Jansatta Editorial about The horrific incident of the closure of a child's class in a Delhi school - संपादकीय: लापरवाही की इंतहा - Jansatta
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संपादकीय: लापरवाही की इंतहा

स्कूल की तरफ से बच्चों को पिकनिक पर ले जाया जाना था। इसी आनन-फानन में किसी ने ध्यान नहीं दिया और एक बच्ची छूट गई, बाकी बच्चे निकल गए। कक्षा दो में पढ़ने वाली सात साल की इस मासूम को करीब दस घंटे तक कक्षा में बंद रहना पड़ा।

Author February 13, 2018 1:45 AM
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

दिल्ली के एक स्कूल में एक बच्ची के कक्षा के बंद रह जाने की जो खौफनाक घटना सामने आई है, उसने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। मासूम बच्चे अकसर स्कूल प्रशासन की ऐसी लापरवाही का शिकार होते रहे हैं। चाहे स्कूलों में हिंसा की घटनाएं हों या फिर दहला देने वाली अन्य घटनाएं, लगता है बच्चे स्कूल में सुरक्षित नहीं हैं। ताजा वाकया दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके के कैपिटल पब्लिक मॉडल स्कूल का है। स्कूल की तरफ से बच्चों को पिकनिक पर ले जाया जाना था। इसी आनन-फानन में किसी ने ध्यान नहीं दिया और एक बच्ची छूट गई, बाकी बच्चे निकल गए। कक्षा दो में पढ़ने वाली सात साल की इस मासूम को करीब दस घंटे तक कक्षा में बंद रहना पड़ा। पहले तो यह बच्ची रोती-बिलखती रही और फिर बेहोश हो गई। पता तब चला जब बच्ची के अभिभावक शाम को उसे लेने स्कूल पहुंचे। पहले तो जवाब मिला कि बच्ची पिकनिक पर गई ही नहीं। जब मामला पुलिस में पहुंचा और पुलिस ने स्कूल की तलाशी ली तो बच्ची कक्षा में बेसुध मिली।

स्कूल के शिक्षकों और प्रबंधन की इससे ज्यादा लापरवाही और क्या हो सकती है कि किसी को नहीं मालूम कि बच्ची स्कूल आई या नहीं, पिकनिक गई या नहीं। सवाल उठता है कि जब बच्चे स्कूल पहुंचे तो क्या हाजिरी नहीं ली गई? पिकनिक के लिए ले जाते समय भी हाजिरी हुई होगी। पिकनिक से लौटने के बाद भी एक-एक बच्चे को गिना गया होगा। लेकिन लापरवाही की इंतहा यह कि इस बच्ची के बारे में किसी को कुछ नहीं पता था। हैरानी की बात यह कि स्कूल में सुरक्षा गार्डों तक को बच्ची के रोने-चिल्लाने की आवाज सुनाई नहीं पड़ी। जब बच्ची के माता-पिता उसे लेने स्कूल पहुंचे तो उसकी शिक्षक और प्राचार्य दोनों अड़े रहे कि वह न तो स्कूल आई न पिकनिक पर गई। ऐसा नहीं है कि यह अपने में कोई पहली घटना है। पिछले साल मध्यप्रदेश के दमोह में एक छात्रा स्कूल में बंद रह गई थी। राजस्थान में भी पिछले साल ही अजमेर जिले के केकड़ी में एक स्कूल में चार से छह साल के बीच की नौ बच्चियां स्कूल में ही बंद रह गई थीं। इन्हें छुट्टी की घंटी सुनाई नहीं पड़ी थी और ये सब कक्षा में ही बैठी रह गर्इं और कर्मचारी स्कूल बंद कर चले गए थे।

जब बच्चा स्कूल परिसर में होता है तो उसकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की होती है। इस बारे में स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं। जैसे ही बच्चे को स्कूल बस में चढ़ाया जाता है या स्कूल परिसर में छोड़ा जाता है, वहीं से उसकी सुरक्षा का सारा दारोमदार स्कूल प्रशासन का हो जाता है और फिर छुट्टी के वक्त अभिभवाक को सौंपने तक स्कूल किसी भी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। लेकिन इस घटना में स्कूल की प्राचार्य और बच्ची की शिक्षक का जो गैरजिम्मेदाराना रवैया देखने को मिला, वह हैरान करने वाला है। अगर पुलिस स्कूल की छानबीन नहीं करती तो यह बच्ची कई घंटे और बंद पड़ी रहती और ऐसे में कोई अनहोनी भी हो सकती थी। ऐसे लापरवाह स्कूल प्रबंधन के खिलाफ क्या सख्त कार्रवाई नहीं होनी चाहिए!

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