ताज़ा खबर
 

संपादकीय: आतंक का सामना

बुधवार को एक बड़ी कामयाबी तब मिली जब दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने हिज्बुल मुजाहिदीन के शीर्ष कमांडर अल्ताफ अहमद डार उर्फ अल्ताफ काचरू सहित दो आतंकवादियों को मार गिराया।

Author August 30, 2018 2:40 AM
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर (फोटो सोर्स- एपी)

पिछले कुछ समय से जम्मू-कश्मीर में आतंकी संगठनों के खिलाफ जारी अभियान में सुरक्षा बलों को जैसी कामयाबी मिल रही है, वह निश्चित रूप से राहत की बात है। इसके बावजूद यह सच है कि आज भी आतंकवादियों की चुनौती कम नहीं हुई है। उन्हें कमजोर आंकना इसलिए भूल होगी कि थोड़ी-सी ढिलाई बरतने पर भी वे मौके का फायदा उठाने और आतंकी गतिविधि को अंजाम देने से नहीं हिचकते हैं। हालांकि देश के सुरक्षा बलों की चौकसी ने हाल के दिनों में आतंकियों की राह मुश्किल की है। बुधवार को एक बड़ी कामयाबी तब मिली जब दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने हिज्बुल मुजाहिदीन के शीर्ष कमांडर अल्ताफ अहमद डार उर्फ अल्ताफ काचरू सहित दो आतंकवादियों को मार गिराया। काचरू कश्मीर घाटी में हिज्बुल मुजाहिदीन के सबसे पुराने आतंकवादियों में से एक था और सुरक्षा बलों के अलावा असैन्य नागरिकों और पुलिसकर्मियों पर हमलों में शामिल रहा था। खासतौर पर हिज्बुल के एक आतंकवादी बुरहानी बानी के मारे जाने के बाद घाटी में हिंसा भड़काने वालों में काचरू और उसके सहयोगी यासीन मुख्य भूमिका में थे। उसके इस आपराधिक इतिहास की वजह से वह लंबे समय से सुरक्षा बलों के निशाने पर था। मगर उसने घाटी में अपनी ऐसी पैठ बनाई हुई थी कि उसे घेरे में लेना मुश्किल हो रहा था।

हालांकि पिछले कुछ समय से सुरक्षा बलों और पुलिस के अलावा स्थानीय लोगों के बीच बने तालमेल की वजह से आतंकियों के बारे में खुफिया सूचनाएं निकालना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना पहले के मुकाबले थोड़ा आसान हुआ है। काचरू के बारे में भी इसी तरह मिली सूचना के आधार पर तड़के घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाया गया। दरअसल, हाल के दिनों में आतंकवादियों को मार गिराने या उन्हें गिरफ्तार करने में सुरक्षा बलों को मिली बड़ी सफलताओं के बाद थोड़े अंतराल पर फिर ऐसी ही घटना सामने आती है। ऐसा लगता है कि परदे के पीछे से आतंकी संगठनों को संगठित रूप से मदद पहुंचाई जा रही है। जाहिर है, ऐसे में देश के सुरक्षा बलों की चुनौती बढ़ जाती है। मगर जब से सुरक्षा बलों ने आतंकियों के खिलाफ ‘आॅपरेशन आॅलआउट’ की शुरुआत की है, तब से कई बड़े आतंकियों को मार गिराने, बहुत सारे आतंकवादियों की गिरफ्तारी में कामयाबी मिली है। इसके अलावा, आतंकी संगठनों के असर में गए युवाओं की मुख्यधारा में वापसी की भी कोशिशें जारी हैं।

यह किसी से छिपा नहीं है कि घाटी में असर रखने वाले ज्यादातर आतंकी या उनके संगठन पाकिस्तान स्थित अपने ठिकाने से गतिविधियां संचालित करते हैं। भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय मंचों से यह मामला अक्सर उठाया जाता है। लेकिन पाकिस्तान हर बार आरोपों से इनकार करते हुए सवालों को भारत की ओर मोड़ने की कोशिश करता है। जबकि समय-समय पर इस तरह के तथ्य सामने आते रहे हैं कि भारत में मौजूद आतंकी संगठनों के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। कुछ समय पहले चीन में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को शरण देने के लिए पाकिस्तान पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने खुद स्वीकार किया था कि कुछ आतंकी संगठन पाकिस्तान के ठिकानों से अपनी गतिविधियां चलाते हैं। लेकिन इन हकीकतों के बरक्स पाकिस्तान इस दिशा कोई ठोस कदम उठाने की जरूरत महसूस नहीं करता। हालांकि आतंकवाद की समस्या की अनदेखी करने का खमियाजा उसे भी बुरी तरह उठाना पड़ा है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App