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संपादकीय: विराट कीर्तिमान

क्रिकेट में विराट कोहली ने ऐसा ही कारनामा कर दिखाया, जब उन्होंने अपने वरिष्ठ खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर के नाम लंबे समय से कायम रिकॉर्ड को न केवल तोड़ा, बल्कि रन, शतक, अर्धशतक और औसत के मामले में प्रदर्शन की कसौटी पर भी उनसे बेहतर साबित हुए।

Author October 26, 2018 2:06 AM
कोहली ने इसके अलावा सबसे कम पारियों में स्वदेश में 4000 रन और वेस्ट इंडीज के खिलाफ सर्वाधिक रन के दो अन्य रेकार्ड भी अपने नाम लिखवाए जो अब तक तेंदुलकर के नाम पर दर्ज थे।

अगर कहें कि कोई भी कीर्तिमान अंतिम नहीं होता, तो शायद अतिशयोक्ति नहीं होगी। हालांकि किसी भी क्षेत्र में जब कोई बड़ा रिकॉर्ड बनता है, तो कम से कम उस समय यह मान लिया जाता है कि इससे पार पाना किसी के लिए भी मुश्किल होगा। कई मामलों में ऐसा होता भी है। लेकिन यह भी सच है कि देर-सबेर कोई न कोई ऐसा व्यक्ति संबंधित क्षेत्र में कायम रिकॉर्ड से बेहतर प्रदर्शन करता है और इस तरह एक नया रिकॉर्ड बन जाता है। बुधवार को क्रिकेट में विराट कोहली ने ऐसा ही कारनामा कर दिखाया, जब उन्होंने अपने वरिष्ठ खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर के नाम लंबे समय से कायम रिकॉर्ड को न केवल तोड़ा, बल्कि रन, शतक, अर्धशतक और औसत के मामले में प्रदर्शन की कसौटी पर भी उनसे बेहतर साबित हुए। वेस्टइंडीज के साथ दूसरा एकदिवसीय मैच यों तो बराबरी पर खत्म हुआ, लेकिन इसमें विराट जिस तरह खेले, वह लंबे समय तक याद रखा जाएगा। पर इसमें अहम रहा सबसे तेज दस हजार रन के लक्ष्य को पूरा करना। इस तरह वे एकदिवसीय मैचों में दस हजार रन पूरे करने वाले दुनिया के तेरहवें और भारत के पांचवें बल्लेबाज बन गए।

गौरतलब है कि उनसे पहले सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और महेंद्र सिंह धोनी ने एकदिवसीय मैचों में दस हजार रन पूरे किए हैं। पर जब तुलनात्मक विवेचन होता है तो हर कोण से बनाए गए रनों का आकलन किया जाता है। इस लिहाज से देखें तो सचिन तेंदुलकर ने जहां दो सौ उनसठ पारियों में दस हजार रन का मुकाम हासिल किया था, वहीं बाकी खिलाड़ियों के मैचों की संख्या इससे ज्यादा थी। मगर विराट कोहली को रनों के इस आंकड़े तक पहुंचने के लिए महज दो सौ पांच पारियों की जरूरत पड़ी। इस लिहाज से देखें तो विराट कोहली के ताजा रिकॉर्ड को ज्यादा अहमियत मिलेगी, क्योंकि इस शिखर को नापने में उनकी गति सबसे तेज रही। यों वेस्टइंडीज के साथ मैच में अपने जिस जाने-माने अंदाज में वे खेल रहे थे, उससे उनके प्रशंसकों को यह अंदाजा था कि वे इसी मैच में अपना मुकाम हासिल कर लेंगे। लेकिन क्रिकेट को जिस तरह अनिश्चितताओं का खेल कहा गया है, उसमें एक मामूली चूक अगले मैच तक का इंतजार करने पर मजबूर कर दे सकती थी। मगर कोहली ने आखिर इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं दिया।

यह सही है कि विराट कोहली की ताजा उपलब्धि को जितना रनों के लिए याद किया जाएगा, उससे ज्यादा रन बनाने की उनकी गति पर गौर किया जाएगा। पर इसे ऐसे भी देखा जा सकता है कि पिछले कुछ सालों में जब से क्रिकेट प्रतियोगिताओं में कम अवधि के मैचों का जोर बढ़ा है, उसमें इस खेल की गति भी बढ़ी है। कम ओवरों में ज्यादा रन बनाने और विपक्षी टीम के सामने चुनौती रखने के अलावा आइपीएल जैसी प्रतियोगिताओं की वजह से भी तेजी से ज्यादा से ज्यादा रन बनाने को ही इस खेल का लक्ष्य बना दिया गया है। इसी के अनुरूप खिलाड़ियों के खेलने का अंदाज भी बदला है। ऐसे में विराट कोहली ने अपने भीतर मौजूद क्षमताओं का भरपूर फायदा उठाया और नतीजतन रन बनाने की उनकी भूख ने उन्हें एक नया मुकाम दे दिया। निस्संदेह उनके साथ-साथ यह क्रिकेट के प्रशंसकों के लिए भी खुश होने का मौका है।

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