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विवाद की बुनियाद

केरल भवन में गोमांस परोसे जाने की शिकायत मिलने पर जिस तरह तत्काल दिल्ली पुलिस ने छापा मारा, उसे लेकर स्वाभाविक ही विवाद छिड़ गया है..

Author नई दिल्ली | October 28, 2015 10:41 PM
दिल्ली के केरल भवन में ‘गोमांस’ पर विवाद छिड़ा। (पीटीआई फोटो)

केरल भवन में गोमांस परोसे जाने की शिकायत मिलने पर जिस तरह तत्काल दिल्ली पुलिस ने छापा मारा, उसे लेकर स्वाभाविक ही विवाद छिड़ गया है। केरल के मुख्यमंत्री ने इस कार्रवाई को संघीय ढांचे पर कुठाराघात करार दिया है, तो दिल्ली पुलिस यह सफाई देने में जुटी है कि उसने छापा नहीं मारा, बल्कि किसी आंदोलन के भड़क उठने की आशंका के मद्देनजर सुरक्षा-व्यवस्था चौकस करने की कोशिश की थी। कायदे से किसी भी राज्य के भवन में पुलिस बिना इजाजत प्रवेश नहीं कर सकती।

पर हैरानी की बात है कि दिल्ली पुलिस ने इस नियम को ताक पर रख कर खुद मामले की छानबीन करना उचित क्यों समझा। ऐसी भी क्या हड़बड़ी थी कि केरल भवन में प्रवेश की अनुमति लेना उसने जरूरी नहीं समझा। हालांकि गोमांस की बिक्री और उसे परोसे जाने पर पूरे देश में किसी न किसी प्रकार से कानूनी प्रतिबंध है। दिल्ली में भी यह नियम लागू है। इस पर बहस हो सकती है कि अंगरेजी में बीफ शब्द का अर्थ केवल गाय का मांस होता है या इसके दायरे में भैंस या कृषि कार्य से जुड़े दूसरे पालतू पशुओं का मांस भी आता है। पर इस पर भी गंभीरता से सोचने की जरूरत है कि इन दिनों जिस तरह गोमांस की बिक्री और उसे खाने को लेकर देश भर में विवाद छिड़ा हुआ है, उसकी क्या तुक है। क्या इस तरह किसी के खानपान की आदतों को बदलने का प्रयास उचित कहा जा सकता है!

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केरल भवन की घटना के बाद विश्व हिंदू परिषद और दूसरे हिंदुत्ववादी संगठन यह साबित करने पर तुले हैं कि वहां गोमांस परोसा जा रहा था और इस तथ्य को छिपाने की कोशिश की जा रही है। वे संबंधित कर्मचारियों, अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मगर इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि बहुत सारे लोग सदियों से गोमांस खाते आ रहे हैं। कानूनी दायरे में ही उन्हें इसकी आपूर्ति की जाती रही है। कोई संगठन अपने वैचारिक आग्रहों के चलते जबरन किसी की खानपान संबंधी आदतों को बदलने का प्रयास नहीं कर सकता। मगर कुछ हिंदुत्ववादी संगठन इस तकाजे को समझना नहीं चाहते।

जबसे केंद्र में भाजपा की सरकार बनी है, ये संगठन कुछ अधिक सक्रिय हो गए हैं। उनकी उग्रता का ही नतीजा है कि पुलिस उनकी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई को तत्पर हो उठती है। केरल भवन में भी यही हुआ। केरल के मुख्यमंत्री ने इस कार्रवाई की शिकायत प्रधानमंत्री से भी की है। तमाम विपक्षी दल इस घटना के बाद विरोध पर उतर आए हैं। पहले ही सरकार को गोमांस के मुद्दे पर हिंदुत्ववादी संगठनों की उग्र कार्रवाइयों को लेकर काफी किरकिरी झेलनी पड़ रही है। केरल भवन की घटना ने उसके लिए और परेशानी खड़ी कर दी है। उसे इस मामले में तर्कसंगत रास्ता निकालने की जरूरत है। दिल्ली पुलिस को संयम, व्यावहारिक और लोकतांत्रिक तरीके से काम करने का पाठ पढ़ाना भी जरूरी है। अब शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर भले वह अपने को निष्पक्ष साबित करने की कोशिश कर रही है, पर पिछले कुछ समय से जिस तरह वह केंद्र के मनमाफिक चलने की कोशिश करती देखी जा रही है, उसे अपने इस रवैए को बदलना होगा।

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