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संपादकीयः संक्रमण का दायरा

चिकित्सकों में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है, इसलिए उनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है। अगर चिकित्सक खुद विषाणु से संक्रमित हो जाएगा, तो इसके चक्र को तोड़ने का मकसद प्रभावित होगा। कोरोना का चक्र तोड़ने के लिए देश में पूर्ण बंदी कर दी गई है, पर हकीकत यह भी है कि जरूरत भर के जांच केंद्र नहीं बन पाए हैं...

Author Published on: March 28, 2020 12:08 AM
दिल्ली में मुहल्ला क्लीनिक के एक डॉक्टर के कोरोना संक्रमित होने से करीब नौ सौ लोगों के प्रभावित होने की आशंका है।

दिल्ली में मुहल्ला क्लीनिक के एक डॉक्टर के कोरोना संक्रमित होने से करीब नौ सौ लोगों के प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि सरकार ने बारह से अठारह मार्च के बीच उस क्लीनिक में इलाज के लिए गए सभी मरीजों को घर के भीतर बंद रहने की अपील की है और उन सभी की पहचान की जा रही है, पर इस खबर के आते ही स्वाभाविक रूप से प्रशासन और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। संबंधित डॉक्टर सऊदी अरब से आई एक महिला के संपर्क में आया था, जिससे उसे संक्रमण हुआ और फिर डॉक्टर की पत्नी और बेटी तक भी फैल गया। इस अवधि में उस डॉक्टर के संपर्क में जितने मरीज और उसके सहकर्मी आए होंगे उनमें और फिर उनके संपर्क में आने वाले परिजनों, मित्रों, मरीजों तक भी कोरोना विषाणु के पहुंचने की आशंका पैदा हो गई है। इससे कई सवाल भी उभरे हैं, जिनमें यह प्रमुख है कि उस दौरान जब कोरोना का खतरा महसूस किया जा रहा था और बाहर से आने वालों के संपर्क में आने से इसके फैसले का भय अधिक जताया जा रहा था, तब संबंधित चिकित्सक ने जरूरी सावधानी क्यों नहीं बरती! क्या उस क्लीनिक में आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी?

हालांकि चिकित्सकों में इसके संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है, इसलिए उनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है। अगर चिकित्सक खुद विषाणु से संक्रमित हो जाएगा, तो इसके चक्र को तोड़ने का मकसद प्रभावित होगा। कोरोना का चक्र तोड़ने के लिए देश में पूर्ण बंदी कर दी गई है, पर हकीकत यह भी है कि जरूरत भर के जांच केंद्र नहीं बन पाए हैं, जहां कोरोना की अलग से जांच हो और संक्रमितों को अलग-थलग रखा जा सके। इस वजह से बहुत सारे लोगों को स्थानीय मुहल्ला क्लीनिकों, डिस्पेंसरियों, प्रथामिक स्वास्थ्य केंद्रों या अस्पतालों में नियमित मरीजों की तरह देखा जाता है। हालांकि इस खतरे की आशंका के मद्देनजर केंद्र सरकार ने चिकित्सा कर्मियों के लिए पचास लाख रुपए की बीमा की घोषणा कर दी है, पर कई अस्पतालों की शिकायत यह भी है कि उनके पास कोरोना की जांच के समुचित उपकरण नहीं हैं। इसके लिए तैनात चिकित्सा कर्मियों को जरूरी मास्क और पहनावा तक उपलब्ध नहीं है। उन देशों के अनुभव सामने हैं जहां प्राथमिक चरण में ही कोरोना पर रोक लगाने में ढिलाई बरती गई, वहां उसने बड़े पैमाने पर लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। यह सब देखते हुए लोगों में घबराहट बढ़ना स्वाभाविक है।

पर ऐसी खबरों और इक्का-दुक्का घटनाओं से घबराहट या फिर व्यवस्था पर अंगुलियां उठाने, नाराजगी जाहिर करने का यह वक्त नहीं है। अभी सारा जोर कोरोना के चक्र को तोड़ने पर होना चाहिए। इसमें लोगों का संयम और सहयोग बहुत जरूरी है। संबंधित घटना के प्रकाश में आते ही सरकार ने जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं, इसलिए इसे लेकर भयभीत होने की जरूरत नहीं है। पूर्ण बंदी का पालन न करने और बेवजह घबराहट में चिकित्सा केंद्रों में पहुंच कर जांच के लिए कतार लगाने से भी इस खतरे को रोकने में बाधा पहुंचेगी। किसी भी व्यवस्था के शुरुआती चरण में कुछ कमियां नजर आती ही हैं, पर उनके अनुभवों से सीख लेते हुए सुधार कर लिए जाते हैं, सो वह सरकार कर रही है। कोरोना का दायरा इससे आगे न बढ़ने पाए, यह आम लोगों के सहयोग से ही संभव हो पाएगा।

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