेस के लिए यह डगर आसान नहीं है, फिर भी प्रियंका उम्मीद की किरण तो हैं ही।

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