jansatta Editorial artical relief signs about Rainfall in India will be good on the basis of the Meteorological Assessment - संपादकीय : राहत के संकेत - Jansatta
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संपादकीय : राहत के संकेत

मौसम विभाग ने अब तक जो कुछ बताया है, वह उत्साहवर्धक है। खेती के लिहाज से सबसे ज्यादा उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, बिहार और पश्चिम बंगाल के किसानों को मानसून से ही आस होती है। इन राज्यों में पर्याप्तबारिश का मतलब अच्छी पैदावार है। मौसम विभाग ने बताया है कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में इस बार सौ फीसद बारिश होगी।

Author June 1, 2018 3:18 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर। (फोटोः एपी)

मानसून को लेकर अच्छी खबर है। मौसम विभाग ने अपने आकलन के आधार पर बताया है कि इस बार उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में बारिश अच्छी होगी। अच्छी बारिश से मतलब सौ फीसद बारिश से है। सबसे ज्यादा राहत भरी खबर यह इसलिए है कि खेती-किसानी के लिहाज से देश के प्रमुख और बड़े राज्य तकरीबन हर साल सूखे और कम बारिश की मार झेलते रहे हैं। नतीजा यह होता है कि पैदावार नहीं होती, फसलें चौपट हो जाती हैं। ज्यादातर किसान कर्ज में फंस जाते हैं और आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर होते हैं। सरकारें लाचार बनी रहती हैं और मानसून पर दोष मढ़ती रहती हैं। ऐसे में अगर मानसून मेहरबान हो जाए, तो किसान के लिए इससे बड़ी और अच्छी बात क्या हो सकती है! देश में महंगाई का रुख और ब्याज दरों का फैसला भी मानसून पर निर्भर करता है। इसलिए अगर सौ फीसद बारिश होगी, तो कई समस्याओं से निजात मिलेगी, ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए। केरल में वैसे इस बार मानसून एक जून को दस्तक देता, लेकिन तीन दिन पहले ही आ गया। कर्नाटक के तटीय जिलों में अच्छी बारिश हो रही है। यह अच्छे मानसून का संकेत माना जाना चाहिए।

मौसम विभाग ने अब तक जो कुछ बताया है, वह उत्साहवर्धक है। खेती के लिहाज से सबसे ज्यादा उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, बिहार और पश्चिम बंगाल के किसानों को मानसून से ही आस होती है। इन राज्यों में पर्याप्तबारिश का मतलब अच्छी पैदावार है। मौसम विभाग ने बताया है कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में इस बार सौ फीसद बारिश होगी। जबकि मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में निन्यानवे फीसद बारिश होने का अनुमान है। जुलाई में एक सौ एक और अगस्त में चौरानवे फीसद बारिश होने का अनुमान है। दरअसल, मौसम विभाग उपग्रहों से मिले आंकड़ों और सूचनाओं के विश्लेषण के आधार पर ही ऐसे अनुमान व्यक्त करता है। ऐसे में इनमें त्रुटि की संभावना भी बनी रहती है। मौसम विभाग ने इस बार अपने अनुमानों में नौ फीसद त्रुटि की बात कही है। इसलिए माना जाना चाहिए कि मौसम विभाग की भविष्यवाणी भले सौ फीसद सच न निकले, लेकिन एक सीमा तक उसके आकलन भी गलत नहीं जाएंगे। कुल मिलाकर हमेशा के मुकाबले मानसून बेहतर रहने की बात है।

देश के आर्थिक विकास की रफ्तार और दशा-दिशा भी काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है। आर्थिकी से मानसून का सीधा नाता यह है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में कृषि क्षेत्र की भागीदारी औसतन पंद्रह फीसद के करीब होती है। इसलिए कृषि क्षेत्र की स्थिति मजबूत होना जरूरी है और यह सिर्फ मानसून पर निर्भर करता है। मानसून अच्छा रहता है तो खरीफ फसलों की पैदावार भी अच्छी होती है और महंगाई की मार से बचा जा सकता है। कपास की पैदावार अच्छी रहने से इस पर आधारित उद्योगों को राहत मिलती है। कपड़ा उद्योग की रीढ़ ही कपास की पैदावार पर टिकी है। देश की ग्रामीण आबादी तो है ही कृषि और इससे जुड़े उद्योगों पर निर्भर। छब्बीस करोड़ से ज्यादा किसान सीधे इससे प्रभावित होते हैं। देश में कुल कृषि भूमि का करीब पचास फीसद हिस्सा केवल मानसूनी बारिश से सिंचता है। ऐसे में मानसून के अच्छा रहने के संकेत किसी खुशखबरी से कम नहीं हैं।

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