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जनसत्ता संपादकीय : मौत के धागे

इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी कि किसी का मनोरंजन या खेल दूसरों के लिए जानलेवा साबित होने लगे।

Author नई दिल्ली | August 18, 2016 3:49 AM
बहुत सारे लोग इसके खतरों से वाकिफ हैं। हालांकि, सस्‍ते और मजबूत होने की वजह से इसका लगातार इस्‍तेमाल कर रहे थे। (FILE PHOTO)

इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी कि किसी का मनोरंजन या खेल दूसरों के लिए जानलेवा साबित होने लगे। पतंगबाजी के शौक ने यह हालत कर दी है कि सड़क से गुजरते किसी व्यक्ति की जान कैसे और कब चली जाए, इसका पता नहीं होता। दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस और इसके आसपास के दिनों में जितने बड़े पैमाने पर लोग पतंग उड़ाते हैं, वह इस दिन को निश्चित रूप से एक उत्सव की शक्ल देता है। लेकिन खुशी मनाने या मनोरंजन का यह तरीका आज कई लोगों की जान ले रहा है। गौरतलब है कि मंगलवार को जब देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा था और लोग पतंग उड़ा रहे थे तो इस खुशी के बीच किसी काम से सड़क पर निकले परिवारों में से दो ने अपने मासूम बच्चे हमेशा के लिए खो दिए, क्योंकि किसी की पतंग के धागे ने उन बच्चों का गला रेत दिया। इसके अलावा, देश भर में कई इलाकों से पतंग के मांझा चढ़े धागे से कट कर मौत और कई लोगों के घायल होने की खबरें हैं। दरअसल, एक-दूसरे की पतंग काटने के मकसद से लोग पहले सामान्य धागों की जगह सीसे का मांझा चढ़े धागे इस्तेमाल करते थे। अब वही धागा नायलॉन और चीनी मांझे से तैयार किया जा रहा है, जो मनुष्यों, बल्कि पक्षियों की भी जान ले रहा है। मंगलवार को इस धागे से घायल लगभग चार सौ परिंदे पक्षियों के अस्पताल में पहुंचाए गए थे। चीनी मांझे से पैदा खतरे के मद्देनजर इस पर लगाम लगाने की मांग लंबे समय से हो रही थी। मगर विचित्र है कि सरकारों की नींद तभी खुलती है जब कुछ लोगों की जान चली जाए और चारों ओर इसके खिलाफ आवाज उठने लगे। खबरों के मुताबिक दिल्ली के उपराज्यपाल ने राजधानी में नौ अगस्त को ही चीनी मांझे पर रोक लगाने की मंजूरी दे दी थी। पर इस मामले में दिल्ली सरकार टालमटोल करती रही।

सवाल है कि पतंग के धागे पर चढ़े मांझे से कई लोगों की जान जाने के मामले के तूल पकड़ने पर दिल्ली सरकार ने जिस तरह चीनी मांझे वाले धागे पर पाबंदी लगाई है, क्या यह कदम पहले नहीं उठाया जा सकता था? अगर यह फैसला कुछ दिन पहले किया गया होता तो स्वतंत्रता दिवस के दिन दो मासूम बच्चों सहित एक अन्य व्यक्ति की जान शायद नहीं जाती। मगर चीनी मांझे पर पाबंदी को लेकर बार-बार आवाज उठाने के बावजूद सरकार ने यह धागा खुलेआम बेचने पर रोक लगाना जरूरी नहीं समझा। नतीजतन, किसी का मनोरंजन दूसरे के लिए मौत का खेल बनता गया। जबकि इस मसले पर दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने यहां की सरकार और नागरिक निकायों से कहा था कि वे पतंग उड़ाने को लेकर दिशा-निर्देश जारी करें और लोगों को जागरूक किया जाए कि प्लास्टिक, सीसे के लेप वाले धागे और चीनी मांझा कितने खतरनाक और जानलेवा हैं। इसके खतरे के मद्देनजर ही कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में चीनी मांझे पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है। कोई भी सरकार अगर नागरिकों की जान को लेकर फिक्रमंद होगी तो वह मनोरंजन को जानलेवा बनाने की इजाजत नहीं देगी। चीनी मांझे पर रोक लगाने में काफी देर हो चुकी है। अब सरकार को इस पर सख्ती से अमल सुनिश्चित करना चाहिए।

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