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संपादकीय: आधार की अड़चन

सवाल है कि स्कूलों ने किस वजह से एक ऐसे नियम को अनिवार्य बना दिया था, जिसके लिए सरकार या संबंधित महकमे की ओर से कोई बाध्यता तय नहीं की गई थी! सच यह है कि न केवल दाखिले के लिए, बल्कि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को किसी न किसी बहाने अनिवार्य रूप से अपना आधार नंबर मुहैया कराने की प्रक्रिया में डाल दिया गया है।

Author September 7, 2018 2:43 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

जब से सरकार ने ज्यादातर कामों के लिए आधार नंबर की अनिवार्यता पर जोर देना शुरू किया है, तब से ऐसी जगहों पर भी लोगों को मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं, जहां अभी तक इसकी बाध्यता तय नहीं की गई है। हालत यह है कि अगर अभिभावक स्कूलों में अपने बच्चे का दाखिला कराने जाते हैं तो बिना आधार नंबर मुहैया कराए यह काम नहीं हो पाता है। दाखिले के लिए आधार नंबर की अनिवार्यता को स्कूलों ने अपनी ओर से लागू कर दिया। यूआइडीएआइ यानी भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने बुधवार को स्कूलों के लिए जारी अपने ताजा निर्देश में कहा है कि आधार कार्ड न होने की वजह से किसी बच्चे को दाखिला देने से इनकार न करें। यह अवैध है और फिलहाल कानून के तहत ऐसा करने की इजाजत नहीं है। बल्कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आधार कार्ड की वजह से किसी भी बच्चे को लाभ और उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जाए।

सवाल है कि स्कूलों ने किस वजह से एक ऐसे नियम को अनिवार्य बना दिया था, जिसके लिए सरकार या संबंधित महकमे की ओर से कोई बाध्यता तय नहीं की गई थी! सच यह है कि न केवल दाखिले के लिए, बल्कि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को किसी न किसी बहाने अनिवार्य रूप से अपना आधार नंबर मुहैया कराने की प्रक्रिया में डाल दिया गया है। यह किसी से छिपा नहीं है कि फिलहाल कानूनी तौर पर आधार का दायरा चाहे जो तय किया गया हो, लेकिन व्यवहार में बैंकों और स्कूलों से लेकर बहुत सारे ऐसे कामों में भी लोगों को आधार के बिना सुविधाएं मुहैया कराने से इनकार कर दिया जा रहा है, जहां अभी तक इसकी अनिवार्यता लागू नहीं हुई है। जबकि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आना अभी बाकी है कि आधार की वैधता क्या है या इसकी अनिवार्यता और उपयोग की सीमा क्या होनी चाहिए!

अगर किन्हीं स्थितियों में सुप्रीम कोर्ट अपने अंतिम निर्णय में इसकी अनिवार्यता के पक्ष में फैसला दे भी देता है, तो चूंकि इसके दायरे में देश के सभी वैध नागरिक आएंगे, इसलिए आधार एक सतत चलने वाली प्रक्रिया होगी। फिर इस कार्ड का बनना एक प्रक्रिया से होकर गुजरता है और संभव है कि किसी व्यक्ति को कोई ऐसी जरूरत अचानक सामने आ जाए, जिसमें आधार की अनिवार्यता लागू हो। ऐसी स्थिति में प्राधिकरण या संबंधित संस्थान की ओर से क्या व्यवस्था की जाएगी? अभी जिन योजनाओं और सरकारी कल्याणकारी कार्यक्रमों का लाभ उठाने के लिए आधार को अनिवार्य घोषित कर दिया गया है, उसमें भी तकनीकी वजहों से बायोमेट्रिक पहचान से संबंधित मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। ऐसी खबरें भी आती रहती हैं कि बायोमेट्रिक मिलान में दिक्कत होने की वजह से किसी व्यक्ति को योजना का लाभ नहीं मिल सका। इसके अलावा, आधार नंबर के सार्वजनिक होने और उसके जोखिम को लेकर अभी बहुत सारे सवालों का निराकरण नहीं हो पाया है और डाटा चोरी के खतरे के मामले या आधार नंबर के दुरुपयोग की आशंका बड़ी चिंता की वजहें बनी हुई हैं। जरूरत इस बात की है कि आधार के समूचे मामले पर जब तक सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता है, तब तक लोगों के सामने इसकी बाध्यता तय न की जाए।

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