आखिरकार चीन ने दुनिया के सामने यह सच कबूल लिया है कि पिछले वर्ष भारत के ‘आपरेशन सिंदूर’ के दौरान उसने पाकिस्तान की सहायता की थी। यह पहली बार है, जब चीन ने इस संघर्ष में अपनी प्रत्यक्ष भूमिका स्वीकार की है। हालांकि भारत ने संघर्ष विराम के बाद विश्वास के साथ यह दावा किया था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस तरह के खुलासे हुए थे, लेकिन चीन ने अब तक इन्हें खारिज कर दिया था।

दरअसल, चीन वैश्विक जगत को यह दिखाने की कोशिश कर रहा था कि भारत-पाक संघर्ष के दौरान उसकी भूमिका एक तटस्थ देश की रही है। मगर, चीन और पाकिस्तान की नजदीकियां किसी से छिपी नहीं हैं। अब चीन की इस स्वीकारोक्ति से यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में भारत को सुरक्षा के मोर्चे पर एक साथ कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है और इसी लिहाज से अपनी रक्षा नीतियां, कूटनीति और रणनीति तैयार करनी होंगी।

पिछले कुछ समय से ऊपरी तौर पर चीन का रुख भले ही भारत को लेकर आक्रामक न रहा हो, लेकिन वैश्विक स्तर पर उसकी छवि एक ऐसे देश की है, जिस पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था। इसके जवाब में भारत ने ‘आपरेशन सिंदूर’ चलाकर सीमा पार आतंकियों के कई ठिकानों पर हमला किया था। इस कार्रवाई में सौ से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने की खबर आई थी।

भारत के उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने पिछले साल जुलाई में यह दावा किया था कि चीन ने इस संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को तकनीकी मदद प्रदान की थी। भारत की सैन्य तैनाती की निगरानी के लिए उसने अपने उपग्रहों का भी इस्तेमाल किया था। तब चीन ने इस दावे को खारिज कर दिया था।

मगर बीते गुरुवार को चीन के विमानन उद्योग निगम के चेंगदू वायुयान डिजाइन एवं अनुसंधान संस्थान के एक वरिष्ठ इंजीनियर ने मीडिया से एक साक्षात्कार में माना कि आपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को प्रौद्योगिकी मदद प्रदान की गई थी।

दरअसल, पाकिस्तान की वायुसेना के पास चीन निर्मित जे-10सीई लड़ाकू विमानों का बेड़ा है, जिनका उत्पादन चीन के विमानन उद्योग निगम की एक सहायक कंपनी द्वारा किया जाता है। खबरों के मुताबिक, चीन ने भारत-पाक संघर्ष को अपने लड़ाकू विमानों की क्षमता को परखने की एक प्रयोगशाला की तरह लिया और पाकिस्तान को तकनीकी मदद मुहैया कराई।

साफ है कि चीन और पाकिस्तान का रक्षा सहयोग अब केवल हथियारों की आपूर्ति तक सीमित नहीं रह गया है। पाकिस्तान के जरिए चीन अपने आधुनिक हथियारों और निगरानी प्रणालियों का वास्तविक युद्ध स्थितियों में परीक्षण कर रहा है।

चीन की यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय में सामने आई है, जब वह पाकिस्तान को अपना जे-35 बमवर्षक विमान बेचने की योजना बना रहा है। ऐसे में चीन के इस कबूलनामे को अपने लड़ाकू विमानों को पूरी तरह सक्षम दिखाने और उन्हें सैन्य हथियारों के बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

बहरहाल, चीन की चालबाजी से यह साफ है कि भारत को भविष्य में संघर्ष की स्थिति में और अधिक सतर्क रहना होगा। साथ ही भारत को चीन के नापाक इरादों को कूटनीति के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाना चाहिए।