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आतंक बनाम आस्था

पिछले साल अनंतनाग में अमरनाथ से लौट रहे श्रद्धालुओं की बस पर आतंकी हमले में नौ लोग मारे गए थे। सबसे बड़ा हमला वर्ष 2000 में पहलगाम के एक आधार शिविर पर हुआ था, जिसमें तीस लोग मारे गए थे। 2001 में गुफा से उन्नीस किलोमीटर पहले गोलीबारी में बारह तीर्थयात्रियों और दो पुलिस अधिकारियों की मौत हो गई थी। इसके बाद 2002 में आतंकवादियों ने दो बार हमले किए थे।

Author Updated: November 5, 2019 10:28 AM
अमरनाथ में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

अमरनाथ यात्रा शुरू हो चुकी है। पहले जत्थे के तीन हजार तीर्थयात्री अमरनाथ दर्शन के लिए निकल पड़े हैं। यह बड़ी बात है कि घाटी में अशांति के बावजूद तीर्थयात्रियों में किसी तरह का खौफ नहीं है। अटूट आस्था ने इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ा दिया है। हालांकि खुफिया एजंसियों ने आतंकी हमलों की आशंका व्यक्त की है। मगर किसी भी हमले या घटना से निपटने के लिए इस बार सुरक्षा बलों और सरकार ने जो बंदोबस्त किए हैं, वे हर साल होने वाले सुरक्षा इंतजामों के मुकाबले ज्यादा कड़े हैं। इसलिए भी तीर्थयात्रियों का जोश बढ़ा हुआ है। इस बार अब तक दो लाख से ज्यादा लोग इस यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। पिछले साल आतंकी हमले के बावजूद करीब ढाई लाख श्रद्धालुओं ने अमरनाथ यात्रा की थी। जाहिर है, लोगों की आस्था के सामने आतंकी हमलों का खौफ भी बौना पड़ गया है। यह एक तरह से आतंकियों के लिए चुनौती जैसा भी है।

अमरनाथ यात्रा एक महत्त्वपूर्ण आयोजन है। यह आस्था की यात्रा तो है ही, साथ ही इसने अब धार्मिक पर्यटन का रूप भी ले लिया है। इसलिए पूरे दो महीने देश का ध्यान इस पर रहता है। जब से अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमले की घटनाएं हुई हैं, तब से यह यात्रा राज्य सरकार और सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। जैसे ही यात्रा का समय करीब आता है, आतंकी हमलों का अंदेशा बढ़ जाता है। इसलिए इस बार अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए कुछ ऐसे बंदोबस्त हैं, जो पहले नहीं किए जाते थे। पहली बार ऐसा हुआ है जब यात्रा में शामिल वाहनों की निगरानी के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी टैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन ट्रैकिंग चिपों की मदद से उन वाहनों पर नजर बनी रहेगी जो अमरनाथ तीर्थयात्रियों को लेकर जाते हैं। अगर काफिले का कोई वाहन भटक जाता है या पीछे रह जाता है तो इस चिप की मदद से उसका तत्काल पता लगा लिया जाएगा। इसके अलावा, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने पहली दफा विशेष मोटरसाइकिल दस्ता बनाया है जो काफिले के आगे चलेगा। इन मोटरसाइकिलों में जीवनरक्षक उपकरण हैं। जरूरत पड़ने पर ये छोटी एंबुलेंस के रूप में काम कर सकते हैं। इस तरह के कड़े सुरक्षा इंतजाम बता रहे हैं कि अमरनाथ यात्रा को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए राज्य प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

पिछले साल अनंतनाग में अमरनाथ से लौट रहे श्रद्धालुओं की बस पर आतंकी हमले में नौ लोग मारे गए थे। सबसे बड़ा हमला वर्ष 2000 में पहलगाम के एक आधार शिविर पर हुआ था, जिसमें तीस लोग मारे गए थे। 2001 में गुफा से उन्नीस किलोमीटर पहले गोलीबारी में बारह तीर्थयात्रियों और दो पुलिस अधिकारियों की मौत हो गई थी। इसके बाद 2002 में आतंकवादियों ने दो बार हमले किए थे। पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए श्रीअमरनाथ श्राइन बोर्ड ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए पिछले एक दशक में कई बड़े कदम उठाए हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद हर साल तीर्थयात्रियों की तादाद बढ़ रही है। जाहिर है, आतंकियों के हमले तीर्थयात्रियों के हौसले पस्त नहीं कर सकते। यह स्थानीय लोगों के लिए भी शुभ संकेत है, क्योंकि इस यात्रा से बहुत सारे लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी होती है। इस तरह इस यात्रा का निर्विघ्न पूरा होना आस्था के अलावा सह-अस्तित्व को बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।

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