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संपादकीय: हिंसक मानसिकता

अमेरिका के कैलीफोर्निया में जिस तरह एक व्यक्ति ने नाचघर में अचानक गोलियां चला कर एक पुलिस अधिकारी सहित बारह लोगों को मार डाला, उससे लोगों में पनपती हिंसक मानसिकता को लेकर एक बार फिर चिंता जताई जाने लगी है।

Author November 10, 2018 2:19 AM
प्रतीरकात्मक फोटो

अमेरिका के कैलीफोर्निया में जिस तरह एक व्यक्ति ने नाचघर में अचानक गोलियां चला कर एक पुलिस अधिकारी सहित बारह लोगों को मार डाला, उससे लोगों में पनपती हिंसक मानसिकता को लेकर एक बार फिर चिंता जताई जाने लगी है। जिस व्यक्ति ने गोलीबारी की उसने खुद को भी गोली मार ली। अभी तक उसके गोली चलाने की वजह पता नहीं चल पाई है। अमेरिका में इस तरह किसी सनक या खुंदक की वजह से बेवजह किसी पर गोली चला देने की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। इसकी एक वजह तो यह है कि वहां हथियार रखने की खुली छूट है। कई बार इस छूट को समाप्त करने की सिफारिश की जा चुकी है। पर इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया जा सका है। इसके अलावा, एक वजह यह भी है कि वहां के युवाओं में रोजगार आदि की समस्या के चलते तनाव और अवसाद का स्तर बढ़ रहा है। इससे भी कई युवाओं में हिंसक और आपराधिक मानसिकता तेजी से विकसित हो रही है। विचित्र है कि जो देश दुनिया भर में अपनी संपन्नता और सुरक्षा के मामले में सख्ती के लिए जाना जाता है, वहां के नागरिक खुद उसकी सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो रहे हैं।

अब दुनिया भर में गंभीरतापूर्वक इस बात पर विचार किया जाने लगा है कि किसी देश की खुशहाली का पैमाना सिर्फ आर्थिक संपन्नता है या फिर मानवीय मूल्यों के लिहाज से भी विकास की परख होनी चाहिए। अमेरिका, ब्रिटेन आदि देशों ने आर्थिक स्तर पर संपन्नता तो हासिल कर ली है, पर हकीकत यह भी है कि इसके चलते उनके नागरिकों में ऐशोआराम की सुविधाओं को ही अपना अधिकार मानने जैसी कई विकृतियां भी पैदा हो गई हैं। सुरक्षा के नाम पर इन देशों में लोगों को हथियार रखने की छूट दी गई है। पर इसका नतीजा यह देखा जाने लगा है कि वे किसी कुंठा के चलते दूसरों की जान तक ले लेने से नहीं हिचकते। उनके भीतर हिंसा मनोरंजन की जगह लेती गई है। इसी का नतीजा है कि छोटे-छोटे स्कूली बच्चे भी अपने किसी सहपाठी से रंजिश के चलते उस पर गोली चलाते देखे गए हैं। अमेरिका की संपन्नता के अंधेरे तलघर की एक सच्चाई यह भी है कि उसने बड़े पैमाने पर कर्ज लेकर अपने नागरिकों के लिए सुविधाएं मुहैया करा रखी हैं। अगर सरकार किसी वजह से युवाओं की किसी सुविधा में कटौती करती है, तो उसका दुष्परिणाम नजर आने लगता है।

बहुत सारे अमेरिकी युवा सरकारी सुविधाएं कम होने और किसी काम-धंधे की योग्यता न रखने की वजह से भी कुंठित हो रहे हैं। कई युवाओं को लगता है कि दूसरे देशों से आकर लोग उनका अधिकार छीन रहे हैं। यही वजह है कि पिछले चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने युवाओं को उनके अधिकार दिलाने का वादा करके आकर्षित किया था। इसके अलावा सबसे बड़ी बात है कि आर्थिक संपन्नता के कंगूरे पर चढ़ कर खुद को खुशहाल और ताकतवर दिखाने वाले देशों ने अपने बच्चों को मानवीय संवेदना विकसित करने वाले पाठों की अनदेखी की है। संवेदना के अभाव में हिंसक मानसिकता का ही विकास होता है। चिंता की बात यह है कि हमारे देश के युवा बहुत सारी मामलों में अमेरिका जैसे देशों की नकल करते हैं। हिंसक मानसिकता हमारे किशोरों और युवाओं में भी उभरती नजर आती है। इसलिए अमेरिका में होने वाली ऐसी घटनाओं को हमें भी गंभीरता से लेने की जरूरत है।

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