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नापाक हरकत

पाकिस्तानी सेना ने एक बार फिर सारी मर्यादा ताक पर रखते हुए दो भारतीय सैनिकों के शवों को क्षत-विक्षत कर दिया।

jawanपाकिस्तान के हमले में सेना के नायब सुबेदार परमजीत सिंह और बीएसएफ के प्रेम सागर शहीद हुए थे।

पाकिस्तानी सेना ने एक बार फिर सारी मर्यादा ताक पर रखते हुए दो भारतीय सैनिकों के शवों को क्षत-विक्षत कर दिया। पिछले छह महीनोें में यह तीसरी घटना है जब पाकिस्तानी सेना ने धोखे से भारतीय सैनिकों पर वार किया और फिर उनके शवों के सिर धड़ से अलग कर दिए। पिछले एक साल से वह नियंत्रण रेखा पर लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन करती आ रही है, पर सैनिकों के सिर काटने की घटना उसकी बर्बता का चरम है। ताजा घटना में कश्मीर के पुंछ इलाके में नियंत्रण रेखा पर भारतीय सीमा के अंदर बारूदी सुरंग बिछी होने की खुफिया सूचना मिलने के बाद सेना और सीमा सुरक्षा बल का संयुक्त दस्ता निगरानी के लिए निकला था। पाकिस्तानी सेना मोर्टार से गोले दाग कर सेना का ध्यान बंटाने की कोशिश करती रही। ऐसे में भारतीय गश्ती दल सुरक्षा उपायों में उलझ गया, जिसका फायदा उठाते हुए पाकिस्तानी बॉर्डर एक्शन टीम ने उस पर धोखे से हमला किया और मारे गए दो सैनिकों के सिर धड़ से अलग कर दिए।

युद्ध के अपने नियम होते हैं। दो देशों के बीच दुश्मनी का मतलब यह नहीं होता कि उनकी सेनाएं किसी अपराधी गिरोह की तरह बर्ताव करने लगें। जिनेवा समझौते में स्पष्ट है कि युद्ध के दौरान भी एक देश के सैनिक को दूसरे देश के मारे गए, घायल या फिर बंदी बनाए गए सैनिक के साथ कैसा सलूक करना चाहिए, युद्ध के दौरान किन लोगों पर हमला नहीं करना चाहिए आदि। मगर पाकिस्तान की सेना उन नियम-कायदों और मर्यादाओं को भुला चुकी है तो उसकी बड़ी वजह यह है कि आतंकवादियों को शह देते-देते वह खुद भी उनका आचरण सीख गई है। घात लगा कर या धोखे से हमला सेना के लोग नहीं करते, अपराधी या आतंकवादी करते हैं। फिर एक सैनिक दुश्मन देश के मारे गए सैनिक का गला काट कर शव क्षत-विक्षत कर दे, यह न तो मानवीय तकाजा है और न एक सैनिक का धर्म। जैसा कि हर बार होता है, इस घटना के बाद भी पाकिस्तान की तरफ से खंडन आया है कि उसके सैनिकों ने इस जघन्य कृत्य को अंजाम नहीं दिया। जबकि अब यह छिपी बात नहीं है कि पाकिस्तानी सेना और आतंकवादियों के हमलों में फर्क नहीं रह गया है। कुछ दिनों पहले नियंत्रण रेखा के कुछ इलाकों का दौरा करने आए पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने जिस तरह कश्मीरियों को समर्थन देने का वादा किया उसे उनके सैनिकों ने किस रूप में लिया होगा, अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

यह भी महज संयोग नहीं माना जाना चाहिए कि जिस दिन नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सैनिकों पर हमला किया उसी दिन हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने पांच पुलिसकर्मियों और दो बैंक कर्मचारियों को मौत के घाट उतार दिया। अब दुनिया से यह छिपा नहीं है कि पाकिस्तान किस हद तक आतंकवादी संगठनों की मदद करता है। खासकर कश्मीर में अस्थिरता पैदा करने के लिए वहां के अलगाववादी संगठनों को लगातार उकसाता और सीमा पार से आतंकी घुसपैठ कराता रहता है। इसके लिए वहां की खुफिया एजेंसी भी लगातार काम करती है। जब से भारत के प्रयासों के चलते वह एक तरह से अलग-थलग पड़ता गया है, उसकी बौखलाहट बढ़ती गई है। पाकिस्तान की ऐसी नापाक हरकतों को रोकने के लिए भारत को ठोस रणनीतिक कदम उठाने ही पड़ेंगे, जिसमें कश्मीर में अमन बहाली की दिशा में भी समांतर काम चलना चाहिए।

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