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संपादकीयः मदद की दरकार

कोरोना से जंग के लिए राज्यों ने अपने स्तर पर वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए वेतन में कमी करने जैसे कदम उठाए हैं। राजस्थान सरकार ने अपने मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के वेतन का बड़ा हिस्सा स्थगित करने का फैसला किया है।

Author Published on: April 3, 2020 11:57 PM
देश के सभी राज्यों को महामारी से निपटने के लिए भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

कोरोना महामारी से निपटने के लिए चिकित्सा कर्मियों, पुलिस-प्रशासन, सेना, अर्धसैनिक बलों सहित एक सुव्यवस्थित और विशालकाय तंत्र के साथ-साथ पैसे की भी जरूरत है। इस विपत्ति से निकलने के लिए हालांकि केंद्र सरकार ने अपने स्तर पर प्रयास किए हैं और तात्कालिक राहत के तौर पर पिछले दिनों करीब पौने दो लाख करोड़ रुपए का पैकेज भी जारी किया। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है, यह सरकार भी समझ रही है। यह पैकेज फौरी जरूरतें ही पूरी करेगा। पर महामारी से एक नहीं, कई स्तरों पर मुकाबला करना है। अचानक आई इस विपदा के सामने राज्य सरकारों के हाथ-पैर फूलना स्वाभाविक हैं। इसीलिए गुरुवार को प्रधानमंत्री के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने आर्थिक मदद की गुहार लगाई। राजस्थान, पश्चिम बंगाल, पंजाब, तेलंगाना, महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने प्रधानमंत्री से कहा कि केंद्र जल्द ही उनके बकाए का भुगतान करे और राज्यों के लिए विशेष पैकेज भी जारी करे।

हालांकि इस तरह की मांग करने वाले राज्यों में विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्य प्रमुख हैं। लेकिन अभी पक्ष-विपक्ष की राजनीति से दूर रह कर मदद पर गौर करने की आवश्यकता है और सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। इस वक्त देश के सभी राज्यों को महामारी से निपटने के लिए भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं कि पैसे के अभाव में राज्य कोरोना से नहीं निपट पाएंगे। सामान्य परिस्थितियों में केंद्र और राज्यों के बीच बकाया रकम का लेनदेन एक सामान्य प्रक्रिया के तहत चलता रहता है और कोई मुद्दा नहीं बनता। लेकिन अब राज्यों की मुट्ठी तंग है। सबके सामने पहाड़ जैसा संकट है। इस वक्त सबसे बड़ा काम कोरोना संदिग्धों की पहचान, व्यापक स्तर पर लोगों की जांच और संक्रमित मरीजों का इलाज है, ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके। पश्चिम बंगाल ने केंद्र से आर्थिक मदद के रूप में ढाई हजार करोड़ रुपए और बकाया के रूप में पचास हजार करोड़ रुपए मांगे हैं। पंजाब ने भी केंद्र से अपने हिस्से के साठ हजार करोड़ रुपए देने को कहा है। महाराष्ट्र सरकार पच्चीस हजार करोड़ रुपए मांग रही है, जिसमें अठारह हजार करोड़ जीएसटी के हैं। केंद्रीय करों में से एक हिस्सा केंद्र राज्यों को देता है। लेकिन पिछले कुछ समय से कई राज्यों को उनका बकाया मिल नहीं पाया है।

कोरोना से जंग के लिए राज्यों ने अपने स्तर पर वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए वेतन में कमी करने जैसे कदम उठाए हैं। राजस्थान सरकार ने अपने मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के वेतन का बड़ा हिस्सा स्थगित करने का फैसला किया है। इतना ही नहीं, पेंशनभोगियों को भी तीस फीसद कम पेंशन मिलेगी। महाराष्ट्र में भी मंत्रियों और विधायकों को साठ फीसद कम वेतन मिलेगा। महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन में भी पचास से पच्चीस फीसद की कमी की गई है। तेलंगाना सरकार भी आइएएस, आइपीएस अधिकारियों को साठ फीसद कम वेतन देगी। राज्य सरकारें ये कदम इसलिए उठा रही हैं, क्योंकि कोरोना पीड़ितों की तादाद बढ़ने का खतरा है। ऐसे में पीड़ितों के इलाज और चिकित्सा कर्मियों के लिए बचाव के जरूरी सामान खरीदे जाने हैं। पूर्ण बंदी की वजह से राज्यों में ठप पड़ गए उद्योग-धंधों को मदद देनी है। वेतन-भत्तों की मद में हजारों करोड़ रुपए खर्च होते हैं। ऐसे में सरकारों के सामने हालात सामान्य होने तक ऐसे कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प भी नहीं रह जाता है।

 

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