ताज़ा खबर
 

बीमारी की रेल

करीब तीन महीने पहले पूर्वा एक्सप्रेस में एक यात्री ने जब खाने के लिए बिरयानी मंगाई तो उसमें मरी हुई छिपकली निकली थी।

Tejas Express, passengers ill, passengers ill after eating breakfast, breakfast, Tejas Express passengers, IRCTC, Indian Railway, food poisoning, CST Madgaon, Karmali-Chatrapati Shivaji Maharaj Terminus Tejas Express, Hindi news, Mumbai news, News in Hindi, Jansattaभारत की प्रीमियम ट्रेन तेजस एक्सप्रेस की शुरुआत इसी साल मई 2017 में हुई थी (Express photo by Nirmal Harindran 21st May 2017, मुंबई )

हमारे रेल मंत्रालय का दावा है कि वह यात्रियों को विश्वस्तरीय सेवाएं मुहैया कराने के लिए सब कुछ कर रहा है। लेकिन रविवार को गोवा और मुंबई के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस में रेलवे की जलपान इकाई आइआरसीटीसी का खाना खाने के बाद छब्बीस यात्रियों का बीमार पड़ जाना मंत्रालय के दावे पर सवालिया निशान है। गौरतलब है कि तेजस एक्सप्रेस को प्रीमियम ट्रेनों में शुमार किया गया है, जिनमें उच्चस्तरीय सेवाएं देने का प्रचार किया जाता है। लेकिन अगर खास मानी जाने वाली इस ट्रेन में यह दशा है, तो बाकी ट्रेनों के बारे में क्या हाल होगा, अंदाजा लगाया जा सकता है। एक बार फिर घटना की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया जाएगा, लेकिन ऐसी हर शिकायत के बाद यही होता है और सब कुछ पहले की तरह चलता रहता है। ट्रेनों में खराब भोजन की शिकायतें आम रही हैं। गनीमत है कि तेजस एक्सप्रेस के भोजन से यात्री सिर्फ बीमार हुए। वरना विषाक्त भोजन किसी के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है।

करीब तीन महीने पहले पूर्वा एक्सप्रेस में एक यात्री ने जब खाने के लिए बिरयानी मंगाई तो उसमें मरी हुई छिपकली निकली थी। यह एक बेहद गंभीर मामला था। लेकिन जब यह शिकायत सामने आई तो रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने खाना घर से लेकर सफर करने का सुझाव पेश कर दिया। आला दर्जे की सेवाएं मुहैया कराने का दम भरने वाले रेलवे का ऐसा जवाब क्या जिम्मेदारी-भरा कहा जा सकता है? कैग ने अपनी एक रिपोर्ट में यह तक कहा था कि रेल मुसाफिरों को जो खाना दिया जाता है, वह इंसानों के खाने लायक नहीं होता। इस्तेमाल की अंतिम तारीख के बाद भी दूषित या फिर बासी को ही फिर से गरम करके परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थ और उसके लिए निर्धारित कीमत से ज्यादा वसूलने की शिकायतें आम हैं। कैग की वह रिपोर्ट रेलवे के लिए आत्मावलोकन और गड़बड़ियों में सुधार करने का मौका होना चाहिए था। लेकिन आज भी हालत क्या है, यह तेजस एक्सप्रेस के वाकये से जाहिर है।

कहने को चलती ट्रेन में या फिर प्लेटफार्म पर खाने में गड़बड़ी होने पर आॅनलाइन शिकायत की व्यवस्था और दोषियों पर एक लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है। मगर ट्रेन से सफर करने वाले कितने यात्री ऐसी शिकायत कर पाने की स्थिति में होते हैं, यह सभी जानते हैं। पिछले कुछ सालों के दौरान प्रीमियम, सुविधा, फ्लेक्सी किरायों के आदि के नाम पर ट्रेन किराए में जिस कदर बढ़ोतरी की गई है, टिकट खरीदने से लेकर रद््द करने तक के लिए वसूली जाने वाली राशि का मनमाना निर्धारण किया गया है, उसके बरक्स यात्रियों की सुविधाओं के लिए कुछ भी नहीं हुआ है। गंभीर समस्याओं के बरक्स जब एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के खर्च से बुलेट ट्रेन चलाने की घोषणा होती है तो यही लगता है कि रेलवे को आम मुसाफिरों की ज्यादा फिक्र नहीं है।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 आयोग की साख
2 आफत में राहत
3 कांग्रेस को संजीवनी
यह पढ़ा क्या?
X