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संपादकीय: मुसीबत में कामगार

सऊदी की जेलों में बंद सभी लोग हिमाचल प्रदेश के निवासी हैं। वे एक एजेंसी के माध्यम से वहां गए थे। उस एजेंसी ने इन लोगों को पर्यटक वीजा पर भेज दिया।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (एक्सप्रेस फोटोः अनिल शर्मा)

विदेशों में नौकरी का आकर्षण हमारे यहां कुछ ऐसा है कि हर युवा बाहर जाने का ख्वाब पाले रहता है, चाहे वह अच्छी-खासी डिग्री हासिल किए हो या फिर कम पढ़ा-लिखा। इसकी एक वजह तो यह है कि यहां रोजगार के अवसर कम हैं। फिर बहुत सारे लोगों को उनके काम की जो कीमत मिलती है, उसमें बड़ी मुश्किल से उनके परिवार का गुजारा चल पाता है। इसी का फायदा उठाते हुए अनेक लोगों ने दूसरे देशों में नौकरी दिलाने वाली एजेंसियां खोल ली हैं। वे मोटी रकम वसूलते और फर्जी कागजात, वीजा वगैरह बना कर युवाओं को विदेश भेज देते हैं। ऐसी कबूतरबाजी में कुछ नामचीन लोग भी शामिल पाए गए हैं। हालांकि सरकार लगातार विज्ञापनों आदि के जरिए युवाओं को आगाह करती रहती है कि वे बिना पंजीकरण के दूसरे देशों में रोजगार के लिए न जाएं। पर इस अपील का अपेक्षित असर नहीं दिखता। यही वजह है कि आए दिन किसी देश में भारतीय कामगारों के फंसे होने की खबरें आती रहती हैं, जिन्हें निकालने के लिए विदेश मंत्रालय को हस्तक्षेप करना पड़ता है। सऊदी अरब की जेलों में बंद बारह भारतीयों का समाचार भी उसी की एक कड़ी है। इन बारह लोगों के अलावा दो लोग और वहां की किसी कंपनी में काम कर रहे हैं, जो उन्हीं की तरह वहां भेजे गए हैं।

सऊदी की जेलों में बंद सभी लोग हिमाचल प्रदेश के निवासी हैं। वे एक एजेंसी के माध्यम से वहां गए थे। उस एजेंसी ने इन लोगों को पर्यटक वीजा पर भेज दिया। उनके पास काम का वीजा नहीं था, इसलिए पर्यटक वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अब हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने केंद्रीय विदेश मंत्री से उन्हें वापस लाने की गुहार लगाई है। यह पहली घटना नहीं है, जब सऊदी अरब में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए विदेश मंत्रालय को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। ऐसी भी घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें सीरिया जैसी जगहों पर भारतीय नागरिक चरमपंथी गुटों की गोलियों का शिकार हुए। मगर इन घटनाओं से युवाओं ने शायद कोई सबक लेना जरूरी नहीं समझा। सरकार की बार-बार अपील और कबूतरबाजों के खिलाफ कड़े कदम उठाने के बावजूद फर्जी कागजात के जरिए विदेश जाने या भेजे जाने का सिलसिला नहीं रुक पाया है। इससे एक बार फिर यही रेखांकित हुआ है कि सरकार को फर्जी कागजात पर लोगों को विदेश भेजने वाली एजेंसियों पर नकेल कसने के पुख्ता इंतजाम करने के अलावा जागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।

काम दिलाने वाली कंपनियां प्राय: उन्हीं लोगों को फर्जी कागजात पर विदेश भेजने में कामयाब होती हैं, जो कम पढ़े-लिखे हैं। सऊदी अरब में खेतिहर मजदूर से लेकर घरेलू कामकाज, प्लंबर आदि के रूप में काम आसानी से मिल जाता है। इसकी एवज में उन्हें पैसे भी भरपूर मिलते हैं। इसलिए वहां जाने वालों की संख्या अधिक होती है। मगर वहां कानून इतने सख्त हैं कि वीजा आदि संबंधी नियमों की अवहेलना पर कठोर दंड दिया जाता है। अक्सर सऊदी में काम दिलाने वाली एजेंसियां या मालिक वहां काम करने गए लोगों के पासपोर्ट वगैरह अपने पास रख लेते हैं और एक तरह से उनके साथ बंधुआ मजदूर की तरह व्यवहार करते हैं। इस तरह उनकी जिंदगी जहालत भरी हो जाती है। सो, लोगों को भी समझने की जरूरत है कि जब भी काम के लिए विदेश जाएं, सही तरीके से जाएं।

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