ताज़ा खबर
 

संपादकीय: मलेरिया की मार

भारत आखिर मलेरिया से मुक्ति कैसे पाएगा? डब्ल्यूएचओ ने दुनिया से मलेरिया का खात्मा करने के लिए 2030 तक की समय-सीमा रखी है। भारत को भी अगले बारह साल में इस लक्ष्य को हासिल करना है। आम आदमी को जीने के लिए स्वस्थ वातावरण मुहैया कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

Author Published on: April 26, 2018 4:53 AM
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

मलेरिया आज भी भारत के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। कहने को इससे निपटने के लिए तमाम सरकारी कार्यक्रम और अभियान चलते रहे, पर सब बेनतीजा साबित हुए। यह गंभीर चिंता का विषय है। राजधानी दिल्ली में साल में आठ महीने मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों के मामले बड़ी संख्या में सामने आते हैं। दूसरे राज्यों में भी हर साल ये बीमारियां फैलती हैं। मच्छरों से होने वाली इन बीमारियों की रोकथाम में सरकारें नाकाम रही हैं। मलेरिया को लेकर भारत की स्थिति आज भी गंभीर है। भारत आज भी दुनिया के उन पंद्रह देशों में शुमार है, जहां मलेरिया के सबसे ज्यादा मामले आते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की 2017 की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में भारत चौथा देश है, जहां मलेरिया से सबसे ज्यादा लोग मरते हैं। दुनिया में हर साल मलेरिया से होने वाली कुल मौतों में सात फीसद अकेले भारत में होती हैं। नाइजीरिया पहले स्थान पर है, जहां मलेरिया सबसे बड़ी जानलेवा बीमारी बना हुआ है। ज्यादातर विकासशील देशों, जिनमें अफ्रीकी देशों की संख्या ज्यादा है, में मलेरिया से होने वाली मौतों का आंकड़ा आज भी चौंकाने वाला है।

सवाल है कि भारत मच्छर जनित बीमारियों, खासकर मलेरिया से निपट क्यों नहीं पा रहा? मलेरिया के खात्मे के लिए बने कार्यक्रम और अभियान आखिर क्यों ध्वस्त हो रहे हैं? ऐसी नाकामियां हमारे स्वास्थ्य क्षेत्र की खामियों की ओर इशारा करती हैं। ये नीतिगत भी हैं और सरकारी स्तर पर नीतियों के अमल को लेकर भी। मलेरिया उन्मूलन के लिए जो राष्ट्रीय कार्यक्रम बना, वह क्यों नहीं सिरे नहीं चढ़ पाया? जाहिर है, इन पर अमल के लिए सरकारों को जो गंभीरता दिखानी चाहिए थी, उसमें कहीं न कहीं कमी अवश्य रही। इन सबसे लगता है कि मलेरिया के खात्मे की मूल दिशा ही प्रश्नांकित रही है। सरकार का मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम कामयाब नहीं हो पाया था, जो 2013 में बंद कर दिया गया।

भारत आखिर मलेरिया से मुक्ति कैसे पाएगा? डब्ल्यूएचओ ने दुनिया से मलेरिया का खात्मा करने के लिए 2030 तक की समय-सीमा रखी है। भारत को भी अगले बारह साल में इस लक्ष्य को हासिल करना है। आम आदमी को जीने के लिए स्वस्थ वातावरण मुहैया कराना सरकार की जिम्मेदारी है। मच्छरों के पनपने के लिए नमी और गंदगी सबसे अनुकूल होते हैं। मलेरिया से निपटने में स्वच्छता का अभाव एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आया है। स्वच्छता के मामले में भी भारत की स्थिति दयनीय है। साफ-सफाई को लेकर लोगों में जागरूकता की बेहद कमी है। दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन और सरकारों की लापरवाही भी इसके लिए जिम्मेदार है। भारत में आज भी कूड़ा प्रबंधन की ठोस योजना नहीं है।

शहरों में गंदगी मच्छर होने का बड़ा कारण है। दरअसल, हमारे पास निगरानी और नियंत्रण के उपाय सुझाने वाला तंत्र नहीं है। मलेरिया को कैसे भगाएं, यह हमें श्रीलंका और मालदीव जैसे छोटे देशों से सीखना चाहिए। श्रीलंका ने जिस तरह मलेरिया का खात्मा किया, वह पूरी दुनिया के लिए मिसाल है। श्रीलंका ने मलेरिया खत्म करने के लिए देश के कोने-कोने तक जागरूकता अभियान चलाया, मोबाइल मलेरिया क्लीनिक शुरू किए गए और इन चल-चिकित्सालयों की मदद से मलेरिया को बढ़ने से रोका गया। भारत में पल्स पोलियो जैसा अभियान पूरी तरह सफल रहा, तो फिर मलेरिया के खिलाफ हम जंग क्यों नहीं जीत सकते?

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 संपादकीय: आतंक के सामने
2 संपादकीय: अफस्पा से राहत
3 संपादकीय: साख बनाम संदेह
जस्‍ट नाउ
X