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संपादकीयः सहयोग के बजाय

इस वक्त संक्रमण को फैलने से रोकना बड़ी चुनौती है। उसमें तेजी से जांच और उपचार उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसके लिए आवश्यक चिकित्सा दल तैनात करना और प्रचुर मात्रा में जांच केंद्र स्थापित करना सरकारों के लिए मशक्कत भरा काम है।

इस वक्त संक्रमण को फैलने से रोकना बड़ी चुनौती है। उसमें तेजी से जांच और उपचार उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।

इस वक्त जब सारा देश कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए अपने-अपने स्तर पर प्रयास करता देखा जा रहा है, कुछ लोगों का असहयोगात्मक और मनमानीभरा रवैया क्षुब्ध करने वाला है। कुछ जगहों पर देखा गया कि लोग इस संकट से पार पाने के प्रयास में जुटे चिकित्सकों और चिकित्साकर्मियों के साथ बदसलूकी की। सबसे स्तब्ध करने वाला व्यवहार तबलीगी जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए लोगों का रहा। उनमें से एक सौ सड़सठ लोगों को रेलवे के एक पृथकता केंद्र में रखा गया था। जमात में आए बहुत सारे लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं, इसलिए उसमें शामिल हुए सभी लोगों की जांच की जा रही है। उन्हें अलग-थलग रखा गया है। मगर दिल्ली में रेलवे के पृथकता केंद्र में रखे गए लोगों ने न सिर्फ सहयोग करने से इनकार कर दिया, बल्कि वहां तैनात चिकित्सा कर्मियों के साथ बदसलूकी भी की। उनके चिकित्सा कर्मियों पर थूकने तक की शिकायतें मिली हैं। ये लोग मनमानी करते हुए जहां-तहां घूमने लगे। इस पर प्रशासन को उन्हें दो टुकड़ियों में बांट कर अन्य केंद्रों में स्थांतरित करना पड़ा। इसी तरह बिहार के मधुबनी जिले से खबर मिली कि वहां कुछ लोग धार्मिक आयोजन कर रहे थे और जब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो उस पर पथराव शुरू कर दिया, जिसमें कुछ पुलिस कर्मियों के घायल होने की भी सूचना है। ऐसी घटनाएं हैरान करने वाली हैं।

इस वक्त संक्रमण को फैलने से रोकना बड़ी चुनौती है। उसमें तेजी से जांच और उपचार उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसके लिए आवश्यक चिकित्सा दल तैनात करना और प्रचुर मात्रा में जांच केंद्र स्थापित करना सरकारों के लिए मशक्कत भरा काम है। तमाम स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि इस महामारी से भयभीत होने की जरूरत नहीं है, वे हर हाल में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने को प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए अपनी सेहत की फिक्र न करते हुए और जोखिम भरे वातावरण में दिन-रात चिकित्सक जुटे हुए हैं। कई चिकित्सक खुद संक्रमित हो चुके हैं और उनके जरिए उनके परिजनों में भी विषाणु का प्रभाव पहुंच चुका है। इसलिए उनके योगदान की सराहना और उनके साथ यथासंभव सहयोग करने की अपेक्षा स्वाभाविक है। उनका मनोबल बढ़ाने के लिए सरकार और नागरिक जमात की तरफ से हर प्रोत्साहन देने की कोशिशें हो रही हैं। मगर कुछ लोग अगर उन्हें अपमानित करने, उनके साथ बदसलूकी करने का प्रयास करते देखे जा रहे हैं, तो उनकी निंदा होनी ही चाहिए।

चिकित्सकों के साथ सहयोग का रुख न होने और कुछ जगहों पर उनके साथ हुए दुर्व्यवहार को देखते हुए दिल्ली सरकार ने घोषणा कर दी थी कि जो लोग ऐसा करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लगता है, हमारे देश में कुछ लोगों को डंडे की भाषा की कुछ ऐसी आदत पड़ गई है कि उसके बिना उन्हें अपना नागरिक दायित्वबोध याद ही नहीं आता। चिकित्सकों और इस संकट से पार पाने में जुटे अन्य कर्मियों की सुरक्षा की चिंता और उनकी कर्तव्यपरायणता की सराहना न सिर्फ सरकारों की जिम्मेदारी है, बल्कि हर नागरिक को इसके लिए आगे आने की जरूरत है। यह कोरोना से लड़ाई का शुरुआती चरण है और इसमें कहीं-कहीं कुछ असुविधाएं नजर आ सकती हैं, पर उन पर किसी तरह का अभद्र व्यवहार करना इस वक्त नागरिक कर्तव्य नहीं माना जा सकता। सबके सहयोग से ही उन कमियों को भी दूर किया जा सकता है।

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