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संपादकीय: अफवाह बनाम सूचना

वॉट्सऐप दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफार्मों में से एक है। भारत में इसके बीस करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं और भविष्य में यह संख्या और बढ़ेगी ही। वाट्सऐप ने सूचनाओं व छवियों-तस्वीरों के आदान-प्रदान से लेकर मनोरंजन तक एक बहुत आसान, सर्वसुलभ और तुरंता माध्यम के रूप में अपनी बेजोड़ जगह बना ली है।

Author July 6, 2018 2:02 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

सोशल मीडिया मंचों के जरिए फैलाई जाने वाली भ्रामक सामग्री और अफवाहों को लेकर सरकार की चिंता स्वाभाविक है। इन मंचों का दुरुपयोग किस खतरनाक हद तक पहुंच चुका है यह इसी से समझा जा सकता है कि वॉट्सऐप और फेसबुक पर वायरल हुई फर्जी सूचनाओं व संदेशों के कारण हाल में कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। महाराष्ट्र के धुले जिले में बच्चा चुराने के शक में भीड़ ने पांच लोगों को मार डाला; झारखंड में भी भीड़ ने बच्चा-चोरी के शक में सात लोगों की हत्या कर दी। इसके अलावा, और कई राज्यों में भी अफवाहें फैलाने और उनके घातक नतीजे सामने आए हैं। इन घटनाओं के मद््देनजर सरकार ने उचित ही तीन दिन पहले वॉट्सऐप को नोटिस जारी किया। सरकार ने कहा है कि लोगों को भड़काने वाले फर्जी संदेशों के आदान-प्रदान में वॉट्सऐप का दुरुपयोग अस्वीकार्य है; इसलिए अमर्यादित और नफरत फैलाने वाले संदेशों को फैलने से रोकने के लिए वाट्सऐप तत्काल कदम उठाए; वाट्सऐप अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकता।

वॉट्सऐप दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफार्मों में से एक है। भारत में इसके बीस करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं और भविष्य में यह संख्या और बढ़ेगी ही। वाट्सऐप ने सूचनाओं व छवियों-तस्वीरों के आदान-प्रदान से लेकर मनोरंजन तक एक बहुत आसान, सर्वसुलभ और तुरंता माध्यम के रूप में अपनी बेजोड़ जगह बना ली है। व्यक्तियों के स्तर पर तो इसका बहुत बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो ही रहा है, समूह बनाने तथा सामूहिक विचार-विमर्श और सामूहिक गतिविधियां चलाने में भी यह मददगार साबित हुआ है। पर किसी ने सोचा न होगा कि वॉट्सऐप का जानलेवा इस्तेमाल भी हो सकता है। बेशक, इसके लिए सिर्फ वॉट्सऐप को दोष नहीं दिया जा सकता। हमारे समाज में जो गैर-जिम्मेदारी, नागरिक बोध का अभाव, प्रतिशोध की भावना, नफरत फैलाने वाले निहित स्वार्थों की जैसी सक्रियता मौजूद है उसकी अभिव्यक्ति सोशल मीडिया मंचों पर भी होती रहती है। जब सूचना के माध्यम सीमित थे तो हर स्तर पर यह प्रबंध किया जा सकता था कि वे छन कर ही यानी प्रामाणिक होने पर ही लोगों के सामने आएं। लेकिन जहां हर व्यक्ति सूचना प्रदाता और सूचना प्रसारक हो, वहां प्रामाणिकता की छानबीन बहुत मुश्किल हो गई है। इसलिए सोशल मीडिया के मंच सूचना से ज्यादा झूठ, अर्धसत्य, भ्रम, अफवाह, चरित्र हननऔर विद्वेष फैलाने के माध्यम बन रहे हैं। क्या इस पर रोक लग सकती है?

वॉट्सऐप का कहना है कि इसके लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है; इसके लिए सरकार, नागरिक समूहों और प्रौद्योगिकी मंत्रालय को मिलकर काम करना पड़ेगा। खुद वॉट्सऐप कुछ तकनीकी उपाय करने जा रहा है; इससे पता चलेगा कि किसी ने कब संदेश लिखा और कब भेजा; संदेश भेजने वाले ने खुद लिखा है या अफवाह फैलाने के लिए भेजा गया है। दरअसल, उपयोगकर्ता संदेश या सूचना को लेकर सतर्कता बरतें, इसके लिए कई तकनीकी चिह्न और उपाय विकसित किए जा सकते हैं। लेकिन जहां संगठित और सुनियोजित रूप से झूठ और विद्वेष फैलाया जाता हो, वहां कार्रवाई को लेकर सरकार भी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती।

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