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संपादकीय:महाबली पर मुकदमा

डोनाल्ड ट्रंप जब राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव मैदान में उतरे तभी से उनके बयानों, उनके जीवन से जुड़ी अनेक गतिविधियों, कारोबारी अनियमितताओं, चुनावों में धांधली आदि को लेकर तरह-तरह के आरोप लगते रहे हैं।

Author Updated: June 28, 2019 12:52 AM
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप।

अमेरिका की एक संघीय अदालत का फैसला दुनिया की तमाम अदालतों के लिए एक नजीर है। उस अदालत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ मुकदमा चलाने की डेमोक्रेटिक पार्टी की अपील को मंजूरी दे दी है। यानी अब ट्रंप के खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकेगा। वहां के सांसद सूचनाएं एकत्र करने के लिए समन भेज सकते हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी के दो सौ सांसदों ने आरोप लगाया है कि ट्रंप राष्ट्रपति रहते हुए संघीय सरकारों और विदेशों से उपहार लेते रहे हैं, जबकि अमेरिकी संविधान के मुताबिक बिना संसद की मंजूरी के राष्ट्रपति पद का निर्वाह कर रहा व्यक्ति इस तरह का कोई भी उपहार स्वीकार नहीं कर सकता। फिर उन्होंने आज तक अपने कारोबारी रिश्ते समाप्त नहीं किए हैं। अमेरिकी संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति पद पर रहते हुए कोई भी व्यक्ति अपने कारोबार में संलिप्त नहीं रह सकता। मगर ट्रंप संविधान की परवाह न करते हुए अपने कारोबार भी चलाते रहे। यह एक तरह से सांसदों को उनके कामकाज में बाधा पहुंचाने जैसा है। इस पर संविधान के नियमों की अनदेखी करने के आरोप में वहां की संघीय अदालत ने ट्रंप के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। अमेरिकी सदन की अध्यक्ष नैन्सी पोलोसी ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति संविधान से ऊपर नहीं हो सकता, चाहे वह राष्ट्रपति ही क्यों न हो।

डोनाल्ड ट्रंप जब राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव मैदान में उतरे तभी से उनके बयानों, उनके जीवन से जुड़ी अनेक गतिविधियों, कारोबारी अनियमितताओं, चुनावों में धांधली आदि को लेकर तरह-तरह के आरोप लगते रहे हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद उनके अनेक फैसले विवादों के घेरे में रहे। शुरुआती दिनों में ही उनके फैसलों को चुनौती मिलने लगी थी। उनके दूसरे देशों से आने वाले शरणार्थियों पर रोक लगाने संबंधी फैसले पर भी एक संघीय अदालत ने रोक लगा दी थी। तब ट्रंप को दुनिया भर में काफी किरकिरी झेलनी पड़ी थी। अपने कार्यकाल में ट्रंप के कामकाज के तरीके को लेकर गहरा असंतोष व्यक्त किया जाता रहा है। वे अनेक मामलों में संसद को विश्वास में लिए बगैर खुद मनमाने तरीके से फैसले करते रहे हैं। उनका यह रवैया न सिर्फ विपक्ष के संसद सदस्यों, बल्कि उनकी पार्टी के लोगों और आम लोगों को खटकती रही है। यही वजह है कि जब संघीय अदालत में उन पर मुकदमा चलाने की अपील की गई और उसे खारिज करने की तमाम कोशिशों के बावजूद अदालत ने उसे स्वीकार कर लिया, तो बहुत सारे लोगों ने उसका स्वागत किया है।

अमेरिका में राष्ट्रपति को बहुत ताकतवर माना जाता है। उसकी तरफ दुनिया भर की नजर रहती है। उसके आचरण से न सिर्फ अमेरिकी लोगों, बल्कि दुनिया के बहुत सारे मामलों पर असर पड़ता है। इसलिए जब इस सर्वोच्च पद का निर्वाह कर रहे व्यक्ति पर संविधान के खिलाफ आचरण करने का आरोप लगता है, तो स्वाभाविक ही अमेरिका की छवि धूमिल होती है। मगर वहां की जिस अदालत ने ट्रंप के खिलाफ मुकदमे को मंजूरी दी, उस न्यायाधीश के साहस और अपने संविधान के प्रति निष्ठा भी एक मिसाल है। ट्रंप को शायद लगता रहा होगा कि वे जिस तरह राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित कर सत्ता तक पहुंच गए, उसी तरह अपने फैसलों और अपनी मनमानियों पर भी लोगों को चुप्पी साधे रखने को विवश कर सकेंगे। पर खुद को संविधान और कानून से ऊपर मान बैठना उनके लिए खतरे की घंटी साबित हुआ।

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