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संपादकीय: दुखद वापसी

खबरों के मुताबिक हैरानी की बात यह है कि इन लोगों को हवाई जहाज से बाहर निकलने के पहले तक हाथ-पांव बांध कर रखा गया था।

Author Published on: November 22, 2019 2:54 AM
बेहतर जिंदगी का सपना पाल कर भारत से अमेरिका का रुख करने वाले लोगों की इच्छा को गलत नहीं कहा जा सकता।

लगभग एक महीने में यह दूसरी बार है जब अमेरिका ने अपनी सीमा में वीजा नियमों का उल्लंघन करने या फिर अवैध रूप से प्रवेश करने वाले भारतीयों को वापस भेज दिया। बुधवार को जब दिल्ली में हवाई अड्डे पर डेढ़ सौ लोग उतरे तो उनके चेहरे पर उदासी छाई थी, शरीर पर मौजूद कपड़े भी सही-सलामत नहीं थे। खबरों के मुताबिक हैरानी की बात यह है कि इन लोगों को हवाई जहाज से बाहर निकलने के पहले तक हाथ-पांव बांध कर रखा गया था। संभव है, इसे किसी प्रक्रिया का हवाला देकर सही ठहराया जाए, लेकिन इसके पीछे कोई वाजिब तर्क ढूंढ़ना मुश्किल होगा कि जब इन सबको विमान में बिठा दिया गया था तब हाथ-पांव बांधने की जरूरत क्यों पड़ी थी! इसके बावजूद यह कहा जा सकता है कि चूंकि वापस भेजे गए लोगों ने अमेरिका में प्रवेश करने के वैध तरीके का उल्लंघन किया था, इसलिए जांच में पकड़े जाने के बावजूद उन्हें वहां बनाए रखना मुश्किल था। करीब एक महीने पहले इसी तरह तीन सौ ग्यारह भारतीयों को पकड़ कर वापस भेज दिया गया था, जो मैक्सिको से होते हुए अवैध तरीके से अमेरिका में दाखिल हुए थे या ऐसा करते हुए पकड़े गए थे।

बेहतर जिंदगी का सपना पाल कर भारत से अमेरिका का रुख करने वाले लोगों की इच्छा को गलत नहीं कहा जा सकता, लेकिन मुश्किल यह है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत वहां जाने के बजाय लोग कई बार कुछ ऐसे एजेंटों की बातों में आ जाते हैं, जो उन्हें आसानी से अमेरिका पहुंचाने और काम दिलाने के वादे करते हैं और इसके लिए उनसे मोटी रकम वसूल लेते हैं। अमेरिका से लौटे लोगों में से किसी ने एजेंट को पच्चीस लाख रुपए दिए थे, तो किसी ने लगभग पैंसठ लाख रुपए खर्च कर डाले।

गौरतलब है कि अमेरिका में छह लाख से ज्यादा ऐसे लोग हैं, जिनका दस्तावेजों में कोई रेकॉर्ड नहीं है। अगर अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकर कोई व्यापक अभियान चला, तो नतीजों का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके अलावा, सन 2014 से लेकर अब तक अमेरिका में शरण के लिए करीब बाईस हजार भारतीयों ने आवेदन किया हुआ है। अगर कोई किसी तरह अमेरिका में दाखिल हो भी जाता है, तो वहां शरण लेने की प्रक्रिया काफी जोखिम भरी, जटिल और लंबी है। आम लोगों के लिहाज से देखें तो यह बेहद खर्चीली भी है।

सही है कि अमेरिका से वापस भेजे गए भारतीयों को जिस हालत में देखा गया, उससे यही लगता है कि उनके साथ संवेदनशील तरीके से पेश नहीं आया गया। हालांकि अमेरिका से यह उम्मीद की जा सकती है कि भारत के साथ उसके संबंधों के मद्देनजर वह पकड़े गए लोगों के साथ मानवीय व्यवहार करता। लेकिन सच यह है कि अमेरिकी हिरासत केंद्रों में भी लोगों के साथ बेहद सख्त बर्ताव किया जाता है।

यों किसी भी मामले में पकड़े गए कैदी के साथ संवेदशील तरीके से पेश आना मानवीयता और मानवाधिकारों का तकाजा है। लेकिन यह भी सच है कि पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में विदेशी नागरिकों के जाकर बसने को लेकर जिस तरह नियम-कायदे सख्त हुए हैं, उसमें कानूनों को धता बता कर उसकी सीमा में दाखिल होने वालों के प्रति वहां का प्रशासन सख्त हुआ है। इसके बावजूद अगर वैध तरीकों से वहां जाने के बजाय कुछ लोग गलत रास्ते अख्तियार करते हैं, तो ऐसे में उनके सामने जटिलताएं खड़ी होना स्वाभाविक है।

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