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संपादकीयः कारोबार की दोस्ती

भारत और अमेरिका के बीच जिन दूसरे मसलों पर समझौते हुए हैं, उनमें नशीले पदार्थों की तस्करी का मामला प्रमुख रूप से उठा और दोनों देशों ने इस समस्या से मिल कर निपटने का संकल्प किया है। नशीले पदाथों की तस्करी को रोकना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इससे आने वाले पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने के लिए हो रहा है।

Author Edited By Anil Sharma Published on: February 26, 2020 12:21 AM
कश्मीर में मध्यस्थता को लेकर ट्रंप अक्सर ऐसे बयान देते रहे हैं जो भारत को नागवार गुजरे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दो दिन की भारत यात्रा को देशों के बीच एक नए युग की शुरुआत कहा गया है। इसमें कोई शक नहीं कि जिस मकसद को लेकर ट्रंप भारत आए, उसमें वे पूरी तरह सफल रहे। इसलिए दोनों देशों के बीच यह नया युग अमेरिका के लिए ज्यादा लाभदायक होगा। अमेरिका समझ चुका है कि भारत के रक्षा क्षेत्र का बाजार उसके लिए अनंत संभावनाएं लिए हुए है, इसलिए वह भारत को जम कर हथियार और रक्षा सामान बेच सकता है। पिछले तेरह साल में अमेरिका भारत को बीस अरब डॉलर के हथियार और रक्षा उपकरण बेच चुका है। अब तीन अरब डॉलर के रक्षा सौदों पर करार हो गया है। इस सौदे के तहत अमेरिका भारत को अपाचे और एमएच-60 रोमियो हेलिकॉप्टर सहित कई अत्याधुनिक सैन्य उपकरण बेचेगा। भारत का जोर और प्राथमिकता इस वक्त अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाना और थल सेना, वायु सेना और नौ सेना को अत्याधुनिक हथियारों से सुसज्जित करना है। भारत को दो पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान जिस तरह से देश की सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं, उसे देखते हुए सैन्य क्षमता के विस्तार की जरूरत और महत्त्वपूर्ण हो जाती है। इसके अलावा हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते कदमों से भी अमेरिका की नींद उड़ी है, इसलिए भारत को और हथियार संपन्न बनाने में उसका अपना हित है।

भारत और अमेरिका के बीच जिन दूसरे मसलों पर समझौते हुए हैं, उनमें नशीले पदार्थों की तस्करी का मामला प्रमुख रूप से उठा और दोनों देशों ने इस समस्या से मिल कर निपटने का संकल्प किया है। नशीले पदाथों की तस्करी को रोकना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इससे आने वाले पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने के लिए हो रहा है। इसलिए अब भारत और अमेरिका एक ऐसा साझा तंत्र विकसित करेंगे जो इस पर लगाम लगा सके। पाकिस्तान के बारे में तो ट्रंप ने साफ कर दिया कि उसे दुनिया जान रही है कि वह क्या कर रहा है। इसमें कोई शक नहीं कि आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान पर लगाम कसने में ट्रंप ने जो सक्रियता दिखाई है और वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) द्वारा उसे निगरानी सूची में डालने को लेकर ट्रंप जिस तरह से दबाव बनाते रहे हैं, वह इस बात का प्रमाण तो है कि पाकिस्तान को लेकर अमेरिका का रुख सख्त है। पर अमेरिका का यह रुख कब तक बना रहता है, देखना होगा।

कश्मीर में मध्यस्थता को लेकर ट्रंप अक्सर ऐसे बयान देते रहे हैं जो भारत को नागवार गुजरे हैं। पर इस बार उन्होंने कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच का ही मसला करार दिया है और भारत के रुख का समर्थन किया। ट्रंप की भारत यात्रा से पहले लग रहा था कि अमेरिका धार्मिक स्वतंत्रता का मामला उठा कर भारत को असहज स्थिति में डाल सकता है, जैसा कि वह पहले भी करता रहा है। यह आश्चर्य की बात है कि ट्रंप ने इस मामले में भारत को एक तरह से क्लीन चिट देते हुए यहां तक कह डाला कि धार्मिक आजादी पर भारत अच्छा काम कर रहा है, भारत में दूसरे देशों से ज्यादा धार्मिक आजादी है। लेकिन दोनों देशों के बीच एच-1बी वीजा मुद्दे को लेकर जो गतिरोध बना हुआ है, उसमें अमेरिका से भारत को कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलना चिंता पैदा करता है। भारत और अमेरिका के बीच कारोबारी रिश्ते तेजी से बढ़ रहे हैं, यह अच्छा संकेत है। लेकिन आयात शुल्क के मुद्दे पर भारत ने जो रुख दिखाया है, उसे अमेरिका को समझना चाहिए।

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