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हज में हादसा

एक बार फिर हज यात्रा के दौरान हादसा हुआ है, वह भी छोटा-मोटा नहीं। ताजा हादसे की भयावहता इसी से जाहिर है कि इसमें सात सौ सत्रह लोग मारे गए और आठ सौ से..

Author September 26, 2015 11:29 AM
सऊदी अरब में पिछले साल (2015) भगदड़ में 2,000 से ज्यादा हाजियों की मौत हो गई थी। (एपी फोटो)

एक बार फिर हज यात्रा के दौरान हादसा हुआ है, वह भी छोटा-मोटा नहीं। ताजा हादसे की भयावहता इसी से जाहिर है कि इसमें सात सौ सत्रह लोग मारे गए और आठ सौ से ज्यादा घायल हो गए। हज के लिए हर साल दुनिया के कोने-कोने से मुसलिम श्रद्धालु आते हैं। जान गंवाने वालों और घायलों में भी अनेक देशों के लोग शामिल हैं। बकरीद की खुशी गम में बदल गई। स्वाभाविक ही राष्ट्राध्यक्षों समेत तमाम देशों के लोगों ने इस घटना पर शोक जताया है। पर इसी के साथ हज के आयोजन के इंतजामात को लेकर कुछ सवाल भी उठे हैं।

सही है कि हज के दौरान इस्लामी धर्मावलंबियों के सबसे बड़े तीर्थस्थान मक्का में लाखों की भीड़ जुटती है। और भीड़ कई बार उतावली या बेकाबू हो जाती है। मगर यही कह कर सऊदी प्रशासन को बरी नहीं किया जा सकता। हज यात्रियों की भीड़ आकस्मिक नहीं होती, न उनकी तादाद अप्रत्याशित कही जा सकती है। इसलिए जो कुछ हुआ, उसकी जवाबदेही से सऊदी अरब की सरकार पल्ला नहीं झाड़ सकती। पहले भी हज में हादसे हुए हैं। पर पिछले ढाई दशक में यह सबसे बड़ा हादसा है। इससे बड़ा हादसा 1990 में हुआ था, जब मक्का से मीना की तरफ जाने वाली सुरंग में भगदड़ से करीब चौदह सौ लोग मारे गए थे। लेकिन इस बार का एक शोचनीय पहलू यह भी है कि महज चंद दिनों के अंतराल पर दो हादसे हुए। ग्यारह सितंबर को भारी क्रेन गिरने से सौ से ज्यादा लोग मारे गए थे। आखिर जिधर निर्माण-कार्य चल रहा हो और बड़े-बड़े क्रेन लगे हों, उधर से लोगों को गुजरने क्यों दिया गया, या उन्हें सख्ती से रोकने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई थी?

हाजियों पर क्रेन गिरने से प्रबंध और सुरक्षा को लेकर सऊदी सरकार की गंभीरता पहले ही सवालों के घेरे में थी। और अब तो सऊदी सरकार को दुनिया के सामने जवाब देते नहीं बन रहा है। ईरान ने अपने नब्बे हजयात्रियों की मौत के लिए सऊदी सरकार को सीधे जिम्मेवार ठहराया है। अन्य देशों की प्रतिक्रिया भले इतनी तीखी न हो, पर सऊदी प्रशासन का गोलमोल जवाब उनके भी गले नहीं उतर रहा है। सऊदी अरब के आंतरिक सुरक्षा मंत्री ने कहा है कि अत्यधिक गरमी और तीर्थयात्रियों की थकान भी हादसे की एक वजह हो सकती है। पर यह तो एक ऐसी स्थिति है जो हर बार रहती है। फिर, इतने बड़े हादसे को उसका कारण क्यों बताया जा रहा है?

सऊदी शासक ने जांच के लिए एक समिति के गठन का आदेश दिया है। पहले के हादसों की भी जांच के आदेश दिए गए थे। उनका क्या नतीजा निकला और क्या सबक लिए गए? असल बात यह है कि भीड़ प्रबंधन का सबक सऊदी प्रशासन ने ठीक से अब भी नहीं सीखा है। यों हज के मौके पर आग लगने या दूसरी वजहों से भी हादसे हो चुके हैं, पर सबसे ज्यादा लोग भगदड़ के कारण मारे गए हैं। पिछले ढाई दशक में हज के दौरान चार हजार से अधिक मौतें हो चुकी हैं, और इनमें से ज्यादातर भगदड़ की वजह से हुर्इं। यह सिलसिला तभी थम सकता है जब भीड़ के प्रबंधन और नियंत्रण के कारगर उपाय किए जाएं।

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