ताज़ा खबर
 

संपादकीय: माल्या पर शिकंजा

भारत में चल रही कार्यवाही से भी माल्या को झटका लगा है। दिल्ली की एक अदालत में बेंगलुरु पुलिस की तरफ से दी गई सूचना के मुताबिक माल्या की एक सौ उनसठ संपत्तियों की पहचान हो चुकी है, अलबत्ता उनकी कुर्की नहीं की जा सकी है। जबकि अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय के आवेदन पर ही संपत्तियां कुर्क करने का आदेश दिया था।

Author July 7, 2018 3:18 AM
शराब कारोबारी माल्या आजकल ब्रिटेन में हैं, जहां वह प्रत्यपर्ण मामले की सुनवाई का सामना कर रहे हैं। (फोटोः पीटीआई/एपी)

ब्रिटेन के एक हाइकोर्ट ने गुरुवार को जो फैसला सुनाया उससे भारत के उन तेरह बैंकों ने राहत की सांस ली होगी, जिन्होंने शराब कारोबारी विजय माल्या को कर्ज दे रखा है, पर वसूली में नाकाम रहे हैं। नौ हजार करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी और काला धन सफेद करने का आरोपी माल्या फरार है और ब्रिटेन में रह रहा है। भारत सरकार उसका प्रत्यर्पण चाहती है, पर वह भारतीय एजेंसियों की ओर से दाखिल प्रत्यर्पण की अर्जी का विरोध करता रहा है। ब्रिटिश हाइकोर्ट ने प्रवर्तन अधिकारी और उसके एजेंटों को लंदन के पास हर्टफोर्डशायर में स्थित माल्या की संपत्तियों में प्रवेश करने और तलाशी लेने की इजाजत दे दी है। एजेंटों को बल प्रयोग का भी अधिकार होगा और प्रवर्तन अधिकारी जांच के दौरान पुलिस की भी मदद ले सकेंगे। अगर जरूरत हुई तो इन संपत्तियों को बेच कर बैंकों का कर्ज चुकाया जा सकता है। यह आदेश बहुत जरूरी था, और यह भारतीय अदालतों के इस रुख की पुष्टि करता है कि कर्ज देने वाले बैंक को अपना बकाया वसूलने का अधिकार है।

HOT DEALS
  • Gionee X1 16GB Gold
    ₹ 8990 MRP ₹ 10349 -13%
    ₹1349 Cashback
  • Lenovo Phab 2 Plus 32GB Champagne Gold
    ₹ 17999 MRP ₹ 17999 -0%
    ₹900 Cashback

इधर भारत में चल रही कार्यवाही से भी माल्या को झटका लगा है। दिल्ली की एक अदालत में बेंगलुरु पुलिस की तरफ से दी गई सूचना के मुताबिक माल्या की एक सौ उनसठ संपत्तियों की पहचान हो चुकी है, अलबत्ता उनकी कुर्की नहीं की जा सकी है। जबकि अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय के आवेदन पर ही संपत्तियां कुर्क करने का आदेश दिया था। अब निदेशालय ने नई संपत्तियों की पहचान की जरूरत बता कर और मोहलत मांग ली है। दरअसल, यह माल्या के खिलाफ विदेशी मुद्रा विनिमय अधिनियम के उल्लंघन का मामला है, क्योंकि उसने अपनी किंगफिशर एअरलाइंस के प्रमोशन की खातिर ब्रिटेन में फार्मूला वन रेस के लिए दो लाख पाउंड दिए थे, पर नियमों को ताक पर रख कर। चूंकि कर्ज लेकर न चुकाने का माल्या का मामला काफी चर्चित हो चुका है और इस पर पूरे देश की नजर है, इसलिए याचिकाकर्ता बैंकों से लेकर जांच और अभियोजन एजेंसियों की सक्रियता साफ नजर आती है। लेकिन बड़ी-बड़ी राशि के कर्जों के बहुत सारे मामलों में हर स्तर पर सुस्ती और ढिलाई का आलम बना रहा है। नतीजतन बैंकों का एनपीए रिकार्ड स्तर पर पहुंच चुका है। इनमें सरकारी बैंकों की हालत ज्यादा खस्ता है।

दो-चार लाख का कर्ज देते समय भी सरकारी बैंक काफी सावधानी बरतते हैं, हर स्तर पर छानबीन करते हैं, बकाया वसूलने के लिए कुर्की-जब्ती तक सारे अधिकार इस्तेमाल करते हैं। पर सैकड़ों और हजारों करोड़ के बकाएदारों का कुछ नहीं बिगड़ता। वे लिये हुए कर्ज के ‘पुनर्गठन’ की मांग करते हैं, और अकसर यह मांग मंजूर कर उन्हें भारी छूट दे दी जाती है। यही नहीं, कई बड़े-बड़े बकायों की कभी वसूली नहीं हो पाती और उन्हें बट्टे खाते में डाल दिया जाता है। इससे बैंकों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है, उनकी कारोबारी क्षमता घट जाती है। फिर, बैंकों को सहारा देने के लिए सरकारी खजाने से यानी जनता के पैसे से हजारों करोड़ रुपए का पैकेज मंजूर किया जाता है। इसलिए बात माल्या तक सीमित नहीं है। एनपीए के रिकार्ड स्तर तक पहुंच जाने के दोषी और भी हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App