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संपादकीय: तेजाबी मानसिकता

उत्तर प्रदेश के बरेली में तीन महिलाओं पर तेजाब फेंकने की घटना की कई परतें हैं। ये समाज में पल रही कुछ विकृत ग्रंथियों को ही रेखांकित करती हैं। जिस दौर में समाज को आपराधिक मानसिकता से मुक्त करने के ऊंचे दावे किए जा रहे हैं, उसमें आज सामंती कुंठाओं से लैस पुरुष दिख जाते हैं, जो लाचार महिलाओं पर तेजाब फेंक कर उनकी जिंदगी तबाह कर दें।

Author Published on: November 12, 2018 2:25 AM
प्रतीकात्मक फोटो

उत्तर प्रदेश के बरेली में तीन महिलाओं पर तेजाब फेंकने की घटना की कई परतें हैं। ये समाज में पल रही कुछ विकृत ग्रंथियों को ही रेखांकित करती हैं। जिस दौर में समाज को आपराधिक मानसिकता से मुक्त करने के ऊंचे दावे किए जा रहे हैं, उसमें आज सामंती कुंठाओं से लैस पुरुष दिख जाते हैं, जो लाचार महिलाओं पर तेजाब फेंक कर उनकी जिंदगी तबाह कर दें। बीते हफ्ते लकड़ी बीनने वाली एक महिला पानी पीने आई और उसे कोल्हू के मालिक ने पकड़ लिया और उससे बलात्कार की कोशिश की। इस बीच शोर सुन कर दो महिलाएं उसे बचाने आर्इं तो उसने तीनों महिलाओं पर तेजाब फेंक दिया। यह समझना मुश्किल है कि एक व्यक्ति के भीतर इस तरह का अपराध करने की हिम्मत कहां से आती है कि वह अपने दरवाजे पर पानी पीने आई एक कमजोर तबके की महिला से बलात्कार की कोशिश करे और अगर वह विरोध करे या उसे बचाने कोई आए तो उन सब पर तेजाब का कहर बरपा दे!

इसकी एक वजह यह लगती है कि बलात्कार की कोशिश और तेजाब से हमला करने का आरोपी एक दारोगा का बेटा है, इसलिए शायद किसी अपराध को अंजाम देने के बाद बच जाने को लेकर वह आश्वस्त होगा। लेकिन क्या पद या कद से जुड़ी कोई भी हैसियत किसी को अपराध करने की छूट दे देता है? फिलहाल आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन इस घटना से यही जाहिर होता है कि समाज के कमजोर तबकों से मनमानी करने की सामंती मानसिकता आज भी किस कदर कुछ लोगों पर हावी है। इसके अलावा, एक अहम सवाल यह है कि देश भर में तेजाबी हमलों के प्रति लगातार चिंता जताए जाने के बावजूद बरेली जैसी जगह में तेजाब की उपलब्धता इतनी आसान कैसे बनी हुई है! इस मसले पर अदालतों ने कई बार साफ और सख्त लहजे में निर्देश जारी किया है कि सरकारें बाजार में सरेआम बिकने वाले तेजाब पर लगाम लगाएं और अनिवार्य होने पर ही इसकी बिक्री के लिए नियम बनाएं। पर ऐसा लगता है कि सरकारों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि इस मसले पर बरती जाने वाली लापरवाही का खमियाजा आमतौर पर महिलाओं को किस रूप में उठाना पड़ता है।

देश भर से अक्सर ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं, जिनमें किसी महिला ने अपने साथ होने वाली मनमानी का विरोध किया या किसी पुरुष से संबंध से इनकार किया तो उस पर तेजाब फेंक दिया गया। इसके पीछे अकेली वजह यह होती है कि मना करने या विरोध जताने वाली महिला के चेहरे और शरीर को बिगाड़ कर उसे एक कभी न खत्म होने वाला दंश दे दिया जाए। यह छिपा नहीं है कि तेजाब के हमले की शिकार किसी महिला को बाकी जिंदगी जीते हुए कैसी तकलीफें झेलनी पड़ती हैं। समाज का रवैया शायद ही कभी ऐसी महिलाओं के प्रति सकारात्मक रहता है और बहुत कम लोग ऐसी महिलाओं की मदद के लिए आगे आते हैं। अब तक तेजाब फेंकने की घटनाओं की जो प्रकृति सामने आई है, वह पितृसत्तात्मक आक्रामकता से संचालित है। इसलिए एक ओर जहां तेजाब की उपलब्धता को सख्त नियम-कायदों में सीमित करना होगा, सरकार और समाज की ओर से इससे पीड़ित महिलाओं की हर स्तर पर मदद सुनिश्चित करनी होगी, वहीं सामंती मानसिकता से छुटकारे लिए सामाजिक प्रशिक्षण को भी केंद्र में रखना होगा।

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