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संपादकीय: नतीजों के संकेत

हालांकि विधानसभाओं के चुनाव नतीजे प्राय: लोकसभा की तस्वीर पेश नहीं करते, पर चूंकि आम चुनाव में बमुश्किल पांच महीने बचे हैं इसलिए मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के ताजा नतीजे वहां की जनता के मिजाज का संकेत तो देते ही हैं।

Author Published on: December 12, 2018 5:46 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PTI File Photo)

पांच विधानसभाओं के ताजा चुनाव नतीजों ने जहां भाजपा के विजयरथ के सामने बड़ा गतिरोध खड़ा किया है, वहीं कांग्रेस में प्राण फूंक दिए हैं। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनाव दोनों पार्टियों के लिए मूंछ की लड़ाई बने हुए थे। हालांकि तीनों राज्यों में भाजपा की सरकार थी और ऊपरी तौर पर कयास यही था कि इस बार वहां सत्ता-विरोधी लहर काम करेगी। पर मतदान पश्चात के सर्वेक्षणों में भाजपा की स्थिति मजबूत दिख रही थी। उसने खासकर मध्यप्रदेश और राजस्थान में अपना किला बचाने के लिए कोई कसर नहीं बाकी रखी थी। छत्तीसगढ़ में उसे विश्वास था कि मुख्यमंत्री रमन सिंह के कामकाज से लोग संतुष्ट हैं, इसलिए वहां बहुत जोर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पर सबसे बड़ी पटखनी भाजपा को वहीं मिली। उसकी इतनी बुरा पराजय का अंदाजा शायद किसी को नहीं था। राजस्थान में दो बातें प्रमुख थीं, जिसे लेकर कयास लगाया जा रहा था कि वहां भाजपा को शिकस्त मिलेगी। पहली तो यह कि वहां का मतदाता हर चुनाव में सरकार बदल देता है। दूसरी कि वसुंधरा राजे सिंधिया के कामकाज से लोग संतुष्ट नहीं थे। पर वहां भाजपा हारी जरूर, मगर उसके मतों के प्रतिशत में बहुत बड़ी गिरावट नहीं आई।

इस चुनाव के सबसे दिलचस्प नतीजे मध्यप्रदेश में आए। आखिरी समय तक बहुमत के पास तक पहुंच कर भाजपा और कांग्रेस आगे-पीछे चलती रहीं। इसलिए कि कई विधानसभा सीटों पर दोनों के प्रत्याशियों के बीच मतों का मामूली अंतर बना हुआ था। आखिरकार कांग्रेस की मेहनत रंग लाई। हालांकि शिवराज सिंह चौहान वहां के काफी लोकप्रिय मुख्यमंत्री थे, पर उनके इस कार्यकाल में व्यापमं घोटाला और किसानों की अवहेलना जैसे मुद्दे उनके लिए कठिन साबित हुए। कांग्रेस ने वहां युवाओं की बेरोजगारी और किसानों के कर्ज का मुद्दा उठा कर उन्हें बुरी तरह घेर लिया था। इसके अलावा दो राज्यों- तेलंगाना और मिजोरम में कांग्रेस को शिकस्त झेलनी पड़ी, तो भाजपा का पूर्वोत्तर अभियान भी मंद पड़ता दिखा। दरअसल, ये दोनों पार्टियां इन राज्यों की तरफ अधिक ध्यान केंद्रित नहीं कर पार्इं। तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव की पार्टी टीआरएस ने शानदार जीत हासिल की, तो मिजोरम में मिजो नेशनल फ्रंट ने।

हालांकि विधानसभाओं के चुनाव नतीजे प्राय: लोकसभा की तस्वीर पेश नहीं करते, पर चूंकि आम चुनाव में बमुश्किल पांच महीने बचे हैं इसलिए मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के ताजा नतीजे वहां की जनता के मिजाज का संकेत तो देते ही हैं। फिर बिहार विधानसभा चुनाव के बाद से ही भाजपा को चुनौतियां मिलती रही हैं। गोवा में भी कांग्रेस को भाजपा से अधिक सीटें मिली थीं, बेशक उसने वहां सरकार बना ली। इसी तरह गुजरात में उसे चुनाव जीतने के लिए काफी पसीना बहाना पड़ा। ताजा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और भाजपा ने जो कुछ बड़े मुद्दे उठाए वे वही थे, जो अगले आम चुनाव में उठेंगे। कांग्रेस नोटबंदी, जीएसटी, बेरोजगारी और किसानों की कर्जमाफी जैसे मुद्दों को लेकर अधिक आक्रामक रही और इनका असर भी दिखाई दिया। इसके अलावा, मध्यप्रदेश में कांग्रेस को बहुमत से दूर होते देख रुझानों के समय ही समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने एलान कर दिया कि वे सरकार बनाने में उसे समर्थन देंगी। यह अगले आम चुनाव के लिए बड़ा संकेत है। महागठबंधन बन चुका है। अभी तक ये दोनों पार्टियां उससे अलग रही हैं, इन नतीजों ने उन्हें लामबंद होने का मौका दिया है। इस तरह इन नतीजों से अगले लोकसभा चुनावों के कुछ संकेत तो मिलते ही हैं।

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