ताज़ा खबर
 

संपादकीय : मौत के सीवर

सीवर और नालों में सफाई के लिए उतरने वाले ये कर्मचारी या तो दम घुटने से मर जाते हैं या फिर जहरीली गैसों का शिकार हो जाते हैं।

Author May 18, 2018 3:47 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।(Express Photo by Manoj Kumar)

सीवर में सफाई के लिए उतरने वाले श्रमिकों की मौत की खबरें दहलाने वाली तो हैं ही, सरकार और समाज के माथे पर कलंक भी हैं। जब-तब खबर आ जाती है कि सीवर की सफाई करने उतरे मजदूर जिंदा नहीं निकल पाए। दो दिन पहले उत्तर प्रदेश के मथुरा में सीवर टैंक की सफाई करने नगर निगम के दो सफाई कर्मचारी उतरे थे। जैसे ही ये लोग सीढ़ी के सहारे सीवर में उतरे, बेहोश हो गए। अपने इन दो साथियों को बेहोश होता देख दो कर्मचारी बचाने के लिए उतरे। वे भी बेहोश हो गए। तब मौके पर मौजूद एक अन्य सफाई कर्मचारी ने शोर मचाया और वहां से गुजर रहे लोगों की मदद से अपने साथियों को निकालने की कोशिश की। तब तक इनमें से एक की मौत हो चुकी थी और तीन को बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया। जांच में पता चला कि इनमें से किसी भी सफाई कर्मचारी के पास सुरक्षा का ऐसा कोई बंदोबस्त नहीं था जिससे वह अपनी जान बचा पाता।

सीवर में होने वाली मौतें नगर निगम जैसे स्थानीय निकाय और प्रशासन की लापरवाही की पोल खोलती हैं। इससे पता चलता है कि सफाई कर्मचारियों को कितने जोखिम भरे और असुरक्षित हालात में काम करना पड़ता है। सीवर, नालों, कीचड़, दलदल जैसे खतरनाक स्थानों पर काम करना जान पर खेलने जैसा है। लेकिन शायद काम लेने वाले ठेकेदार या ठेका कंपनी को इससे कोई मतलब नहीं होता। दरअसल, इस तरह की घटनाएं पूरी तरह सुरक्षा-साधनों के अभाव की वजह से होती हैं। सबसे ज्यादा चिंताजनक तो यह है कि अब तक ऐसी जितनी भी घटनाएं हुई हैं, उनसे हमने आज तक कोई सबक नहीं सीखा। इसी का नतीजा है कि आए दिन सफाई कर्मचारी नालों-सीवरों में अपनी जिंदगी गंवा बैठते हैं।

सीवर और नालों में सफाई के लिए उतरने वाले ये कर्मचारी या तो दम घुटने से मर जाते हैं या फिर जहरीली गैसों का शिकार हो जाते हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अदालतों ने समय-समय पर ऐसी घटनाओं का संज्ञान लेते हुए अपने निर्देशों में कहा है कि सीवर की सफाई करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षा-उपकरण मुहैया कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। लेकिन ऐसे हादसों का सिलसिला जारी रहना यही बताता है कि नगर निगम जैसे निकाय और सीवरों की सफाई का ठेका लेने वाली कंपनियां अदालती आदेशों को ठेंगा दिखा रही हैं। कायदे से सीवर, नालों, सेप्टिक टैंकों की सफाई करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षा बेल्ट, गैस मास्क, हेलमेट, बॉडी सूट, खास तरह के जूते, दस्ताने, टॉर्च जैसे उपकरण दिए जाने जरूरी हैं। लेकिन गौरतलब है कि हादसे का शिकार हुए जिस सफाई कर्मचारी को भी सीवर से बेहोशी या मृत अवस्था में निकाला गया, वह नंगे बदन ही था, उसके पास सुरक्षा का इनमें से कोई सामान नहीं था। इससे पता चलता है कि सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर कितनी सजगता या गंभीरता बरती जाती है। सरकारें हर साल करोड़ों रुपए सफाई उपकरणों पर खर्च करने के दावे करती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि फिर सफाई कर्मचारी काम के दौरान मौत के मुंह में क्यों चला जाता है?

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App