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संपादकीय: ट्रंप का झूठ 

ट्रंप जिस फितरत के शख्स हैं, उसमें उनके लिए इस तरह की बातें करना कोई नया नहीं है। अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने देश के भीतर और बाहर और वैश्विक मंचों से भी कई बार जिस तरह की और जिस अंदाज में बातें की हैं, ऊटपटांग और विवादित बयान दिए हैं, वे उनके हल्के और विवादास्पद व्यक्तित्व का परिचायक हैं।

ट्रंप के झूठ से हर कोई सकते में है।

कश्मीर के मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के झूठे और गैर-जिम्मेदाराना बयानने भारी बखेड़ा खड़ा कर दिया है। ट्रंप ने वाइट हाउस में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के स्वागत के बाद मीडिया से बातचीत में यह कह डाला कि भारत ने उनसे कश्मीर मसले पर मध्यस्थता करने को कहा है। पाकिस्तान के लिए आर्थिक मदद मांगने अमेरिका की यात्रा पर पहुंचे इमरान खान ने ट्रंप से बातचीत में कश्मीर का मुद्दा उठाया और इसी प्रसंग में यह बात निकली। ट्रंप का कहना है कि दो हफ्ते पहले मैं भारत के प्रधानमंत्री से मिला था और उन्होंने मुझसे कहा था कि क्या आप कश्मीर मामले में मध्यस्थता करेंगे। लेकिन भारत ने ट्रंप के इस बयान पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसका खंडन किया और दो-टूक कहा कि कश्मीर को लेकर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं है और भारत के प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति से ऐसी कोई बात नहीं की। भारत ने जिस तरह से ट्रंप के बयान का खंडन करते हुए उसे झूठा करार दिया है, उससे साफ है कि कश्मीर को लेकर ट्रंप ने सरासर मनगढ़त बात की है। ट्रंप की इस हरकत से भारत में हर कोई सकते में है। भारत की संसद से लेकर सोशल मीडिया तक में मामला गरमाया है और पूछा जा रहा है कि जब भारत ने ऐसी कोई बात की ही नहीं तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने कैसे इतनी बड़ी बात कह डाली और वह भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की मौजूदगी में! सवाल है कि क्या ट्रंप ने झूठ बोला है? आखिर इस झूठे बयान के पीछे ट्रंप की मंशा क्या है?

दरअसल ट्रंप जिस फितरत के शख्स हैं, उसमें उनके लिए इस तरह की बातें करना कोई नया नहीं है। अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने देश के भीतर और बाहर और वैश्विक मंचों से भी कई बार जिस तरह की और जिस अंदाज में बातें की हैं, ऊटपटांग और विवादित बयान दिए हैं, वे उनके हल्के और विवादास्पद व्यक्तित्व का परिचायक हैं। हल्की-फुल्की और गैरजिम्मेदाराना बातें करना उनके मिजाज में हैं। अपने विवादित बयानों और व्यवहार से वे कई बार असहज स्थितियां पैदा करते रहे हैं। ऐसे में कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि ट्रंप ने झूठ बोला होगा। लेकिन मामला गंभीर इसलिए है कि भारत की राजनीति में इससे तूफान खड़ा हो गया है। इससे न केवल घरेलू मोर्चे पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत मुश्किल में पड़ सकता है। विपक्ष हकीकत जानता चाह रहा है। संसद में भारत के विदेश मंत्री को सफाई देनी पड़ी कि भारतीय प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति से ऐसी कोई बात ही नहीं की।

ट्रंप के बयान से देश-दुनिया में यह संदेश गया है कि भारत कश्मीर के मुद्दे पर अपनी नीति में बदलाव लाने जा रहा है। जबकि कश्मीर को लेकर भारत की नीति शुरू से ही स्पष्ट रही है। भारत हमेशा से कहता आया है कि कश्मीर का मसला द्विपक्षीय है और इसे शिमला समझौते के तहत ही सुलझाया जाएगा। भारत ने आज तक किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की बात नहीं की है। हकीकत यह है कि पाकिस्तान ही वैश्विक मंचों से कश्मीर का राग अलापता रहा है और तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की बात करता रहा है। भारत का रुख साफ है कि पाकिस्तान के साथ कोई भी बातचीत सीमापार आतंकवाद बंद होने पर और शिमला समझौते तथा लाहौर घोषणापत्र के अंतर्गत ही होगी। ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं। उन्हें दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति के रूप में देखा-माना जाता है। अगर एक जिम्मेदार नेता इस तरह के झूठ से सुर्खियां बटोरे और विवादों को जन्म दे तो इससे ज्यादा शर्मनाक क्या हो सकता है!

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