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संपादकीय: अनसुनी चीखें

दिल्ली में रोंगटे खड़े कर देने वाली तीन घटनाएं घटी हैं। पश्चिमी दिल्ली के संतनगर में चौंतीस साल के एक सनकी युवक ने दिनहाड़े इक्कीस साल की युवती को कैंची से गोद-गोद कर मार डाला।

Author September 22, 2016 06:44 am
सीसीटीवी में कैद हुई लड़की को चाकू से गोदने की घटना (Photo Source: Youtube)

अपनी कुत्सित इच्छा थोपने में नाकाम सिरफिरों द्वारा महिलाओं और युवतियों की हत्या या उन्हें जख्मी करने की वारदातें लगातार बढ़ती जा रही हैं। ऐसे मामलों में अपराधियों की क्रूरता तो घोर चिंताजनक है ही, संवेदना से रिक्त होते समाज का व्यवहार भी विचलित करता है। पिछले चौबीस घंटों में दिल्ली में रोंगटे खड़े कर देने वाली तीन घटनाएं घटी हैं। पश्चिमी दिल्ली के संतनगर में चौंतीस साल के एक सनकी युवक ने दिनहाड़े इक्कीस साल की युवती को कैंची से गोद-गोद कर मार डाला। यह जघन्य हत्या सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। हत्याभियुक्त सेवानिवृत्त पुलिस सब-इंस्पेक्टर का बेटा है और एक कम्प्यूटर संस्थान चलाता है। युवती ने साल भर पहले इसके संस्थान से प्रशिक्षण लिया था और फिलहाल एक निजी स्कूल में शिक्षिका थी। आरोपी डेढ़ साल से उसका पीछा कर रहा था। कुछ दिनों पहले इसकी शिकायत भी पुलिस के पास पहुंची थी। लेकिन जैसा कि आमतौर पर होता है, यहां भी पुलिस का रवैया टालमटोल वाला ही रहा।

मंगलवार को युवती सुबह नौ बजे अपनी एक रिश्तेदार के साथ ड्यूटी पर जा रही थी तो आरोपी ने उस पर कैंची से हमला कर दिया और ढाई मिनट के भीतर ताबड़तोड़ बाईस बार कैंची घोंपी। युवती की मौके पर ही मौत हो गई। हमले के दौरान युवती को बचाने के लिए एक व्यक्ति आगे बढ़ा, मगर पीछे हट गया। इससे पहले, ठीक इसी तरह की एक घटना रविवार को घटी थी, जिसमें इंद्रपुरी इलाके में एक उन्मादी युवक ने एक महिला की चाकू गोदकर हत्या कर दी थी। दूसरी घटना मंगोलपुरी इलाके में हुई, जहां बातचीत बंद करने से बौखलाए एक युवक ने पड़ोस में रहने वाली युवती के घर जाकर उसे बालकनी से नीचे फेंक दिया। युवती के हाथ और पैर की हड्डी टूट गई और सिर में गंभीर चोटें आर्इं। एक और वारदात में, नंदनगरी इलाके में घरेलू झगड़े में आपा खोकर एक व्यक्ति ने अपने ससुर, साले और साढूÞ की हत्या कर दी तथा दो और को जख्मी कर दिया।

पहली दोनों घटनाएं, समाज में महिलाओं और युवतियों की इच्छाओं को सम्मान न देने की दूषित भावना की उपज हैं। साफ है कि इनमें आरोपी युवक, युवतियों के प्रति एक सनकभरा आकर्षण रखते थे और उन्हें अपनी हवस का शिकार बनाना चाहते थे। इस हवस को वे कहीं प्रेम तो कहीं शादी-प्रस्ताव का नाम देकर जायज ठहराने की कोशिश रहे थे। लेकिन जब युवतियों ने उनकी मनमर्जी को मानने से इनकार किया तो वे हिंसक हो उठे। बदले में उन बदमिजाज युवकों ने वही किया, जो एक सनकी अपराधी करता है। सनकी अपराधियों के बारे में मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्री से लेकर अपराध विशेषज्ञ तक शोध करते रहते हैं। लेकिन इसमें कानून-व्यवस्था के रक्षकों का भी बड़ा दोष है। आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं, लेकिन पुलिसतंत्र या कानून का खौफ अपराधियों के हौसले को कम नहीं कर पाता है? क्यों? क्या ऐसे अपराध सिर्फ समाजशास्त्र के ही विषय हैं? कानून-व्यवस्था आखिर तब किसे कहते हैं? एक बड़ा चिंतनीय पहलू आम लोगों के रवैए का भी है। ऐसी घटनाओं के वक्त वहां मौजूद लोगों के खामोश तमाशाई बने रहने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। बुराड़ी की घटना में एक व्यक्ति आगे बढ़ता है, फिर पीछे लौट जाता है। जबकि वहां ढेर सारे लोग मौजूद थे। उनमें से अगर दो-चार और लोगों ने हिम्मत बटोरी होती तो शायद युवती की जान बचाई जा सकती थी। आखिर हमारा समाज किधर जा रहा है!

 

 

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