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प्रदूषण पर पहरा

दरअसल, दिल्ली में वायु प्रदूषण आज की समस्या नहीं है, मगर अब वहां की सड़कों पर वाहनों की भीड़ इतनी बढ़ गई है और कारोबारी गतिविधियों में इतनी तेजी आई है कि प्रदूषण की दर लगातार बढ़ती गई है। पहले दिल्ली में वाहनों को डीजल-पेट्रोल के बजाय सीएनजी चालित किया गया। अब बैट्री चालित वाहनों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, मगर दुपहिया वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोक पाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

पिछले कई सालों से दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण पर काबू पाने का प्रयास कर रही है, मगर इस दिशा में उसे अपेक्षित कामयाबी नहीं मिल पाई है। खासकर सर्दी के मौसम में जब हवा धरती की सतह के पास सिकुड़ आती है, तब दिल्ली में वायु प्रदूषण का प्रकोप जानलेवा साबित होता है। तय मानक से कई गुना अधिक प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर लोग अचानक अनेक बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। अब तक के अध्ययनों से साफ हो चुका है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं है।

इस पर काबू पाने के लिए सरकार अब तक कई उपाय आजमा चुकी है। उनमें सम-विषम योजना भी शामिल है। बाहरी प्रदेशों से आने वाले भारी वाहनों को दिल्ली से होकर गुजरने पर रोक है। अभी तक सिर्फ वही वाहन आते हैं, जिन्हें दिल्ली में माल गिराना या ले जाना है। मगर अब दिल्ली सरकार ने नया कदम उठाते हुए इस साल अक्तूबर से फरवरी यानी पांच महीनों तक दिल्ली में भारी और मध्यम माल वाहकों का प्रवेश निषिद्ध कर दिया है। केवल फल-सब्जी, दूध, अनाज जैसी आवश्यक सामग्री लाने-ले जाने वाले वाहनों को प्रवेश की छूट होगी।

दिल्ली सरकार के ताजा फैसले पर स्वाभाविक ही व्यापारी संघ ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि बाहरी राज्यों से दिल्ली में रोजाना भारी मशीनों, निर्माण सामग्री आदि आती हैं, जिन्हें हल्के वाहनों के जरिए लाना संभव नहीं है। इनकी ढुलाई में बड़े ट्रकों का ही इस्तेमाल होता है। अगर उन पर रोक लग जाएगी, तो सारा कारोबार ठप्प पड़ जाएगा। निर्माण कार्य पहले ही शिथिल पड़ा हुआ है, उसकी गति थम जाएगी। उनका विरोध वाजिब है। दरअसल, दिल्ली केवल एक शहर नहीं, इसका आकार एक राज्य के बराबर है।

यहां अनेक व्यापारिक केंद्र हैं। यहां न केवल बाहर से सामान आता, बल्कि बड़े पैमाने पर भेजा भी जाता है। रोजमर्रा इस्तेमाल की वस्तुओं की ढुलाई तो फिर भी हल्के वाहनों से कई बार में की जा सकती है, मगर भारी कल-पुर्जों, वाहनों आदि की ढुलाई कैसे संभव होगी। कोई भी सरकार प्रदूषण रोकने के नाम पर सारा कारोबार ठप्प कर दे, तो उसका प्रतिकूल असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

दरअसल, दिल्ली में वायु प्रदूषण आज की समस्या नहीं है, मगर अब वहां की सड़कों पर वाहनों की भीड़ इतनी बढ़ गई है और कारोबारी गतिविधियों में इतनी तेजी आई है कि प्रदूषण की दर लगातार बढ़ती गई है। पहले दिल्ली में वाहनों को डीजल-पेट्रोल के बजाय सीएनजी चालित किया गया। अब बैट्री चालित वाहनों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, मगर दुपहिया वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोक पाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

वायु प्रदूषण रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने कुछ जगहों पर स्माग टावर लगाए हैं, जो वायु प्रदूषण को सोखते हैं। पर वे भी पूरे शहर के प्रदूषण पर काबू पाने में मददगार साबित नहीं हो रहे। जैसे ही सर्दी का मौसम शुरू होता है, प्रदूषण की परत गाढ़ी होनी शुरू हो जाती है और लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। स्कूल आदि कई दिनों तक बंद करना पड़ता है, निर्माण कार्य रोक देने पड़ते हैं, फिर भी लोग त्राहि-त्राहि करने लगते हैं। ऐसे में सरकार की चिंता समझी जा सकती है। मगर इसके लिए कोई व्यावहारिक उपाय निकालने की जरूरत है, जिससे व्यापारिक गतिविधियां बाधित न हों।

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