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हादसे की आग

गरमी के मौसम की शुरुआत के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से आग लगने और उसमें भारी पैमाने पर जानमाल के नुकसान की खबरें आने लगती हैं।

fireसांकेतिक फोटो।

गरमी के मौसम की शुरुआत के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से आग लगने और उसमें भारी पैमाने पर जानमाल के नुकसान की खबरें आने लगती हैं। ऐसी आग कई बार महज किसी हादसे का नतीजा होती हैं, कई बार छोटी लापरवाही की वजह से आग लग जाती है तो कभी किसी शरारती तत्त्वों की हरकत भी एक बड़ी त्रासदी रच देती है।

रविवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिल्ली के दो और नोएडा के एक इलाके में आग लगने की जैसी घटनाएं सामने आई हैं, वे बेहद तकलीफदेह हैं। विडंबना यह है कि मौसम और दूसरी कुछ वजहों से आग लगने की आशंका को ध्यान में रख कर लोग जरूरी सावधानी नहीं बरत पाते हैं और मामूली कोताही भी बड़े हादसे की वजह बन जाती है। गौरतलब है कि नोएडा फेज तीन के बहलोलपुर स्थित झुग्गी बस्ती में रविवार को आग लग गई, जिसमें बारह सौ से ज्यादा झुग्गियां जल कर खाक हो गर्इं। आग की लपटों में घिर गई दो बच्चियों को नहीं बचाया जा सका और वे जिंदा ही जल गर्इं।

इन झुग्गियों में आमतौर पर गरीब और कमजोर तबके के लोग रहते थे जो छोटा-मोटा काम करके अपना गुजारा करते थे। इतनी बड़ी तादाद में झुग्गियों के राख हो जाने, उसमें दो बच्चियों के मारे जाने के बाद वहां आसरा लिए लोगों की हालत क्या होगी, इसका सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है। दूसरी ओर, दिल्ली में शास्त्री पार्क के फर्नीचर बाजार में भी आग लग गई और सवा दो सौ ज्यादा दुकानें जल कर राख हो गर्इं। यों भी एक जगह मौजूद लकड़ी के सामान में एक बार आग पकड़ ले तो उसका बुझना बहुत मुश्किल होता है।

नतीजा यह हुआ कि इतनी सारी दुकानों पर आजीविका के निर्भर लोग एक झटके में लाचार हो गए। इसके अलावा, दिल्ली के ही ग्रेटर कैलाश इलाके में एक इमारत में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लग गई। इस घटना में गनीमत बस यह रही कि आग की आंच में फंसे लोग किसी तरह दूसरी मंजिल पर बचाव के लिए मदद पहुंचने तक जिंदा बचे रहे। अगर थोड़ी देर होती तो एक परिवार के पांच लोगों सहित सात लोगों की जिंदगी के साथ क्या होता, इसकी कल्पना की जा सकती है।

विडंबना यह है कि एक ओर तापमान में बढ़ोतरी के साथ लोग इस बात को लेकर उतना सावधान नहीं रह पाते कि हर तरफ सामान से नमी लगभग खत्म हो जाती है और एक चिंगारी भी उसे आग की लपटों में तब्दील कर दे सकती है। इसलिए लोग जहां भी हैं, वहां आग लगने की हर गुंजाइश को खत्म करने का इंतजाम करें। दूसरी ओर, मौसम और उससे जुड़े उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले हालात को लेकर सरकार की ओर से व्यवस्थागत उपायों के अलावा जागरूकता फैलाने वाले संदेशों का प्रसार करने को गंभीरता से नहीं लिया जाता।

जबकि संभव है कि उन संदेशों की वजह से किसी लापरवाही पर एक व्यक्ति का ध्यान समय पर चला जाए और बड़ा हादसा टल जाए। मकान में समय-समय पर शॉर्ट सर्किट की जांच और उसे दुरुस्त रखना आग लगने की आशंका को काफी कम कर देता है। कई बार आग लगने की जगह ऐसी होती है, जहां अग्नि शमन के वाहनों को पहुंचने में काफी मुश्किल पेश आती है। बचाव के इंतजाम में लगने वाला वक्त नुकसान की मात्रा को बढ़ा देता है। हालांकि आग लगने की कुछ घटनाएं ऐसी भी हो सकती हैं जिसके पीछे कोई आपराधिक मंशा हो, मगर लोग अपने स्तर पर आग लगने की स्थितियां न पैदा होने दें और साथ-साथ बचाव के इंतजामों को पुख्ता रखें तो नुकसान को कम जरूर किया जा सकता है।

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