jansatta Editorial attack strings, Defense Minister Nirmala Sitharaman attributed Pakistan to Sunjwan attack - संपादकीय: हमले के तार - Jansatta
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संपादकीय: हमले के तार

निर्मला सीतारमण का इशारा जैश से भी आगे है, उनका संकेत आइएसआइ की तरफ है, और शायद इसी बिना पर उन्होंने सुंजवान हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेवार ठहराया है। और इसी के साथ उन्होंने यह भी जोड़ा है कि पाकिस्तान को आतंकी हमले के सबूत दिए जाएंगे और माकूल जवाब भी।

Author February 14, 2018 3:12 AM
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण। (PTI File Photo by Subhav Shukla)

रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने सुंजवान हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया है। अगर देश की रक्षामंत्री यह बात कह रही हैं तो जरूर उसका कुछ आधार होगा। यों पाकिस्तान पहले ही, सुंजवान हमले के पीछे अपना कोई हाथ होने से इनकार कर चुका है। निर्मला सीतारमण का बयान पाकिस्तान के इस इनकार के एक रोज बाद आया। उन्होंने यह भी कहा कि सारे सबूत पाकिस्तान को सौंपे जाएंगे। सेना का कहना है कि सुंजवान हमले को जैश-ए-मोहम्मद ने अंजाम दिया। जैश का सरगना मसूद अजहर है जिसका नाम अमेरिका ने भी आतंकियों की अपनी सूची में डाल रखा है, लेकिन जिसे सुरक्षा परिषद के जरिए वैश्विक आतंकी घोषित करवाने के भारत के प्रयासों पर चीन कई दफा पानी फेर चुका है।

निर्मला सीतारमण का इशारा जैश से भी आगे है, उनका संकेत आइएसआइ की तरफ है, और शायद इसी बिना पर उन्होंने सुंजवान हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेवार ठहराया है। और इसी के साथ उन्होंने यह भी जोड़ा है कि पाकिस्तान को आतंकी हमले के सबूत दिए जाएंगे और माकूल जवाब भी। अलबत्ता जवाब किस प्रकार का होगा यह उन्होंने साफ नहीं किया।सुंजवान में फिदायीन हमले के बहत्तर घंटों के भीतर ही आतंकियों ने सोमवार की सुबह श्रीनगर के कर्णनगर इलाके में सीआरपीएफ की तेईसवीं बटालियन पर हमला कर दिया। लेकिन सतर्क सुरक्षा बलों ने हमलावरों की साजिश नाकाम कर दी। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा ने ली है। जैश और लश्कर पाकिस्तान की जमीन से ही संचालित होते हैं। क्या उनके अड्डों के बारे में पाकिस्तान की पुलिस, फौज और खुफिया एजेंसियों को पता नहीं होगा? फिर, ये संगठन कैसे न सिर्फ अपना वजूद कायम रखते हैं बल्कि आतंकवादी प्रशिक्षण और गतिविधियां भी चलाते रहते हैं? यही नहीं, मसूद अजहर और हाफिज सईद जैसे इनके सरगना बेहद संगीन आपराधिक धाराओं के आरोपी होते हुए भी कैसे खुलेआम विचरण करते हैं और खूब चंदा भी इकट्ठा कर लेते हैं? यह सब यही बताता है कि इन पर नकेल कसने के लिए या तो पाकिस्तान का इरादा नहीं है या कम से कम वह संजीदा नहीं है, भले दुनिया का ध्यान बंटाने की कोशिश में वह कुछ भी कहता रहे। अब सवाल है कि आतंकी हमलों के तार पाकिस्तान से जुड़े होने के सबूत पाकिस्तान को सौंपने से क्या हासिल होगा? 2008 में मुंबई में हुए हमले की बाबत ढेर सारे सबूत पाकिस्तान को सौंपे गए थे। उन पर पाकिस्तान ने क्या किया? अब तक कुछ भी ठोस नहीं।

पठानकोट में हुए आतंकी हमले की बाबत मिले सबूतों को उसने सिरे से खारिज कर दिया था। लिहाजा, सहज ही यह सवाल उठता है कि जिन ताजा सबूतों को पाकिस्तान को सौंपने की बात रक्षामंत्री ने कही है, क्या उन्हें भी पाकिस्तान ढिठाई से नकार नहीं देगा? इसलिए ऐसे सबूतों की ज्यादा उपयोगिता अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने इन्हें पेश किए जाने में है। इससे भारत अगर कोई कड़ी कार्रवाई करेगा तो उसका औचित्य साबित करने की भूमिका पहले से ही बन चुकी होगी। विडंबना यह है कि ताजा हमले ऐसे वक्त हुए हैं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कुछ समय से आतंकवाद पर पाकिस्तान को लगातार चेतावनी देते रहे हैं। ऐसा लगता है कि अमेरिका की ज्यादा दिलचस्पी पाकिस्तान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क पर शिकंजा कसने में है जो अफगानिस्तान में उसके लिए मुश्किल खड़ी करते हैं। इसलिए भारत को पाकिस्तान पर ट्रंप के दबाव से सकारात्मक परिणाम निकलने की ज्यादा आस बांधने के बजाय अपनी रणनीति पर अधिक ध्यान देना चाहिए, जिसका पहला तकाजा है सीमापार से घुसपैठ रोकने के उपायों को और पुख्ता करना।

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