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ताज की अनदेखी

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार को आए अभी छह महीने ही हुए हैं पर राज्य सरकार की दशा-दिशा ऐसी है कि इतने कम समय में ही उसने एक के बाद एक कई विवाद पैदा किए हैं।
Author October 4, 2017 00:56 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार को आए अभी छह महीने ही हुए हैं पर राज्य सरकार की दशा-दिशा ऐसी है कि इतने कम समय में ही उसने एक के बाद एक कई विवाद पैदा किए हैं। ताजा उदाहरण उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थलों की सूची से ताज महल को बाहर रखने का है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग ने बत्तीस पृष्ठों की एक पुस्तिका जारी की है जिसमें पर्यटकों के लिए आकर्षक स्थलों की सूची दी हुई है। इस सूची में मथुरा, वृंदावन के मंदिरों और काशी के घाटों समेत बहुत सारे धार्मिक व सांस्कृतिक स्थल तथा ऐतिहासिक धरोहर शामिल हैं। इसमें गोरखपुर के गोरख पीठ को भी जगह मिली है, जिसके महंत खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। इस सूची में बस ताज महल नदारद है, जो उत्तर प्रदेश ही नहीं, पूरे देश में पर्यटकों के लिए आकर्षक स्थलों में शीर्ष पर रहा है। सारी दुनिया से सैलानी ताज महल देखने आते रहे हैं। और क्यों न आएं, इसे विश्व के सात आश्चर्यों में से एक माना जाता है। उत्तर प्रदेश इस पर फख्र करता आया है कि ताज महल कहीं और नहीं, उसके पास है। इससे उसकी अर्थव्यवस्था को भी हमेशा सहारा मिला है। ऐसे में ताज महल को उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थलों की सूची से बाहर कर देना घोर हैरानी का विषय है। इसलिए विवाद उठना स्वाभाविक है।

विपक्ष की तमाम पार्टियों ने योगी सरकार के इस कदम को नितांत अनुचित और बेतुका करार दिया है। राज्य सरकार को जरूर अंदाजा रहा होगा कि इस तरह की प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। फिर, उसने ताज महल की अनदेखी क्यों की? शायद इसलिए कि वह उत्तर प्रदेश की एक ऐसी पहचान पेश करना चाहती होगी जिससे हिंदुत्व की उसकी राजनीति को बल मिले। लेकिन उसने यह कैसे मान लिया कि उसके इस कदम से सारे हिंदू खुश होंगे? ताज महल एक मुगल बादशाह ने अपनी बेगम की याद में मकबरे के तौर पर बनवाया था। ऐसे ऐतिहासिक स्मारक को उत्तर प्रदेश की शान माना जाए, यह शायद योगी सरकार और भाजपा को गवारा नहीं होगा। अलबत्ता विवाद उठने पर राज्य सरकार ने एक बयान जारी कर सफाई दी है कि पर्यटन परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित 370 करोड़ रुपए में से उसने 156 करोड़ रुपए ताज महल की देखरेख और उसके आसपास के इलाकों के विकास के लिए रखे हैं। लेकिन सवाल है कि फिर ताज महल के साथ ऐसा सलूक क्यों?

ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटक स्थलों को दुनिया में कहीं भी सांप्रदायिक या संकीण राष्ट्रवादी नजरिये से नहीं देखा जाता। इन्हें सारी मानव सभ्यता की उपलब्धि के रूप में देखा जाता है और ऐसे ही देखा जाना चाहिए। क्या हम चीन की दीवार या गीजा के पिरामिड या पीसा की मीनार से घृणा कर सकते हैं? ताज महल कहीं बाहर से नहीं लाया गया था, भारत में ही यहीं के पत्थरों से बना और भारत के ही स्थापत्य, कारीगरी और कला का बेमिसाल नमूना है। इसके निर्माण में जाने कितने हिंदू कारीगरों का भी योगदान रहा होगा। यह बेहद अफसोस की बात है कि ताज महल के मान मर्दन का प्रयास हो रहा है और वह भी मुट्ठी भर सिरफिरे लोगों द्वारा नहीं, बल्कि खुद उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा। क्या यह एक ऐसी दिशा में जाने की कोशिश है जिसमें इतिहास और संस्कृति से लेकर समूची मानवता की विरासत तक, सब कुछ का विवेक खो जाता है?

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  1. M
    manish agrawal
    Oct 4, 2017 at 8:24 am
    ताजमहल हिन्दोस्तान का सबसे अज़ीमुश्शान शाहकार है , जिसकी शोहरत का परचम सारी दुनिया में पिछले 400 साल से लहरा रहा है ! ताजमहल किसी उत्तरप्रदेश की हक़ीर सी हुकूमत के रहमोकरम का मोहताज़ नहीं ! किसी योगी आदित्यनाथ की क्या मज़ाल की ताजमहल का रुतबा जरा सा भी कम कर सके !
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    1. M
      manish agrawal
      Oct 4, 2017 at 8:23 am
      दिल्ली में भी बीजेपी की केंद्र सरकार है और उत्तरप्रदेश में भी बीजेपी ही है ! ऐसा मौका फिर कभी नहीं आएगा क्योंकि " काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ती " ! इसलिए बीजेपी वालों ! चूको मत ! दिल्ली के लाल किले , कुतब मीनार तथा आगरा के ताजमहल और आगरा फोर्ट पर बुलडोज़र चलवा दो ! ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी !
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      1. M
        manish agrawal
        Oct 4, 2017 at 8:22 am
        उत्तरप्रदेश की पर्यटन पुस्तिका में 2 पेज गोरखनाथ मंदिर पर खर्च किये गए हैं ! क्या योगी आदित्य नाथ , हिन्दोस्तान की जनता पर "नाथ सम्प्रदाय" थोपना चाहते हैं ? ताजमहल तो " वर्ल्ड हेरिटेज " की लिस्ट में शामिल है , ऐसे में उत्तरप्रदेश की पर्यटन विभाग की पुस्तिका में उसका जिक्र नहीं किये जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता !
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        1. M
          manish agrawal
          Oct 4, 2017 at 8:21 am
          अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने ताजमहल को देखा तो उनके मुँह से निकला था AMAZING, MARVELLOUS ! अब योगी आदित्यनाथ अमेरिकी पर्यटकों को ताजमहल के वजाय गोरखनाथ मंदिर घुमाएंगे तो बेचारे अमेरिकन अपना सिर पीट लेंगें !
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          1. M
            manish agrawal
            Oct 4, 2017 at 8:20 am
            ताजमहल ही हिन्दोस्तान की इकलौती ईमारत है , जिसकी प्रतिकृतियां बिकती हैं और करोड़ों रूपये का मार्किट है, जिसमे हज़ारों लोगों को रोज़गार मिला हुआ है ! देशी और विदेशी पर्यटक आगरा आता ही सिर्फ ताजमहल देखने के लिए ! यदि ताजमहल ना हो तो आगरा की हज़ारों करोड़ की पर्यटन से होने वाली income शून्य हो जायेगी !
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