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संपादकीय: महाकाय बजट

नई योजनाओं में सबसे अधिक गोवंश संरक्षण से जुड़ी योजनाओं पर जोर है। उसमें निराश्रित पशुओं के लिए आश्रय स्थल बनाने, उनकी देखरेख आदि के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के अनुसार अलग-अलग राशि तय की गई है।

Author Published on: February 9, 2019 5:26 AM
यूपी विधानसभा में पेश हुआ बजट फोटो सोर्स- ट्विटर/ANI

उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक के इतिहास में अपना सबसे बड़ा बजट पेश किया है। इस बजट का आकार चार लाख उन्यासी हजार करोड़ रुपए है। यानी पिछले बजट से करीब बारह फीसद अधिक। इसमें बाईस हजार करोड़ रुपए की नई योजनाएं शामिल की गई हैं। बजट बड़ा हो, तो विकास की उम्मीदें भी बड़ी होती हैं। पर इस बजट में जिन क्षेत्रों के विकास और उनमें पैसे खर्च करने के प्रावधान को बढ़-चढ़ कर प्रदर्शित किया गया है, उससे तरक्की की आंशिक रूपरेखा ही सामने आ पाती है। इसमें धर्म और संस्कृति के विकास पर अधिक जोर है। तीर्थ स्थलों को विकसित करने के लिए दो सौ सात करोड़ रुपए का प्रावधान है। अयोध्या में हवाई अड्डा बनाने के लिए दो सौ करोड़ रुपए खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन, वाराणसी, श्रावस्ती, कुशीनगर आदि धार्मिक और पर्यटन स्थलों के विकास के लिए अलग-अलग भारी-भरकम मद निर्धारित किए गए हैं। योगी सरकार का धर्म के प्रति झुकाव छिपी बात नहीं है, इसलिए धार्मिक स्थलों के विकास और वहां सुविधाएं मुहैया कराने पर उसका जोर स्वाभाविक है।

नई योजनाओं में सबसे अधिक गोवंश संरक्षण से जुड़ी योजनाओं पर जोर है। उसमें निराश्रित पशुओं के लिए आश्रय स्थल बनाने, उनकी देखरेख आदि के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के अनुसार अलग-अलग राशि तय की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में गोवंशीय पशुओं के रखरखाव और गोशाला निर्माण के लिए दो सौ सैंतालीस करोड़ साठ लाख रुपए का आबंटन किया गया है। इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में कान्हा गोशाला एवं बेसहारा पशु आश्रय योजना के लिए दो सौ करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं। इसके साथ ही पंडित दीनदयाल लघु डेयरी योजना के संचालन के लिए चौंसठ करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है, जिसके तहत दस हजार इकाइयों की स्थापना प्रस्तावित है। पिछले करीब दो सालों में, जब से गोमांस और गोवंश की बिक्री पर प्रतिबंध लगा है, किसानों और पशुपालकों ने गायों के बछड़ों को बेचने के बजाय खुला छोड़ना शुरू कर दिया है। इससे मवेशियों ने फसलों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। इसे लेकर किसानों में खासी नाराजगी है। ऐसे में योगी सरकार के लिए इस समस्या से पार पाना जरूरी था। ये योजनाएं उसी को ध्यान में रख कर तैयार की गई हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि इससे किसानों को राहत मिलेगी और बेसहारा पशुओं को आश्रय मिल सकेगा।

योगी सरकार के बजट में आवास योजना, राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना और पेयजल योजना पर भी जोर दिया गया है। इसमें प्रधानमंत्री आवास निर्माण योजना के लिए छह हजार दो सौ चालीस करोड़ रुपए, राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के लिए तीन हजार चार सौ अट्ठासी करोड़ रुपए और बुंदेलखंड के गांवों में पेयजल पाइपलाइन पर खर्च के लिए तीन हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसी तरह एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए तीन हजार एक सौ चौरानबे करोड़ रुपए का प्रावधान है। इससे निस्संदेह निम्न आयवर्ग और पिछड़े इलाकों के लोगों की स्थिति में कुछ सुधार की उम्मीद बनती है। पर राज्य में स्वास्थ्य और शिक्षा की दशा भी दयनीय है। इसलिए इन क्षेत्रों में भी संतोषजनक बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही थी। रोजगार के नए अवसर पैदा करने वाली योजनाओं और परियोजनाओं का खाका तैयार करना भी जरूरी था। फिर उत्तर प्रदेश सरकार इतने बड़े बजट के लिए धन का प्रबंध कैसे करेगी, देखने की बात होगी।

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