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संपादकीय : लापरवाही की लपटें

मालवीय नगर के रबड़ गोदाम में लगी भीषण आग इसी लापरवाही का नतीजा है, जिस पर काबू पाने में अग्नि शमन दस्ते को चौदह घंटे लग गए। आग का दायरा इतना फैल गया था कि इसे नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद लेनी पड़ी।

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दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित एक रबड़ गोदाम में लगी भयावह आग बहुस्तरीय लापरवाहियों का उदाहरण है। हैरानी की बात है कि पिछले कुछ महीनों में राजधानी के कई इलाकों में लगी आग और उससे नुकसान के बावजूद न तो दूसरी जगहों के कारखाना मालिकों ने कोई सबक लेना जरूरी समझा और न प्रशासन की ओर से जांच और निगरानी चुस्त की गई। मालवीय नगर के रबड़ गोदाम में लगी भीषण आग इसी लापरवाही का नतीजा है, जिस पर काबू पाने में अग्नि शमन दस्ते को चौदह घंटे लग गए। आग का दायरा इतना फैल गया था कि इसे नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद लेनी पड़ी। बीते पैंतीस सालों में यह पहली बार था जब आग लगने के बाद पैदा हालात से निपटने के लिए हेलीकॉप्टर का सहारा लिया गया। दमकल अधिकारियों के मुताबिक पिछले दो दशक में दिल्ली में इतनी भयावह आग नहीं लगी थी। गनीमत बस यह रही कि आग की शुरुआत के साथ ही लोग किसी तरह सुरक्षित वहां से निकल गए, इसलिए किसी व्यक्ति की जान नहीं गई।

मगर इसका मतलब यह कतई नहीं है कि खतरे के लिहाज से इस घटना को कम समझा जाना चाहिए। गोदाम के आसपास ही स्कूल और दर्जनों मकान हैं, जिनमें सैकड़ों लोग रहते हैं। अगर प्रशासन ने समय रहते इलाके को खाली न कराया होता तो जानमाल के नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसलिए मामले की अनदेखी करने के बजाय इसमें सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी तय किए जाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत है। गौरतलब है कि रिहाइशी इलाके में गैरकानूनी तरीके से बने इस गोदाम में रबर और टायर के सामान, प्लास्टिक की चादरें और अन्य अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ थे, लेकिन अचानक आग लगने की स्थिति में बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए गए थे। नतीजतन, एक ट्रक में लगी आग समूचे गोदाम में फैल गई। सवाल है कि रिहाइशी इलाके में बना यह गोदाम दमकल विभाग के अनापत्ति प्रमाण पत्र के बिना ही लंबे समय से बेरोकटोक चल रहा था, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? प्रशासन की नजर से एक बड़ा गोदाम कैसे बचा रह गया था? जाहिर है, इसमें गोदाम मालिक से लेकर संबंधित महकमों और उनके अधिकारियों तक की मिलीभगत या अनदेखी हो सकती है।

अक्सर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं कि किसी रिहाइशी इलाके में अवैध रूप से फैक्ट्रियां चलती रहती हैं, जिनमें किसी हादसे के वक्त बचाव के इंतजाम शायद ही होते हैं। इसके अलावा, फैक्ट्रियों के लिए निर्धारित जगहों पर चलने वाली इकाइयों में भी कई बार आग लगने या अन्य दुर्घटना की स्थिति में वहां से लोगों के आसानी से निकलने या बचाव के बाकी उपाय नहीं होते। इन सबका पता तभी चलता है, जब वहां कोई हादसा हो जाता है और जानमाल का बड़ा नुकसान हो चुका होता है। खासतौर पर आग लगने जैसे मामलों में अमूमन सभी जगहों पर एक ही तरह की कमियां देखी जाती हैं। मगर फैक्ट्रियों के मालिक शायद ही कभी आग लगने की स्थिति में बचाव के माकूल उपाय करते या अपने कर्मचारियों को इस बात के लिए प्रशिक्षित करते हैं कि अचानक हादसे की स्थिति में क्या करें! जब तक नियम-कायदों पर सख्ती से अमल सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक इस तरह के हादसों पर काबू पाना मुश्किल बना रहेगा।

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