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संपादकीय: रणनीतिक कदम

अनुच्छेद 370 को हटाने के तुरंत बाद चीन ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने को लेकर अपनी असहमति जताई थी।

Author नई दिल्ली | August 14, 2019 2:12 AM
सांकेतिक तस्वीर।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद दुनिया के ज्यादातर देशों ने भारत के इस फैसले को उसका अंदरूनी मामला बताते हुए इस मुद्दे से उचित दूरी बना ली है। पाकिस्तान के दो सबसे प्रमुख सहयोगी और हमदर्द चीन और अमेरिका ने हाल में जिस तरह का रुख दिखाया है, उससे साफ है कि कश्मीर मुद्दे पर अब पाकिस्तान को कोई अहमियत नहीं मिल रही। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर इन दिनों चीन की सरकारी यात्रा पर हैं और उन्होंने चीनी विदेश मंत्री के साथ बातचीत में यह साफ कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा कर उसे संशोधित रूप में लागू करना और राज्य को विभाजित कर दो केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला पूरी तरह से भारत का अंदरूनी मसला है।

अनुच्छेद 370 को हटाने के तुरंत बाद चीन ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने को लेकर अपनी असहमति जताई थी। लद्दाख का हिस्सा अक्साईचिन तक है और यह इलाका भारत और चीन दोनों के लिए ही सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। इसलिए चीन ने अपनी तात्कालिक प्रतिक्रिया में कहा था कि जम्मू-कश्मीर के मामले में भारत एकतरफा कार्रवाई से बचे। लेकिन उसने अपनी प्रतिक्रिया में ऐसा कुछ नहीं कहा था जो पाकिस्तान के प्रति उसके समर्थन को जाहिर करता हो।

दरअसल, चीन नहीं चाहता कि भारत लद्दाख के क्षेत्र में विकास गतिविधियों को शुरू करे। इसलिए भारत ने अपनी स्थिति और रुख को स्पष्ट करते हुए बता दिया है कि अनुच्छेद 370 को हटाने से पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ सीमाओं में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं हुआ है और भारत ने यह कदम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बेहतर विकास के लिए उठाया है। विदेश मंत्री बनने के बाद एस जयशंकर की यह पहली चीन यात्रा है। हाल के घटनाक्रमों के मद्देनजर उनकी इस यात्रा का महत्त्व इसलिए भी बढ़ गया है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने चीन यात्रा की थी और भारत के इस कदम के खिलाफ बयान जारी करने को कहा था। लेकिन चीन ने संयम बरतते हुए बयान दिया, जिसमें बुनियादी चिंता लद्दाख को लेकर ही थी।

दरअसल, चीन भी हकीकत को समझता है। उसने पिछले एक साल में देखा है कि जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र की पाबंदी के मुद्दे पर उसे मुंह की खानी पड़ी है। इसलिए चीन अब पाकिस्तान को लेकर ऐसी कोई हमदर्दी दिखाने से बचना चाहेगा जिसमें भारत के खिलाफ कोई संदेश जाता हो। चीन इस बात को भी अच्छी तरह समझ रहा है कि सीमा विवाद के बावजूद भारत उसके लिए बड़ा बाजार है। ऐसे में चीन कश्मीर मुद्दे पर खुल कर पाकिस्तान के साथ नहीं आने वाला।

इसके अलावा, अब अमेरिका ने भी अनुच्छेद 370 हटाने के बाद इस मुद्दे पर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि वह कश्मीर पर पुरानी नीति पर कायम है। अमेरिका ने अब तक कोई ऐसा बयान नहीं दिया जो मौजूदा हालात के मद्देनजर भारत के खिलाफ जाता हो। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पाकिस्तान को लगा था कि दुनिया के ज्यादातर देश उसके साथ आ जाएंगे, लेकिन उसे निराशा ही हाथ लगी है।

इस हकीकत की पुष्टि पाकिस्तान के विदेश मंत्री के उस बयान से होती है जिसमें उन्होंने अपने देश के नागरिकों से यहां तक कह डाला कि वे मुगालते में न रहें, क्योंकि जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लिए जाने के भारत के फैसले के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) और मुसलिम जगत का समर्थन हासिल करना पाकिस्तान के लिए आसान नहीं है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री का यह बयान उनकी हताशा बताने के लिए काफी है।

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