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सुविधा की सड़क

महानगरों में सड़कों पर आए दिन लगने वाले जाम और उसकी वजह से पर्यावरणीय और आर्थिक नुकसान की खबरें आती रहती हैं। लेकिन हरियाणा के गुड़गांव..

Author नई दिल्ली | September 24, 2015 1:55 AM

महानगरों में सड़कों पर आए दिन लगने वाले जाम और उसकी वजह से पर्यावरणीय और आर्थिक नुकसान की खबरें आती रहती हैं। लेकिन हरियाणा के गुड़गांव में कार-मुक्त दिवस पर हुई पहल से जाहिर है कि सरकार से लेकर समाज तक के एक बड़े हिस्से ने सड़कों पर वाहनों की बढ़ती तादाद की वजह से गंभीर होती समस्या की बुनियादी वजह को समझा है। गौरतलब है कि बाईस सितंबर को दुनिया भर में कार-मुक्त दिवस मनाया जाता है। इसी नक्शे-कदम पर चलते हुए मंगलवार को गुड़गांव में पहली बार काफी तादाद में लोगों ने हिस्सा लिया और उत्साह से साइकिल का इस्तेमाल किया। इस खास दिवस की घोषणा के बाद गुड़गांव में आम दिनों में जितनी कारें सड़कों पर निकलती हैं, उसके मुकाबले पच्चीस से तीस फीसद कम निकलीं। सिर्फ इतनी कारों के न निकलने की वजह से सड़कों पर बोझ कम था।

नतीजतन, जाम की संभावना भी कम हुई। वाहनों के बोझ से ठहरी हुई सड़कों के मामले में देश के दूसरे बड़े शहरों की हालत छिपी नहीं है। खासकर दिल्ली में जाम एक तरह से रोजमर्रा की समस्या है। एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली की सड़कों पर रोज लगभग चौदह सौ नई कारें उतरती हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि पहले से मौजूद वाहनों की वजह से ठहरी हुई दिल्ली में ये कारें जाम की समस्या में और कितना इजाफा करती होंगी। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन की हालत इतनी दयनीय है कि कई बार लोग न चाहते हुए भी कहीं आने-जाने के लिए कारों का इस्तेमाल करते हैं। दिल्ली में फिलहाल कम से कम ग्यारह से बारह हजार सार्वजनिक बसों की जरूरत है। लेकिन इसकी करीब आधी बसें ही मौजूद हैं। अगर यहां मेट्रो ट्रेन की सुविधा न होती तो सड़क परिवहन पर पड़ने वाले दबाव की कल्पना की जा सकती है।

कारों के चलते गहराती समस्या के मद्देनजर दुनिया के अनेक देशों में कई इलाकों को कार-मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया है और आसपास या कम दूरी के सफर के लिए साइकिल के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन सच यह है कि एक ओर चीन या हांगकांग में साइकिल लोगों की पहली पसंद है, वहीं हमारे यहां कार में चलने को हैसियत से जोड़ कर देखा और साइकिल पर चलने वालों को कमतर माना जाता है। हालत यह है कि ऐसे अनेक परिवार हैं, जिनमें एक से ज्यादा और कई बार चार या पांच कारें भी देखी जा सकती हैं। लेकिन कार के इस शौक के चलते सड़कों की जो हालत हो चुकी है, अगर उस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वक्त में घर से बाहर निकलना दूभर हो जाएगा। आज भारत के ज्यादातर महानगरों में अगर आधे घंटे का सफर तय करने में अक्सर एक या दो घंटे लग जाते हैं तो इसका एक कारण बेशक बेतरतीब या अराजक तरीके से वाहन चलाना है। लेकिन सड़कों पर जितने वाहन होते हैं, उनमें किस तरह के वाहनों की तादाद और जाम में उनकी भूमिका कितनी है, इसे ध्यान में रखे बगैर इस व्यापक और जटिल हो चुकी समस्या से निपटना मुश्किल होगा।

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